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महिला दिवस विशेष: ये हैं वे वीरांगनाएं जो जीतीं तो खौफ में हैं पर बुलंद हैं इनके हौसले

Fri, 08 Mar 2019 11:11 AM IST
अनिल पांडेय शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस - फोटो : Amar Ujala Graphics
दुनिया को दिखाने के लिए वो हंसती हैं, बोलती हैं, लेकिन मन तो हर पल फौजी की सुरक्षा में लगा रहता है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जब दुनिया की तमाम महिलाएं अपने क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए सम्मानित होती हैं, तब एक फौजी की मां, बहन और पत्नी सरहद पर तैनात बेटे, भाई और पति की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती हैं। वो कहती हैं, अब तो हमें डर को हर पल जीने की आदत हो गई है। लोग शौक पालते हैं, हमने अपने फौजी की सलामती का डर पाल लिया है...
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उर्मिला शहीद योगेंद्र यादव की पत्नी
उर्मिला डेंजर जोन में हूं, हो सकता है बात न हो -उर्मिला, शहीद योगेंद्र यादव की पत्नी
तब मोबाइल फोन नहीं होते थे। इसलिए कई बार तो 20-20 दिन तक बात नहीं हो पाती थी। शहीद होने से 15 दिन पहले हमारी आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने कहा था, उर्मिला मैं डेंजर जोन में हूं, हो सकता है अब फोन पर संपर्क न हो। मैं जब भी उनसे कहती, प्लीज़ मत जाओ, तो वो हंसकर मेरी बात टाल देते। कहते, तुम एक फौजी की पत्नी हो। पति योगेंद्र यादव की शहादत को याद कर वीर नारी उर्मिला कहती हैं, जंग में अपनों को खोने का गम फौजी के परिवार से पूछो। उर्मिला बताती हैं, 5 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध करीब खत्म होने को था, तब मेरे पति 'ऑपरेशन टाइगर हिल' के दौरान शहीद हो गए थे। 
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गीता देवी हरिओम सिंह की पत्नी
इंसान की कमी को पूरा नहीं कर सकतीं सुविधाएं -गीता देवी, हरिओम सिंह की पत्नी
सरकार ने फौजियों के परिवारों को बहुत सुविधाएं दी हैं, लेकिन ये सुविधाएं इंसान की कमी को पूरा नहीं कर सकतीं। जब वो सरहद पर ड्यूटी के लिए जाते हैं तो हर पल सांस अटकी रहती है। बच्चों की खातिर खुद को खुश रखती हूं। लेकिन इस मन का क्या करूं जो हर पल पति की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहता है।

कैंट स्टेशन के पास रहने वाली गीता देवी के पति हरिओम सिंह श्रीनगर में तैनात हैं। वह कहती हैं कि कोई शहीद हो तो दुख हर फौजी परिवार को होता है। कई बार पति का फोन नहीं आ पाता है तो पैरों तले जमीन खिसकी रहती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर
तन परिवार की सेवा में और मन सरहद पर  
बेटा जब सरहद पर जाता है तो मां से बड़ी आसानी से कह देता है, तू चिंता मत करना। मैं जल्द लौटूंगा। लेकिन जाने वाले कभी लौटकर आए हैं क्या? बेटे की हिम्मत न टूटे इसलिए मां भी पर्दे के पीछे से बोल देती है कि फोन करते रहना। एक फौजी जब ड्यूटी पर होता है तो घर पर उसकी मां, बहन और पत्नी हर पल खौफ के साए में जीती हैं। 
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नेहा, पुष्पेंद्र चाहर की पत्नी
मन लगता नहीं, लेकिन लगाना पड़ता है - नेहा, पुष्पेंद्र चाहर की पत्नी
पति जब सरहद पर दुश्मन से लड़ रहे हों, आतंकवादियों के खिलाफ मोर्चा लिए हों तो पत्नी का मन कैसे लग सकता है। हर पल मन में एक खौफ रहता है कि सब कुशल रहे। कैंट निवासी नेहा के पति पुष्पेंद्र चाहर फौज में हैं। पंजाब बॉर्डर पर तैनात हैं।

नेहा कहती हैं कि शादी 17 जनवरी को हुई है। परिवार के दूसरे लोग भी फौज में हैं, इसलिए खुद को संभाले रहती हूं। शादी के बाद कुल 10 दिन हम साथ रहे। अब जुलाई में वो आएंगे, तब कुछ वक्त साथ बिताएंगे। 
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शीला रवि, रवि नागपुरे की पत्नी
डरना अब आदत बन गई है -शीला रवि, रवि नागपुरे की पत्नी
लोग अपने शौक को पालते हैं, उसे आदत बनाते हैं, लेकिन मुझे तो हर पल डर लगने की आदत हो गई है। शीला रवि नागपुरे के पति रवि नागपुरे सेना में नायब सूबेदार हैं। सरहद पर भी पोस्टिंग मिलती रहती है। शीला कहती हैैं कि शादी को 19 साल हो गए, लेकिन 10 दिन से ज्यादा हम कभी साथ नहीं रह पाए।

जब उनसे बात नहीं होती तो कभी परिवार को फोन करती हूं, तो कभी यूनिट में फोन करने की कोशिश करती हूं। क्या करूं देश की सुरक्षा का सवाल है। पोस्टिंग भी बदलती रहती है तो डर बढ़ जाता है। अब तो डरने की आदत हो गई है। 
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माधुरी, तिवारी अर्जुन तिवारी की पत्नी
बात होने पर भी दिल को समझाना मुश्किल - माधुरी, तिवारी अर्जुन तिवारी की पत्नी
शादी को 22 साल हो गए। तब फोन नहीं थे। खत आने में 15 दिन लग जाते थे। जब तक चिट्ठी नहीं मिलती दिल डरता रहता था। अब वीडियो कॉलिंग कर उनको देख लेती हूं, बात हो जाती है, लेकिन दिल का डर नहीं जाता। माधुरी तिवारी के पति अर्जुन तिवारी बॉर्डर पर तैनात हैं।

माधुरी कहती हैं, फख्र है कि मैं फौजी की पत्नी हूं। लेकिन ये गर्व उस दिल को नहीं समझा सकता, जो दिल हर वक्त खौफ में जीता है। सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया है। खुद को मजबूत करती हूं। भगवान कभी रास्ता मत भटकने देना, सब ठीक रखना।
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अर्ची सिंह, शहीद अमित की पत्नी
पति हुए शहीद, अब बेटा करेगा देशसेवा  -अर्ची सिंह, शहीद अमित की पत्नी
आर्मी स्कूल में हॉस्टल लाइब्रेरियन अर्ची सिंह के पति मेजर अमित शर्मा एसएम ने आतंकियों से लड़ते हुए 2004 में शहादत दी थी। मेजर अमित उस समय पुंछ में तैनात थे। अर्ची का कहना है कि उन्हें अपने पति पर गर्व है कि उन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण दिए।

उनका मानना था कि अगर जीना है तो आज में जियो। कल का कुछ नहीं पता। अर्ची के ससुर एचएस शर्मा भी आर्मी में कर्नल रहे हैं। जिस वक्त उनके पति शहीद हुए, उनका बेटा अभिराज आठ साल का था। वह अभी एमआईईटी से पढ़ाई के साथ साथ पिता की तरह आर्मी में जाने की तैयारी कर रहा है।
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