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मेहमान परिंदों के कलरव से गुलजार हस्तिनापुर सेंक्चुरी, आंखों को सुकून, दिल को राहत देंगी तस्वीरें

Sun, 02 Feb 2020 11:20 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ/हस्तिनापुर
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हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी - फोटो : अमर उजाला
मेहमान परिंदों से हस्तिनापुर सेंक्चुरी गुलजार है। सुबह-शाम ये पक्षी अठखेलियां करते सबका मन मोह लेते हैं। दुनिया में 50 फीसदी ऐसे परिंदें हैं, जो सदियों से एक देश से दूसरे देश में हजारों मील का सफर तय करके प्रवास करने जाते हैं। दो फरवरी को विश्व वेटलैंड दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर देखें प्रकृति के साथ अठखेलियां करते इन विदेशी परिंदों की शानदार तस्वीरें: -
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हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी - फोटो : अमर उजाला
ये परिंदे रूस, मंगोलिया, चीन, अफ्रीका आदि देशों से भारत आते हैं। उत्तरी गोलार्ध में अक्तूबर माह में बर्फबारी होती है। ऐसे में वहां रहने वाले परिंदों को भोजन के अभाव में दूसरे देशों का रुख करना पड़ता है।

 
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हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी - फोटो : अमर उजाला
भारत में मौसम अनुकूल होने पर ये परिंदे गाजियाबाद, मेरठ, हस्तिनापुर सेंक्चुरी, ब्रजघाट और बिजनौर बैराज में नवंबर माह में आना शुरू कर देते हैं। दर्जनों प्रजाति के ये परिंदे फरवरी के अंत में अपने देश लौटना शुरू कर देते हैं। 

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हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी - फोटो : अमर उजाला
सूरज देखकर चुनते हैं दिशा
ये परिंदे झुंड में 30 से 35 हजार किलोमीटर का सफर तय करके आते हैं। दूरी तय करने में 10 से 12 दिन का समय लगता है। कुछ परिंदे रात को तो कुछ दिन में उड़ान भरते हैं। ये अपना रास्ता सूर्य की दिशा और चांद-तारों की स्थिति देखकर करते हैं। पर्वतों, नदियों, वनों और झीलों के जरिए ये जगहों की पहचान करते हैं।
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हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी - फोटो : हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी,Wetland Day 2020, Hastinapur wildlife sanctuary
अमेरिका में सौ फीसदी फ्लाइवेज हो चुके मैप
 फ्लाइवेज पक्षियों के अदृश्य आकाश मार्ग को कहते हैं। सदियों से इन्हीं फ्लाइवेज के जरिए पक्षी एक से दूसरे देशों में माइग्रेट करते रहे हैं। अमेरिका में पक्षियों के सौ फीसदी फ्लाइवेज मैप कर लिए गए हैं।
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हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी - फोटो : अमर उजाला
यूरोप में अस्सी फीसदी फ्लाइवेज मैप हैं। जबकि भारत में अभी तक सिर्फ चार फ्लाइवेज ही मैप किए गए हैं। रिंगिंग के बाद मार्ग जानने के लिए पक्षियों में सेटेलाइट मिनी ट्रांसमीटर लगाए गए। जीपीएस के जरिए उनके मार्ग को मैप किया गया। आज बर्ड साइंटिस्ट डेटा लॉगर्स के जरिए इस पर काम कर रहे हैं। 
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हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी - फोटो : अमर उजाला
दो फरवरी को मनाया जाता है वेटलैंड दिवस 
नदियों, झीलों, तालाबों आदि की खराब होती स्थिति को देखते हुए सन् 1971 में दो फरवरी को ईरान के रमसर में वेटलैंड कन्वेंशन को अपनाया गया था। इसका उद्देश्य उन आर्द्र क्षेत्रों पर प्रकाश डालना है, जो विलुप्त होने वाले हैं।

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हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी - फोटो : अमर उजाला
मेरठ की बात करें तो यहां भी ऐसा क्षेत्र कम होता जा रहा है। इसके कारण पक्षियों का जीवन खतरे में पड़ रहा है। सीनियर पक्षी विशेषज्ञ डॉ. रजत भार्गव बताते हैं कि 15 से 20 साल पहले तक मेरठ में अकेले कैंट क्षेत्र में छह-सात जगहों पर विदेशी पक्षी प्रवास के लिए आते थे।
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हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी - फोटो : अमर उजाला
अब अतिक्रमण के चलते एक-दो जगह ही बची हैं। तालाब खत्म हो गए। जहां पर बचे हैं, वहां पर पॉलीथिन और जलकुंभी से अटे पड़े हैं। जलकुंभी पक्षियों-जीवों की सबसे बड़ी दुश्मन है। इसमें पक्षी और मछली फंस जाते हैं। 
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