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बरसात में मुसीबत बने अंडरपास कई फुट तक जलभराव, आसपास के गांवों का कटा रहता है संपर्क

Thu, 23 Jul 2020 02:30 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत

सार

  • बरसात में कई-कई फुट तक हो जाता है जलभराव पानी
  • कई-कई दिन तक कटा रहता है आसपास के गांवों का संपर्क
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उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में यातायात सुविधा के लिए रेलवे की ओर से जनपद बागपत में 38 अंडरपास बनाए गए थे। मगर, बरसात में यह अंडरपास मुसीबत बन जाते है। एक अंडरपास के आसपास चार से पांच गांव बसे हुए है, जिनका एक-दूसरे संपर्क रहता है। बरसात में कई कई दिन तक जलभराव होने से आसपास के गांवों का संपर्क कटा रहता है।

बड़का गांव के ग्रामीण विक्की चौहान और अजय चौहान का कहना है कि बड़का अंडरपास से हिलवाड़ी, बड़का, बाम, औसिक्का व गुराना आदि गांव के ग्रामीणों का आवागमन रहता है। बरसात के दिनों में अंडरपास में पानी भरने से इन गांवों से संपर्क टूट जाता है। 
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बावली गांव के प्रधान ओमवीर, अनुज तोमर आदि का कहना है कि बावली अंडरपास से बावली, रूस्तमपुर, महावतपुर, बड़ौत, खड़खड़ी, जलालपुर, रमाला, बासौली, बरवाला आदि सहित कई गांवों का आवागमन होता है। मगर, बरसाती दिनों में अंडरपास से गुजरना जोखिम भरा रहता है।

असारा गांव के आरिफ, थल गांव के खलील का कहना है कि असारा अंडरपास में तो बिना बरसात ही आसपास खेतों से पानी टूटकर भरा रहता है। बरसात के मौसम मेें तो पूरा अंडरपास पानी से लगभग डूब जाता है। इससे रमाला, असारा, किरठल, अशरफाबाद थल, बुढ़पुर, गांगनौली, भगवानपुर, हिम्मतपुर सुजती, दोघट, लूंब, तुगाना आदि सहित कई गांवों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो जाता है।
 
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वर्ष 2019 में धंस गया था रेलवे ट्रैक
अंडरपास में पानी भरने से इसके ऊपर बनाया रेलवे ट्रैक के आसपास मिट्टी धंसने का खतरा रहता है। वर्ष 2019 में बड़का रेलवे अंडरपास के पास पटरी के नीचे व बराबर की मिट्टी का कटान होने से ट्रैक धंस गया था। इस कारण कई दिनों तक ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ था।
 

चल रहा अंडरपास पर टीनशेड लगाने का कार्य
स्टेशन अधीक्षक ओमवीर कुमार ने बताया कि इस समय अधिकांश अंडरपास पर टीनशेड व जल भराव को दूर करने का काम किया जा रहा है। पानी निकालने के लिए मोटर की व्यवस्था की गई है। मिट्टी कटान की आशंका के चलते रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए इस रूट पर कई जगह पर गति का कॉशन लगाया गया है, जिस कारण ट्रेन अंडरपास के ऊपर से धीमी गति से चल रही है।

 
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यह हुआ था खर्च
एक अंडरपास बनाने के लिए एक करोड़ 48 लाख रुपये का खर्च आया था। मार्च 2016 से मार्च 2017 तक मानव रहित रेलवे फाटक समाप्त कर उनके स्थान पर 38 अंडरपास बनाए गए थे।
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