फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दरोगा दुर्गविजय सिंह की मौत के बाद से गुस्से में थी 'खाकी', परिजन बोले- सुकून मगर ताउम्र रहेगा जख्म

Thu, 18 Jul 2019 12:08 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ/मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
1 of 6
पुलिस मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला
आतंक का पर्याय बने सुपारी किलर रोहित की अभिरक्षा से फरारी ने ही उसकी मौत तय कर दी थी। मंगलवार को जनपद पुलिस ने रोहित को ढेर कर दरोगा दुर्ग विजय सिंह की शहादत का भी बदला ले लिया।

वर्ष 2015 में सिखेड़ा क्षेत्र में गांव मोघपुर के निकट कानूनगो प्रमोद शर्मा और फिर खतौली में युवक की हत्या के बाद से रोहित जेल में बंद था। इसके बाद से ही वह लगातार जेल से ही अपने गुर्गों के जरिये गैंग को ऑपरेट कर अपने दहशतगर्दी के साम्राज्य को लगातार बढ़ाता जा रहा था। 
विज्ञापन

2 of 6
बदमाशों के पास से बरामद बाइक - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2017 में सुशील मूंछ के करीबी यशपाल राठी की हत्या के बाद उसकी हसरतें ओर अधिक परवान चढ़ी, जिसके बाद पहले फैजाबाद व फिर मिर्जापुर जेल में रहते हुए पहले वह संजीव जीवा गैंग के करीब हुआ और फिर सुशील मूंछ के करीबी रहे भूपेंद्र बाफर से हाथ मिला लिया। 

दो जुलाई को पानीपत-खटीमा राजमार्ग पर जानसठ क्षेत्र के गांव सालारपुर स्थित ढाबे पर मिर्जापुर पुलिस पर हमला कर अभिरक्षा से हुई फरारी ने रोहित की मौत की इबारत लिखी, जिसके बाद नौ जुलाई को दिल्ली एम्स में दरोगा दुर्गविजय सिंह की मौत ने उसकी मौत पर मुहर लगा दी। दरोगा की मौत के बाद से   खाकी गुस्से में थी, जिसका खामियाजा रोहित को मुठभेड़ में जान गंवाकर भुगतना पड़ा। 

 
विज्ञापन

3 of 6
मौके से बरामद पिस्टल - फोटो : अमर उजाला
रोहित ने 2011 में रखा था जरायम की दुनिया में कदम
मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर क्षेत्र के जौहरा निवासी एक लाख के इनामी कुख्यात सुपर किलर रोहित के आठ साल पुराने आतंक का अंत करने में पुलिस को महज आठ घंटे का वक्त लगा। 

पहले नई मंडी कोतवाली क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में मंगलवार की सुबह पांच बजे मुजफ्फरनगर में रोहित और राकेश यादव को मार गिराया। फिर आठ घंटे बाद ही दोपहर करीब एक बजे मेरठ के दौराला में अमित और रजत उर्फ कालिया को मुठभेड़ में ढेर कर पुलिस ने रोहित गैंग का लगभग पूरी तरह सफाया कर दिया है। 

 

4 of 6
मुठभेड़ में ढेर हुआ कुख्यात रोहित - फोटो : अमर उजाला
एक लाख के इनामी गांव जौहरा निवासी रोहित पुत्र नेपाल सिंह का आपराधिक सफर वर्ष 2011 में शुरू हुआ था। उसने मंसूरपुर क्षेत्र में कई बड़ी वारदातों को अंजाम देकर उगाही को धंधा बनाया। 

मिल मंसूरपुर के जीएम भगत सिंह के साथ ही एक सराफ पर भी जानलेवा हमला गुर्गों के माध्यम से कराया था। वर्ष 2015 में सिखेड़ा के मोघपुर के पास कानूनगो प्रमोद शर्मा की हत्या कर लाइसेंसी पिस्टल लूट लिया था। इसी वर्ष उसने खतौली में भी एक युवक का मर्डर किया, तभी वह पुलिस के हत्थे चढ़ा था जेल में बंद था। 

 
विज्ञापन

5 of 6
मुठभेड़ में ढेर हुआ कुख्यात रोहित - फोटो : अमर उजाला
जेल में रहते हुए ही उसका मंसूरपुर क्षेत्र में अवैध वसूली का काला कारोबार शुरू हुआ था। रोहित ने अपना आतंक जारी रखते हुए अपने गुर्गों से 25 जनवरी 2017 को माफिया सरगना सुशील मूंछ के करीबी यशपाल राठी का मंसूरपुर हाईवे पर उसकी दुकान के सामने ही मर्डर कराया था। यहीं से रोहित का माफिया सरगना सुशील मूंछ के साथ छत्तीस का आंकड़ा शुरू हुआ था। 

हालांकि जिस आपराधिक साम्राज्य को खड़ा करने में सुपारी किलर रोहित को आठ साल का समय लगा। एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि रोहित पर विभिन्न थानों पर हत्या, लूट, रंगदारी जैसे संगीन अपराधों के 44 मुकदमे दर्ज है, जबकि उसके साथ मारे गए राकेश यादव पर एक दर्जन मुकदमे दर्ज थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
एडीजी प्रशांत कुमार - फोटो : अमर उजाला
दरोगा के परिजन बोले, संतोष मिला पर जख्म ताउम्र रहेगा
दो जुलाई को मिर्जापुर पुलिस की अभिरक्षा से भागने वाले बदमाश रोहित उर्फ सांडू व उसके तीन साथियों के मुजफ्फरनगर और मेरठ में मुठभेड़ में मारे जाने पर शहीद एसआई दुर्ग विजय के परिजनों ने कहा इससे संतोष तो मिला है लेकिन यह जख्म तो ताउम्र रहेगा।

परिजनों को इस बात का भी मलाल है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें शोक संवेदना तक नहीं भेजी। न ही उनके दरवाजे तक कोई जिले का प्रतिनिधि ही पहुंचा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें