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मां की मौत के बाद भी पिता ने नहीं टूटने दिया बेटे का हौसला, साईकिल पर घर-घर दूध बेचकर बनाया क्रिकेटर

Mon, 02 Dec 2019 01:01 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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प्रियम गर्ग - फोटो : अमर उजाला
कहावत है कि इंसान की हर बड़ी सफलता के पीछे किसी न किसी का हाथ जरूर होता है। वर्ल्डकप में अंडर-19 टीम इंडिया की कप्तानी की कमान मिलने वाले प्रियम गर्ग की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

पिता नरेश गर्ग ने बेटे को क्रिकेटर बनाने का सपना देखा और उसे दस साल की कड़ी मेहनत के बाद उसे पूरा भी किया। साईकिल पर घर-घर जाकर दूध बेचकर बेटे के सपनों को आकार दिया। आगे स्लाइड्स में जानें आखिर कैसा रहा प्रियम को अंडर 19 क्रिकेट टीम का कप्तान बनने तक का सफर -
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प्रियम गर्ग - फोटो : अमर उजाला
मूल रूप से मेरठ के किला परीक्षितगढ़ निवासी, प्रियम गर्ग महज आठ साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलने लगे। पिता नरेश गर्ग ने बताया गांव के स्कूली मैदान में वो दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने जाता था।

कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि प्रियम बल्लेबाजी बहुत अच्छी करता है, उसकी प्रतिभा निखरे  इसके लिये वह मेरठ में उसको क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कराएं। लेकिन प्रियम के पिता नेरश गर्ग साईकिल से घर-घर जाकर दूध बेचकर आजीविका चलाते थे। उनके लिए यह मुश्किल था।
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प्रियम गर्ग खेल के मैदान पर - फोटो : social media
नरेश गर्ग ने बताया उनकी आर्थिक स्थिति सामान्य थी, न ही कोई मजबूत सोर्स था। जिससे वह अपने बेटे का एडमिशन मेरठ में करा सकें।

गांव के लोगों ने हौसला बढ़ाया तो कुछ दिनों बाद पिता नरेश ने भामाशाह पार्क में कोच संजय रस्तोगी से मुलाकात की। कोच संजय रस्तोगी ने प्रियम की बल्लेबाजी देखी तो उन्हें उसके अंदर भविष्य का अच्छा क्रिकेटर नजर आया।

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प्रियम के पिता नरेश गर्ग, दो बड़ी बहनें और भाई शिवम - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में एकेडमी ज्वाइन कराने के बाद पिता ने बेटे प्रियम गर्ग को अच्छा क्रिकेटर बनाने के लिये दिन-रात मेहनत की। प्रतिदिन किला परीक्षितगढ़ से मेरठ भेजने और उसको वापस लाने की जिम्मेदारी भी बड़ी थी। क्योंकि 2009 में साधनों की कमी के चलते कई बार साइकिल से भी मेरठ आना पड़ता था।

पिता नरेश गर्ग वर्तमान में स्वास्थ विभाग में गाड़ी चालक हैं, दूध का काम छोड़कर वह गाड़ी चलाकर अपना घर चला रहे हैं। जबकि रणजी मैचों में खिलाड़ी बेटे का सलेक्शन होने के बाद बेटे को अच्छी रकम मिलती है, जिससे घर के हालात अब पहले से बेहतर हो गए हैं।
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priyam garg - फोटो : अमर उजाला
पढ़-लिख कर बड़ा अधिकारी बन जाएगा
दस साल पहले खेलों को लेकर माता-पिता और परिवार के लोग बेहद नाराज रहते थे। प्रियम गर्ग के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। मां कुसुम देवी भी प्रियम को समझाती थी कि खेल में कुछ नहीं रखा है। पढ़-लिख ले बड़ा अधिकारी बना जाएगा, लेकिन प्रियम के अंदर क्रिकेटर बनने का जुनून सवार था।

2011 में प्रियम की मां कुसुम देवी की बिमारी के कारण मृत्यु हो गई। उस समय प्रियम की उम्र मात्र 11 साल थी। मां की मौत के बाद पिता नरेश गर्ग ने प्रियम का हौसला नहीं टूटने दिया। मां की मौत के दौरान उसने एकेडमी जाना छोड़ दिया था। लेकिन कुछ दिनों बाद पिता ने उसको फिर से एकेडमी भेजना शुरू किया।

इसके बाद यूपी अंडर-14, 16, 19 में उसका चयन होता चला गया। प्रियम का प्रदर्शन दिन प्रतिदिन निखरता गया। एक क्रिकेटर के जीवन में खेल के साथ टीम की कप्तानी भी मिले तो पिता के लिए इससे बड़ा गौरव नहीं हो सकता।
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प्रियम गर्ग - फोटो : अमर उजाला
वर्ल्डकप लाए तो चौड़ा होगा सीना
पिता नरेश गर्ग ने कहा कि बेटे को टीम की कप्तानी मिली है यह अच्छी बात है। अब अंडर-19 वर्ल्डकप देश को दिलाए तो सीना चौड़ा होगा।

पांच बहन भाईयों में सबसे छोटे प्रियम पर गांव के लोग भी भरोसा करते हैं। उन्हें पहले से ही उम्मीद थी कि प्रियम एक दिन टीम इंडिया में जरूर जाएगा। बहन पूजा गर्ग, ज्योति गर्ग, रेशु गर्ग व भाई शिवम गर्ग ने प्रियम के कप्तान बनने पर खुशी जताई है।
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तेज गेंदबाज कार्तिक त्यागी - फोटो : अमर उजाला
तेज गेंदबाज कार्तिक त्यागी भी टीम में शामिल
मूल रूप से हापुड़ निवासी कार्तिक त्यागी भामाशाह पार्क में संजय रस्तौगी से प्रशिक्षण ले रहे हैं।
जबकि इंग्लैंड दौरे से लेकर घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन की बदौलत कार्तिक का चयन वर्ल्डकप टीम के लिए हुआ है। तेज गेंदबाज कार्तिक कई बार विपक्षी टीम को धराशायी कर चुके हैं।
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