priyam garg
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पढ़-लिख कर बड़ा अधिकारी बन जाएगा
दस साल पहले खेलों को लेकर माता-पिता और परिवार के लोग बेहद नाराज रहते थे। प्रियम गर्ग के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। मां कुसुम देवी भी प्रियम को समझाती थी कि खेल में कुछ नहीं रखा है। पढ़-लिख ले बड़ा अधिकारी बना जाएगा, लेकिन प्रियम के अंदर क्रिकेटर बनने का जुनून सवार था।
2011 में प्रियम की मां कुसुम देवी की बिमारी के कारण मृत्यु हो गई। उस समय प्रियम की उम्र मात्र 11 साल थी। मां की मौत के बाद पिता नरेश गर्ग ने प्रियम का हौसला नहीं टूटने दिया। मां की मौत के दौरान उसने एकेडमी जाना छोड़ दिया था। लेकिन कुछ दिनों बाद पिता ने उसको फिर से एकेडमी भेजना शुरू किया।
इसके बाद यूपी अंडर-14, 16, 19 में उसका चयन होता चला गया। प्रियम का प्रदर्शन दिन प्रतिदिन निखरता गया। एक क्रिकेटर के जीवन में खेल के साथ टीम की कप्तानी भी मिले तो पिता के लिए इससे बड़ा गौरव नहीं हो सकता।