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तीन दोस्तों की मौत: पति का शव देख बिलख पड़ी पत्नी, नहीं थम रहे परिजनों के आंसू, देखें भावुक तस्वीरें

Sun, 14 Jul 2019 09:34 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के कालसी-चकराता मार्ग पर कार खाई में गिरने से अकाल मौत का ग्रास बने तीनों दोस्तों के शव एक साथ सहारनपुर पहुंचे। शवों के पहुंचते ही कोहराम मच गया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मोहल्ले में शोक छा गया। परिजनों को बिलखते देख मौजूद हर किसी की आंख नम हो गईं। अगली स्लाइडों में तस्वीरों के साथ जानिए पूरा अपडेट-
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शव पहुंचते ही मचा कोहराम - फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर में अमरदीप कॉलोनी में शाम लगभग साढ़े पांच बजे जैसे ही वीरेंद्र का शव एंबुलेंस से उसके घर पहुंचा तो पूरा मोहल्ला एकत्रित हो गया। पत्नी रचना शव को देखते ही चीख पड़ी और बेसुध सी हो गई। भतीजी, भतीजे शव को देखते ही बिलख पड़े। भाई प्रताप सिंह भी अपने भाई के शव से लिपट कर रो पड़े। वहां मौजूद हर किसी की आंख नम हो गई। वीरेंद्र के भाई प्रताप ने बताया कि वीरेंद्र हाल में ही देहरादून स्थित आईडीएफसी में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में नियुक्त हुआ था। वीरेंद्र का चार साल पूर्व ही विवाह हुआ था। उसके तीन साल का एक बेटा है।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
यही हाल गोविंद विहार में डॉक्टर जगपाल त्यागी के घर का था। जगपाल त्यागी के बेटे गौरव त्यागी की लगभग ढाई साल पहले ही शादी हुई थी। उसकी एक साल की बेटी है। गौरव के घर में शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। गौरव त्यागी अपने परिवार का इकलौता पुत्र था। उसकी एक बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है। पिता डॉक्टर जगपाल त्यागी एक ओर बैठे अपने बेटे के शव को देख रहे थे। उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे।

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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
नानक विहार में चार माह पूर्व ही मकान बनाकर रहने के लिए गया था दीपक तोमर। दोपहर तक तो उसकी पत्नी को हादसे के बारे में बताया ही नहीं गया। लेकिन जैसे ही शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। दीपक के तीन साल का बेटा और एक साल की बेटी है। महिलाएं उसकी पत्नी को संभालने का प्रयास कर रहीं थीं।
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मृतक दीपक तोमर का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
घर से काम के सिलसिले में जाने की बात कहकर गए थे
गौरव त्यागी के पिता डॉक्टर जगपाल त्यागी ने बताया कि गौरव के घर से निकलने के कुछ देर बाद ही वह घर पहुंचे थे। उन्होंने घर पर पूछा तो उन्हें बताया कि गौरव, दीपक और वीरेंद्र के साथ कुछ काम से गया है। दोनों उसके दोस्त थे। एक दिन बाद आने की बात कही थी। उन्होंने उस पर भरोसा कर लिया।
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मृतक वीरेंद्र कुमार का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
तीन घंटे बाद ही बंद आने लगे थे मोबाइल फोन
डॉक्टर जगपाल त्यागी ने बताया कि दो तीन घंटे बाद उन्होंने गौरव से बात करने का प्रयास किया। जिससे पता चल सके कि वह कहां है और कब तक आएगा। लेकिन उसका फोन ही नहीं मिला। पहले कवरेज क्षेत्र से बाहर आता रहा। उसके बाद से फिर फोन कॉल मिल ही नहीं सकी। मिली तो सिर्फ गौरव की लाश।

दो दिन पहले ही मकान का लिंटर खुला था
वीरेंद्र और दीपक अच्छे मित्र थे। दीपक ने नानक विहार में कुछ माह पूर्व ही मकान बनवाया था। उसके बाद वीरेंद्र ने भी नानक विहार में ही अपना मकान बनवाना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि दो दिन पहले ही वीरेंद्र के मकान का लिंटर खुला था। उस पर तेजी से काम चल रहा था।
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मृतक त्यागी गौरव त्यागी - फोटो : अमर उजाला
दीपक की कार लेकर गए थे तीनों दोस्त
चकराता के लिए वीरेंद्र अपनी कार लेकर दीपक के घर पहुंचा। जहां उसने अपनी कार खड़ी कर दी और उसके बाद दीपक की ही कार से गौरव, सचिन और शक्ति के साथ शुक्रवार की रात को ही चकराता के लिए निकल गए थे। शुक्रवार रात में ही दुर्घटना हो गई।

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शव पहुंचते ही मचा कोहराम - फोटो : अमर उजाला
कागज की तरह नजर आ रही थी ऊपर से कार
हादसे की सूचना के बाद उनके शव को लेने गए एक व्यक्ति ने बताया कि कार गहरी खाई में गिरी थी। जहां से कार गिरी थी, वहां से खाई में देखने पर कार मात्र कागज का टुकड़ा नजर आ रही थी। उसने बताया कि शुक्रवार रात को कार गिरने के बाद पांचों दोस्त कार से बाहर निकल चुके थे। लेकिन घायल होने के कारण वहीं पर गिर पड़े। शनिवार दोपहर में पहाड़ की तलहटी के गांव की किसी महिला ने उधर से गुजरते हुए लोगों को इसकी सूचना दी। जिसके बाद वहां की पुलिस ने पहुंचकर छानबीन की थी।
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हादसे में मारे गए तीनों युवक दीपक,गौरव व सन्नी - फोटो : अमर उजाला
दीपक के भाई की हुई थी हत्या
दीपक तोमर के पिता कालूराम पुलिस महकमे से कुछ वर्ष ही सेवानिवृत्त हुए हैं। दीपक दो भाई थे। एक भाई मुजफ्फरनगर में पढ़ता था। जिसकी कुछ साल पहले हत्या हो गई थी। दीपक ही अपने माता-पिता का अकेला पुत्र रह गया था।

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