मृतका रिहाना
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बस अब कुछ नहीं बचा
मनोविज्ञानी डॉ. कशिका जैन के अनुसार ऐसे कदम उठाने का बड़ा कारण निराशा और डर है। जब इंसान को लगता है कि बस अब कुछ नहीं बचा, चारों तरफ बस अंधेरा और डर है। ऐसी स्थिति में अवसाद बढ़ता जाता है, इंसान मरने से पहले ही मर जाता है। निराशा के चलते पूरे परिवार को खत्म कर देता है। आर्थिक तंगी, निजी परेशानी, कर्ज, आपसी झगड़े इस अवसाद के कारण होते हैं।