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रावण के साथ दशहरे पर करें इन 10 बुराइयों का दहन, खुल जाएंगे तरक्की के रास्ते

Thu, 18 Oct 2018 07:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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दशहरा पूजा 2018
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। श्री रामलीला आयोजकों और नागरिकों का कहना है कि इस पर्व पर बेशक बुराई के प्रतीक रावण का दहन किया जा रहा है। लेकिन बुराई के इस प्रतीक के साथ समाज में व्याप्त अन्य बुराइयों का दहन करना जरूरी है। जिससे समाज में फैली कुरीतियां एवं कुछ लोगों की दूषित मानसिकता दूर हो सके। इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपना कर्तव्य समझकर ध्यान देना होगा। तभी, गांव, कस्बा, शहर, जनपद, प्रदेश और देश तरक्की कर पाएगा। जानें कौन सी हैं ये दस बुराइयां :-
 
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भ्रष्टाचार और मिलावटखोरी की समाप्ति            

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रावण दहन - फोटो : फोटो साभार- पीटीआई
रेलवे यूथ सोशल क्लब के मुख्य संयोजक चंद्रजीत सिंह निक्कू का कहना है कि सरकारी तंत्र और समाज में फैले भ्रष्टाचार तथा खाद्य पदार्थों में मिलावट खोरी को जड़ से खत्म करने के लिए नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों व व्यापारियों को मिलकर आगे आना होगा। दशहरा पर्व पर रावण के पुतले के दहन के साथ इन बुराईयों का दहन जरूरी है। इसके लिए सबको संकल्प लेना होगा।                  
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लें स्वच्छता का संकल्प

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रावण दहन - फोटो : अमर उजाला
उत्तर रेलवे नाटक क्लब माल गोदाम रोड के प्रधान रवि जुनेजा का कहना है कि सरकारें आज स्वच्छता के प्र िलोगों को प्रेरित कर रही है। स्वच्छता से ही स्वस्थ और सुंदर वातावरण मिलता है। हमें दशहरा पर अपने घर, गली, मोहल्ले, गांव और जिले को स्वच्छ रखने का संकल्प लेना होगा। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह स्वच्छता में पूर्ण रूप से अपना योगदान दे। ताकि सुंदर और स्वच्छ समाज का निर्माण हो सके।                    

माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान

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रावण दहन - फोटो : अमर उजाला
मानवीय कल्याण समिति लेबर कॉलोनी के प्रधान संदीप रावत का कहना है कि वर्तमान दौर में देखा जा रहा है कि युवा पीढ़ी माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान नहीं करती। ऐसे कई मामले सामने भी आ चुके हैं। युवा पीढ़ी को चाहिए कि वह माता-पिता और बुजुर्गों का आदर करे। ऐसे कई बुजुर्ग वृद्ध आश्रम में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जिनके बच्चे इंजीनियर, डाक्टर, अधिकारी और निजी संस्थानों में बड़े पदों पर हैं, लेकिन वह अपने माता-पिता को साथ नहीं रखते हैं। इस बुराई को खत्म करने के लिए युवा पीढ़ी को असत्य पर सत्य की जीत के पर्व पर संकल्प लेना होगा। ताकि कोई बुजुर्ग वृद्घ आश्रम में न रहे।                    
               
 
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महिलाओं पर होने वाले अत्याचार रोक              

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रावण दहन - फोटो : amar ujala
पूर्व विधायक शशी बाला पुंडीर का कहना है कि एक तरफ नवरात्र में कन्याओं को दुर्गा के रूप में पूजा जाता है, लेकिन समाज में फैली कन्या भ्रूण हत्या सबसे बड़ी कुरीति है। बेटा और बेटी में फर्क समझा जाता है। हमें कन्या भ्रूूण हत्या, महिला उत्पीड़न, अत्याचार पर अंकुश लगाने के लिए संकल्प लेना होगा।                  
                 

 
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धर्म और जाति की मानसिकता का खात्मा            

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
प्राचीन रामलीला कमेटी के प्रधान अनिल अग्रवाल का कहना है कि वर्तमान में धर्म और जाति के नाम पर आए दिन विवाद होने के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में नागरिकों का कर्तव्य है कि वह किसी के बहकावे न आकर सांप्रदायिक सौहार्द कायम करें और रावण के पुतले के साथ इस बुराई का भी अंत करें। हमें मिलजुलकर एक-दूसरे के त्योहार मनाने चाहिएं।        
         
 
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पर्यावरण को बचाने का लें संकल्प          

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
भारतीय कला मंच श्री रामलीला सभा गोविंदनगर के महामंत्री वरुण शर्मा का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण के कारण आज पर्यावरण दूषित हो चुका है, जिससे गंभीर बीमारियां भी उत्पन्न हो रही हैं। इसके साथ ही मौसम में भी बदलाव देखा जा रहा है। बिगड़ते पर्यावरण संतुलन को लेकर पूरा विश्व चिंतित है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बनता है कि पर्यावरण को बचाने के लिए वह पौधरोपण करे। रावण के पुतले के दहन के साथ हमें यह संकल्प लेना होगा।        

जल ही जीवन है, अब न संभले तो होंगे घातक परिणाम            

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रावण दहन
भारतीय कला संगम श्री रामलीला सभा टी-2 कॉलोनी के अध्यक्ष सतपाल कालड़ा का कहना है कि जलस्तर लगातार गिर रहा है। जल के बिना जीवन संभव नहीं है। यह बात हर नागरिक जानता है, लेकिन जल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव है। हमें जल की बर्बादी रोकनी होगी। जल संरक्षण की जिम्मेदारी हर नागरिक की बनती है। इस पर ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना होगा। विजय दशमी पर हमें जल संरक्षण का प्रण लेना होगा।        

स्वास्थ्य व्यवस्था हो बेहतर        

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नही हुआ रावण दहन - फोटो : अमर उजाला
हकीकत नगर निवासी समाजसेवी विरेंद्र बहल का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में आज भी मरीजों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पाती है, जिस कारण हर साल बड़ी संख्या में मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं। बेहतर इलाज न मिलना बहुत बड़ी बुराई है। ऐसे में निजी और सरकारी चिकित्सकों को संकल्प लेना होगा कि वह मरीज को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अपनी जिम्मेदारी का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करें।                    

बाल मजदूरी पर रोक                

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रावण दहन - फोटो : अमर उजाला
सतयुग आश्रम मॉडल इंटर कॉलेज के अध्यापक ब्रिजेश पुंडीर का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चे बाल मजदूरी करते देखे जा सकते हैं, जिस उम्र में उन्हें स्कूल में पढ़ना चाहिए, उस उम्र यह बच्चे होटल, ढाबों और चाय की दुकानों पर नौकरी कर रहे हैं। क्योंकि, इनके माता-पिता बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है। समाज को संकल्प लेकर ऐसे बच्चों की सहायता के लिए आगे आना होगा। ताकि देश का भविष्य सुरक्षित हो सके।                    
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अशिक्षा का खात्मा जरूरी            

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रावण दहन
समाजसेवी संजय कर्णवाल का कहना है कि समाज में अशिक्षा का खात्मा जरूरी है। बड़ी संख्या में लोग आज भी अशिक्षित हैं। अभिभावकों और समाज के प्रबुद्घ लोगों को अशिक्षा दूर करने का संकल्प लेना होगा। पढ़ाई के प्रति अलख जगानी होगी। ताकि बच्चे पढ़कर लिखकर सशक्त और विकसित हिंदुस्तान का निर्माण कर सकें।

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