अगर बीमारी से भी मौतें हुई हैं तो पुलिस ने पोस्टमार्टम क्यों नहीं करवाया। वहीं, पुलिस और गांव के प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण पीड़ित परिवार भी खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं। सरकारी तंत्र इसी कोशिश में है कि कोरोना के शोर में शराब से मौतों का मामला दब जाए।
खुद को बचाने में जुटे जिम्मेदार अफसर
पुलिस प्रशासन से आबकारी विभाग के अफसर भी इस मामले में खुद को बचाने में जुटे हैं। इसलिए जहरीली शराब बांटने से लेकर सप्लाई करने वालों पर कार्रवाई करने की बजाय बीमारी से मौत होने शोर ज्यादा मचाया जा रहा है। वहीं, गांव के कुछ प्रबुद्ध लोगों ने नसीहत देना शुरू किया है कि वे नशे के चक्कर में जहरीली शराब न पीएं अन्यथा और परिवार बर्बाद हो जाएंगे।
जान गंवाने वालों में एक ही मोहल्ले के सात लोग शामिल
साधारणपुर गांव में लगातार 10 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों में कोहराम मच गया है। अपनों को खो चुके कुछ परिवारों की महिलाएं और बच्चे दिनभर रोते बिलखते रहे तो कुछ में मातम पसरा रहा। मरने वालों में सात लोग एक ही मोहल्ले के हैं। ये राज मिस्त्री थे। पड़ोसियों और अन्य ग्रामीणों ने पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी।
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गांव में लाला, महेंद्र, पंकज, अंकित सहित अन्य लोगों की स्थिति गंभीर बताई जा रही हैं। इनके परिजन दहशत में हैं। कुछ ग्रामीणों ने चुनाव के समय शराब बांटने वाले प्रत्याशियों को कोसना शुरू कर दिया। वहीं, कुछ बुजुर्ग और जिम्मेदार लोग युवाओं को शराब की लत से दूर रहने की नसीहत दे रहे हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गुस्सा रहा कि पुलिस ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। यदि पुलिस और आबकारी विभाग सक्रिय रहता तो शायद इतनी जिंदगियां खत्म न होतीं।
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