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अमर उजाला लाइव रिपोर्ट: रैन बसेरों की ये 7 तस्वीरें देख चौंक जाएंगे आप

Fri, 26 Oct 2018 04:49 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में रात में पारा गिरना शुरू हो गया है। गरीबों को आसरा देने के लिए बनाए गए रैन बसेरे खुद बेसहारा दिख रहे हैं। न यहां की ठीक से चौकीदारी हो रही है और न ही सीसीटीवी कैमरे व अन्य सामान का रखरखाव। हालात इतने खराब हैं कि असामाजिक तत्वों ने रैन बसेरों में रखे तख्त और अन्य सामान को तोड़ दिया है। सीसीटीवी कैमरों में धूल चढ़ी है। पूरे साल रैन बसेरों में कौन रुका इसका रिकॉर्ड भी सीसीटीवी में मिलना मुश्किल है।

टूटा सामान मिला
अमर उजाला की टीम ने बुधवार को शहर के रैन बसेरों की स्थिति का जायजा लिया तो रैन बसेरों की बदहाली नजर आई। इस दौरान रैन बसेरों के गेट तो खुले मिले, लेकिन यहां न तो चौकीदार थे और न ही कहीं पर सीसीटीवी कैमरे चलते मिले। इतना ही नहीं अधिकतर रैन बसेरों में खाली तख्त और टूटा सामान पड़ा था।

12 रैन बसेरों में लगवाए थे कैमरे
शहर में 12 रैन बसेरों का संचालन नगर निगम करता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सभी रैन बसेरों में सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी लगवाए गए थे। अब रैन बसेरों की हालत बदहाल है। यहां पर कैमरे ले दिखाई तो देते हैं, लेकिन काम कोई कैमरा नहीं कर रहा है। आगे देखिए तस्वीरें:-
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
टीम सबसे पहले बच्चा पार्क स्थित रैन बसेरे में पहुंची। यहां पर रैन बसेरे के गेट खुले थे। एक मूक बधिर व्यक्ति अंदर बैठा हुआ था। तख्तों पर गद्दे पड़े थे। सीसीटीवी कैमरे तो लगे थे, लेकिन स्क्रीन कहीं नहीं दिखी।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कासमपुर पहाड़ी के बीच रैन बसेरे पर ताला लटका मिला। यहां पर न तो कोई कर्मचारी मिला और न ही सीसीटीवी कैमरे दिखाई दिए।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सूरजकुंड महापौर कैंप कार्यालय के पीछे रैन बसेरे के कार्यालय में निगम ने स्ट्रीट लाइट का कार्यालय का खोला हुआ है। वहीं हॉल में तख्त पर गद्दे डले हुए थे। लेकिन यहां पर कोई चौकीदार नहीं मिला। एक युवक ने बताया कि शाम के समय चौकीदार आता है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सूरजकुंड पानी की टंकी परिसर में रैन बसेरे के गेट खुले थे। अंदर कमरों में तख्त पड़े थे, लेकिन गद्दे आदि सामान नहीं था। पीछे शौचालय में लगे वासवेशन टूटे पड़े थे। चौकीदार भी नहीं था।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
प्रतिवर्ष होती है लाखों की खरीद
रैन बसेरों के लिए हर वर्ष रजाई गद्दे आदि सामान खरीदा जाता है। हालांकि पिछले साल नगरायुक्त ने निगम अधिकारियों को रैन बसेरे गोद दे दिए थे। अधिकारियों ने अपने पैसे से रजाई गद्दे, बाल्टी, टॉर्च, झाडू आदि की व्यवस्था करायी थी। अब वह रजाई गद्दे कहां हैं, फिलहाल इसका कुछ नहीं पता। अभी तक तो निगम प्रशासन ने इन रैन बसेरों के संबंध में सोचना भी शुरू नहीं किया है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
जवाब-तलब करेंगे
नवंबर के दूसरे सप्ताह में रैन बसेरे 24 घंटे के लिए खोल दिए जाएंगे। फिलहाल गर्मी के मौसम में रात्रि में ही खुल रहे थे। रैन बसेरों का निरीक्षण किया जाएगा। अगर सामान गायब है तो संबंधित अधिकारी और चौकीदारों से जवाब-तलब किया जाएगा। रैन बसेरे ठीक से संचालित होंगे। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त।

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