हाथ में रंगीन फुदने वाला एकतारे को कभी भीम की गदा, कभी कृष्ण का चक्र तो कभी अर्जुन का धनुष बनाकर पांड़वों की कहानी को गायन के माध्यम से प्रस्तुत करने वाली तीजन बाई पांडवानी किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। देश-विदेश में अपनी अद्भुत कला का परचम लहराने वाली और पद्मविभूषण, पद्मभूषण और पद्मश्री से सम्मानित तीजन बाई के जीवन की कहानी अब फिल्मी पर्दे पर नजर आएगी। और महाभारत की धरती हस्तिनापुर से इस कहानी की शुरुआत होगी।