सूर्य ग्रहण
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सूर्यग्रहण का तीन काल होता है। प्रथम, द्वितीय और अंतिम यानि मोक्षकाल। प्रारंभ काल के दौरान स्नान और जप किया जाना चाहिए। मध्यकाल यानि द्वितीय समय में देव पूजन कर सकते हैं और मोक्ष्रकाल के दौरान दान का बेहद महत्व है। यदि कहीं सरोवर और नदी हो तो उसमें ग्रहण उपरांत स्नान से ग्रहण से होने वाले कष्टों का हरण हो जाता है। -राधवेन्द्र स्वामी, महंत और ज्योतिषाचार्य, श्रीराम पंचायतन सिद्घपीठ