मेरठ में स्थित श्री औघड़नाथ शिव मन्दिर एक प्राचीन सिद्धपीठ है जहाँ प्राचीन काल से शिव की अराधना की जाती है। इस मन्दिर में शिवलिंग स्वयंभू हैं। भक्तों की मनोकामनायें पूर्ण करने वाले औघड़दानी शिवस्वरूप हैं। इसी कारण इसका नाम औघड़नाथ शिव मन्दिर पड़ा।
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औघड़नाथ शिव मन्दिर
ब्रह्मांड में शिव व शक्ति के मिलन का महादिवस महाशिवरात्रि 24 फरवरी को स्वार्थ सिद्ध योग में शुक्रवार को मनाई जाएगी। शाम 6:30 बजे से श्रवण नक्षत्र आ जाने से त्रियोग बन रहा है। इससे त्रिनेत्री महाशिव की कृपा का यह महान दिवस महाशिवरात्रि हो गई है। इस तरह का यह विशेष योग इस सदी में पहली बार पड़ रहा है। महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा और रुद्राभिषेक सभी प्रकार के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में समर्थ होगा।
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चार प्रहर पूजा प्रारंभ करने के विशेष मुहूर्त
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शिवलिंग पर जल चढ़ाते भक्त
भारत ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष ज्योतिष वैज्ञानिक भारत ज्ञान भूषण ने बताया कि चार प्रहर पूजा प्रारंभ करने के लिए विशेष मुहूर्त है। इसमें प्रथम प्रहर शाम 6:13 बजे से 6:20 बजे, दूसरा प्रहर रात 9:24 बजे से 9:30 बजे, तीसरा प्रहर रात 12:34 बजे से 1:39 बजे और चौथा प्रहर सुबह 3:45 बजे से 3:49 बजे तक है। प्रहर पूजन प्रारंभ से तीन घंटे के अंदर महाशिवरात्रि पूजन पूर्ण कर लेना चाहिए। तब इसके अगले प्रहर की पूजा प्रारंभ करनी चाहिए।
पंडित श्रीधर त्रिपाठी जी से खास बातचीत
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पंडित श्रीधर त्रिपाठी
बाबा औघड़नाथ मंदिर के पुजारी पंडित श्रीधर त्रिपाठी ने बताया कि रुद्र के नेत्र ही रुद्राक्ष कहलाते हैं। रुद्राक्ष मानव के जीवन में सकारात्मक प्रभाव लाते है। शनि पीठ के महामंडलेश्वर महेंद्र दास जी ने बताया कि महाशिवरात्रि में केवल पांच प्रकार की पूजा से ही पंच तत्वों का संतुलन हो जाता है। शास्त्रों में पूजा के पांच प्रकार बताए गए है। अभिगमन, उपादान, योग, स्वाध्याय और इज्या। जब पंडित जी औघड़नाथ मंदिर के स्थापना दिवस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि 1857 की क्रांति के समय से ही यह मंदिर यहां स्थित हैं। हालांकि कुछ लोग यह भी मानते है कि औघड़नाथ मंदिर प्रथम क्रांति के समय से पहले ही यहां स्थित हैं। उन्होंने बताया कि यहां देश-विदेश से भक्त आते हैं। पंडित जी ने कहा कि जो लोग यहां सच्ची श्रृद्धा से आते हैं उनकी मनोकामना पूरी होती है।
राजराजेश्वरी मंडिर के पुजारी दिव्यानंद जी महाराज और मंदिर महादेव के पुजारी संजय त्रिपाठी ने बताया कि फूल और फल व पत्ते पेड़ों पर जिस तरह उगते है ठीक उसी तरह से दाहिने हाथ की हथेली को सीधा करके मध्यमा अनामिका और अंगूठे की सहायता से इस प्रकार चढ़ाए तकि फूल व फल क मुख ऊपर की तरफ हो।