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मोहर्रम में मनाया इमाम का गम, शिया सोगवारों ने छुरियों-जंजीरों से किया मातम, देखें तस्वीरें

Tue, 18 Sep 2018 07:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मोहर्रम में मातम मनाते शिया सोगवार - फोटो : अमर उजाला
पश्चिमी यूपी के अलग अलग शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के सभी इमामबारगाहों व अजाखानों में आयोजित मजलिसों में सोमवार को शिया आलिमों ने हजरत अली अकबर की शहादत बयां की। कहा कि यह तारीख इमाम हुसैन के बेटे हजरत अली अकबर की शहादत याद दिलाती है। इसी क्रम में मेरठ शहर के इमामबारगाह तकी हुसैन बाजार पेड़ामल से जुलूसे जुलजुनाह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में अकीदत के साथ बरामद हुआ। इसमें मातमी दस्तों के सोगवारों ने शोहदाए करबला की याद में मातम किया। आगे तस्वीरों में  देखें सोगवारों ने कैसे मनाया इमाम का गम:-
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जैदी फार्म से अलम-ए-मुबारक बरामद 

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मोहर्रम का जुलूस निकालते शिया सोगवार - फोटो : अमर उजाला
जुलूस के प्रारंभ में अंजुमन इमामिया के वाजिद अली गप्पू, मीसम,रविश ने पुरसोज नौहेख्वानी की। जुलूस बुढ़ाना गेट से होता हुआ खैरनगर बाजार पहुंचा तो यहां अंजुमन दस्ताए हुसैनी के हुमायूं अब्बास ताबिश, इरफान हुसैन ने नौहेख्वानी की। जुलूस निर्धारित मार्गोँ से होता हुआ देर रात इमामबारगाह पेड़ामल जाकर संपन्न हुआ। आयोजक अन्सार हुसैन रिजवी एवं सज्जाद रिजवी रहे। जुलूस की व्यवस्था मुहर्रम कमेटी के संयोजक शाह अब्बास सफवी, हाजी शमशाद अली, हामिद अली जमाल, नियाज हुसैन गुडडू, हसन मौहम्मद, कौसर रजा, हैदर अब्बास, अली हैदर रिजवी ने संभाली। दरबारे हुसैनी जैदी फार्म में बाराबंकी से आये मौलाना अली रिजवान की तकरीर के बाद दिलशाद हुसैन, दिलबर जैदी के संयोजन में अलम-ए-मुबारक हजरत अब्बास का जुलूस बरामद हुआ। इस मौके पर नौहेख्वान खुर्शीद असरी ने दर्द भरे नौहे पढ़कर माहौल को गमगीन कर दिया। जुलूस में शहजाद जैदी, अकबर अली, हैदर अली ताजपुरी, रफीक हुसैन, फाजिल हुसैन, बाकर जैदी आदि रहे। वहीं शास्त्रीनगर स्थित बाकर नकवी के अजाखाने में मजलिस को अली हैदर रिजवी ने खिताब किया। इसके बाद रजा मंजिल की ऊपरी मंजिल पर अलम-ए-हजरत अब्बास बड़ी अकीदत के साथ स्थापित किया। इस दौरान अरफात हैदर, तारिक अब्बास, गाजी हैदर, अब्बास हैदर, नौशाद अली, हैदर अब्बास आदि ने मातमपुर्सी की। मुहर्रम कमेटी के मुताबिक मंगलवार को जुलूसे जुलजुनाह छत्ता अली रजा वैलीबाजार से शाम छह बजे और जैदी फार्म रामबाग कालोनी में सैयद बाकर जैदी के अजाखाने से दोपहर दो बजे जुलूसे अलम बरामद होगा।  
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बयां की हजरत कासिम की शहादत 

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सहारनपुर न्यूज - फोटो : अमर उजाला
अब्दुलापुर में मुहर्रम की छह तारीख में पहली मजलिस ए हाजरी अजाखाना रंगमहल में हुई। इसमें मौलाना हामिद हुसैन ने मजलिस में हजरत कासिम की शाहदत बयां की। दूसरी मजलिस इमामबाडा असगर हुसैन और तीसरी मजलिस इमामबाडा कोट मे सैयद हुसनैन की जानिब से हुई। मौलाना गुलाम असकरी खां ने मजलिस को खिताब किया। रात में ताशो का गश्त हुआ। एक मजलिस आजाखाना पक्की बैठक दूसरी मजलिस अजाखाना जफर अहमद मरहूम के यहां हुई। रात 11 बजे जुलुस ए जुलजनाह व ताबूत हजरत कासिम कोठी हसन इमाम मरहूम से बरामद हुआ। जिसमें शबाब मेहंदी, रोशन अब्बास, पीरू, गय्यूर, मीसम नकवी ने नौहे पढे़। नायब अली ने बताया कि मंगलवार को ऐतिहासिक कदीमी जुलुस ए जुलजनाह इमाम बारगाह कोट से बरामद होगा।

शिया सोगवारों ने मातमी जुलूस निकाला

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मीरापुर में जंजीरों से मातम मनाते शिया सोगवार - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर के जानसठ में शिया सोगवारों ने मोहर्रम की छठी तारीख पर इमामबाड़ा में मजलिस कर नगर के मुख्य मार्गों से अलम, जुलजनाह और राष्ट्रीय ध्वज के साथ मातमी जुलूस निकालकर हजरत इमाम हुसैन को याद किया गया। कस्बे के मोहल्ला चौक में स्थित इमामबाड़ा महमूद हसन में मजलिस आयोजित की गई। जिसमें मौलाना समर हैदर चांदपुरी ने कहा कि हमें इमाम हुसैन के किरदार पर अमल करते हुए इसे अपनी असल जिंदगी में भी उतारना चाहिए। शिया सोगवारों ने मजलिस के बाद अलम, जुलजनाह और राष्ट्रीय ध्वज के साथ कस्बे के मुख्य मार्गों से मातमी जुलूस निकालकर हजरत इमाम हुसैन को याद किया। मातमी जुलूस में अब्बास अली खां, हसन अली खां, दानिश अली खां, हिलाल मेहंदी, फिरोज जैदी, अनवर राजा, समीर अली खां, असगर अब्बास आदि रहे। मीरापुर में  दोपहर डेढ बजे से मोहर्रम का जुलूस कैथोड़ा से निकाला गया और शाम सात बजे खत्म हुआ। जिसमें जंजीरों से मातम कर इमाम का गम मनाया गया। मातम करने वालों में अली नवाज जेगम और अली बुनियाद अली के साथ साथ कई सोगवारों ने मातम मनाया।  
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करबला के शहीदों को किया याद

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मोहर्रम के जुलूस के दौरान सोगवार - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर व नजीबाबाद में मोहर्रम की छठी तारीख पर जटपुराबौंडा, जोगीरम्पुरी और मेमन भनेड़ा में मजलिस और नोहाख्वानी के मातमी आयोजन किए गए। जुलूस भी बरामद किए गए। मंडावली थाना क्षेत्र के गांव जटपुराबौंडा में शमीम अली के आवास पर मातमी मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना गजनफर अब्बास जैदी ने कहा कि करबला के शहीदों ने अपनी बेशकीमती कुर्बानी देकर क्रूर बादशाह यजीद के घमंड को तोड़ा। मातमी मजलिस के बाद जुलूस बरामद किया गया। इमामबाड़े पर जाकर जुलूस समाप्त हुआ। उधर जोगीरम्पुरी में शिया समाज की ओर से फिरोज इरानी के मकान पर मातमी मजलिस आयोजित की गई। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना आबिद मेहदी ने कहा कि करबला की जंग हमें दीन और इंसानियत के लिए दी गई कुर्बानियों की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने इस्लाम और इंसानियत को बचाने के लिए जो कुर्बानियां दीं वो हमारे लिए हमेशा-हमेशा सबक बनीं रहेंगी। मजलिस के बाद नोहा और मर्सिया ख्वानी के साथ जुलूस बरामद किए गए। मोहर्रम अली, फिरोज इरानी, शेलअली के नेतृत्व में मर्सिया ख्वानी और वाजिद रजा, फिरोज हैदर, साजिद रजा, शोबी, अर्शी ने नोहाख्वानी में भाग लिया। उधर मेमन भनेड़ा में भी मातमी मजलिसों और जुलूस बरामद करने का सिलसिला जारी है। 
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छुरियों और कमाह से किया मातम

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मोहर्रम का जुलूस निकालते शिया सोगवार - फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बेटे हजरत अली अकबर अलैहिस्सलाम की याद में मोहर्रम का मातमी जुलूस निकाला गया, जिसमें सोगवारों ने मातम किया। सोमवार को मोहल्ला अंसारियान स्थित हज्जन तुल्ली की इमाम बारगाह से अकीदत मंदों ने जुलजुनाह बरामद कर छोटी इमाम बारगाह अंसारियान तक जाने के बाद जुलूस में बड़ा अलम निकाला। अकीदतमंदों ने जंजीरों में बंधी छुरियों, कमाह से मातम किया। हजरत अली अकबर अलैहिस्सलाम का गम उनके दिलो दिमाग पर छाया हुआ था। उनके शरीर से खून रिस रहा था। गमजदा लोग काले कपड़े पहने हुए थे और नंगे पैर गरेबान चाक व मातम करते हुए चल रहे थे। अकीदत मंद या हुसैन, या अली, या अब्बास, हाय सकीना हाय प्यास की आवाजें बुलंद कर रहे थे। जुलूस छोटी इमाम बारगाह से शुरू होकर मोहल्ला मुत्रीबान, नखासा बाजार, खानीबाग, फारूख की मस्जिद, सराफा बाजार, पुराना बजाजा हलवाई हट्टा, बाजार दीनानाथ, बड़तला यादगार, भगत सिंह चौक, मोरगंज बाजार होते हुए पुल दाल मंडी, मटिया महल, आर्य कन्या इंटर कालेज होते हुए जाफर नवाज स्थित बड़ा इमाम बारगाह पहुंचा। 
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जुलूस निकालकर मनाया सोग

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मातम मनाते शिया सोगवार - फोटो : अमर उजाला
यहां कुछ समय रुकने के बाद जुलूस वापस चला, जो पुल सब्जी मंडी, जामा मस्जिद कला, नया बाजार, गौरी शंकर बाजार, चूड़ी बाजार, मोहल्ला संगियान, अंसारियान से होता हुआ छोटी इमाम बारगाह पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में सबसे आगे ऊंट, घोड़े, बैल गाडियों पर काले कपड़े पहनकर बैठे छोटे-छोटे नाराये रिसालत या रसूउल्ला, अल्लाहो अकबर के नारे लगाते हुए चल रहे थे। उनके पीछे शबीह अलम हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम को लेकर अली रजा चल रहे थे। अलम के पीछे अंजुमने अकबरिया व अंजुमने इमामिया चल रही थी। नोहा पढ़ने वालों में मिर्जा अयाज, मिर्जा मेहरबान, ख्वाजा आसिफ रजा, शहबाज काजमी, शुजा काजमी, मिर्जा नईम, मिर्जा मुम्ताज, अली मेहंदी शामिल थे। अंजुमन इमामिया का के संचालक मिर्जा मेहरबान, लियाकत हुसैन अनवार जैदी रहे। सलीम हैदर काजमी, अनवर अब्बास जैदी, रहबर जैदी, सन्नी आब्दी, मानू आब्दी, अदनान, गयाज जैदी, शबीह, नवाजिश रजा, अख्तर अली, कमर काजमी, इकबाल, शादाब आब्दी, तुन्नू हसन, खुवाजा हसन मोहम्मद, खुवाजा अब्बास कुमैल, कैसर अब्बास, मुनीर अब्बास, एडवोकेट मंजर हुसैन काजमी, इंतजार मेंहदी, काजी अकरम, प्यारे मियां, सकलैन रजा, फरहत हुसैन, साजिद काजमी, जैगम अब्बास, जिया अब्बास, रियाज हैदर, मिर्जा अहसान, अजहर काजमी आदि मौजूद रहे।  


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