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एक पल में उजड़ गईं सात परिवारों की खुशियां, भावुक कर देंगी ये तस्वीरें

Thu, 13 Sep 2018 08:08 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
यूपी के बिजनौर शहर में मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री में पल भर में ही सात लोगों के परिवारों की खुशियां उजड़ गईं। मृतकों में कई ऐसे थे जिनके सहारे घर का खर्चा चल रहा था। लोगों में इस घटना को लेकर गम और गुस्से का इजहार रहा। लोग इस घटना को लेकर हंगामा करते रहे, मृतकों के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल रहा।
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बिजनौर विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
फैक्ट्री में मरे बाल गोविंद की चार पुत्री और एक छह साल का बेटा है। दो पुत्रियों की शादी हो चुकी है। सारी जिम्मेदारी बाल गोविंद पर थी और मजदूरी से घर का खर्चा चला रहा था, जिसे संभालने वाला अब कोई नहीं है।
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बिजनौर विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
कमलवीर की पहली पत्नी से एक पुत्री और दूसरी पत्नी से दो बच्चे हैं। कमलवीर के पिता नेत्रहीन हैं और उसकी कमाई से ही घर चल रहा था। उसकी मौत से सब कुछ उजड़ गया। चार बच्चों के बाप अभयराम के पास भी फैक्ट्री में नौकरी करने के बजाए आमदनी का कोई और जरिया नहीं था। अभयराम की मौत से उसका परिवार टूट गया है।

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बिजनौर विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
दो बच्चों का पिता लोकेंद्र फैक्ट्री में नौकरी करके अपने परिवार को पाल रहा था और रेलवे में नौकरी के लिए कोचिंग भी ले रहा था। लोकेंद्र की मौत से पूरा परिवार उजड़ गया है। विक्रांत की मौत से भी परिजनों में कोहराम मचा है। गांव वालों ने बताया कि विक्रांत ने मंगलवार रात को ही पत्नी रूबी से सुबह पांच बजे खाना बनाने को कहा था।
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बिजनौर विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
उसने रूबी को बताया था कि बुधवार को फैक्ट्री में ज्यादा काम है और उसे जल्दी बुलाया गया है। विक्रांत अपने पीछे पत्नी रूबी, दो लड़की राधिका, खुशी व पुत्र निकुंज को बिलखता छोड़ गया।
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बिजनौर विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
शरीर पर गंभीर चोट के निशान
हादसे में मरे सभी सात लोगों के शरीर पर चोट के गंभीर निशान थे। बॉयलर फटने से लगी चोट के अलावा वे काफी ऊंचाई से भी गिरे थे। गंभीर चोट लगने से उनकी जान गई। टैंक में फंसे हुए अभयराम के शव को निकालने के लिए पुलिस प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ी। टैंक को काटकर शव निकाला गया।
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बिजनौर विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
मना करने के बाद भी चला दी गई फैक्ट्री
15 साल पुरानी मोहित केमिकल्स फैक्ट्री ढाई माह से बंद पड़ी थी। फैक्ट्री को इंजीनियरों ने चलाने से मना किया था। लेकिन इसके बाद भी मालिक ने फैक्ट्री को चलवा दिया। ग्रामीणों की मानें तो जिस टैंक में मिथेन गैस भरी थी उसकी मियाद भी पूरी हो चुकी थी। फिर भी टैंक की मरम्मत कराकर फैक्ट्री स्वामी उसे चलाने में जुटे थे।

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बिजनौर विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
इसके बराबर में इसी ग्रुप की देव रबड़ फैक्ट्री और पीछे देव पेट्रो केमिकल्स हैं। अचानक ही तीन दिन पहले फैक्ट्री को चालू कर दिया गया। फैक्ट्री से जुड़े एक ठेकेदार के मुताबिक 15 साल पुरानी फैक्ट्री को ढाई माह पहले क्यों बंद किया गया और अचानक क्यों चलाया गया? यह किसी को मालूम नहीं।

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बिजनौर विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
एक घंटे तक घटना को छिपाए रहे 
घटना को फैक्ट्री के मालिक और अफसर करीब एक घंटे तक छिपाए रहे। घायल और मृतकों को अस्पताल तुरंत भिजवा दिया गया। गांव वालों के मुताबिक घटना के बाद उत्तेजित कुछ श्रमिक फैक्ट्री स्वामी और अफसरों के पीछे दौड़े तो वे वहां से भाग निकले। इसके बाद वे लौटकर फैक्ट्री में नहीं आए। सभी उनका इंतजार करते रहे, पर कोई फैक्ट्री में दिखाई नहीं दिया।

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बिजनौर विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
डीएम को सौंपे 12-12 लाख रुपये के चेक
जिला प्रशासन और फैक्ट्री मालिक के साथ जनप्रतिनिधियों, किसान नेताओं की मौजूदगी में सभी मृतक मजदूरों के परिजनों की डीएम आवास पर बैठक हुई। जिसमें मृतकों के परिजनों के नाम 12-12 लाख रुपये के चेक फैक्ट्री स्वामी की ओर से देने पर सहमति बनी। चेक डीएम के पास आ गए हैं। गुरुवार को चेक परिजनों को सौंप दिए जाएंगे। साथ ही मजदूरों के बच्चे भी फैक्ट्री मालिक के स्कूल में इंटरमीडिएट तक निशुल्क पढ़ेंगे। बैठक में फैक्ट्री मालिक की ओर से उसके भाई को बुलाया गया। डीएम अटल कुमार राय ने इसकी पुष्टि की है। बैठक में एसपी उमेश कुमार सिंह, एसपी सिटी दिनेश सिंह, भाजपा सांसद भारतेंद्र सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र चौधरी, रालोद नेता राहुल चौधरी, अशोक चौधरी, आजाद किसान यूनियन जिलाध्यक्ष विरेंद्र सिंह, एमपी सिंह आदि मौजूद रहे।

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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
एक साल में होती थी जांच
मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री सभी नियमों को ताक पर रखकर चल रही थी। नियमानुसार एक माह में फैक्ट्री की जांच होनी चाहिए। पर एक साल के अंदर कानपुर से बॉयलर जांच करने आता था। किसी को कोई लेना देना नहीं था कि फैक्ट्री में क्या हो रहा है। डीएम अटल कुमार राय के मुताबिक एक माह के भीतर फैक्ट्री की जांच का नियम है। देखा जाना चाहिए कि फैक्ट्री की सारी मशीन व टैंक वगैरह सब सही है या नहीं। उन्हें फैक्ट्री से जुड़े अफसरों ने बताया कि एक साल में एक बार होती थी। बॉयलर इंस्पेक्टर कानपुर से जांच करने के लिए आता था। इसके अलावा कोई और जांच नहीं होती थी।
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बिजनौर विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
बुझ गया इकलौता चिराग
हादसे में मरा गजरौलाशिव निवासी रवि अपने मां बाप की अकेली संतान था। रवि के मरने से घर का चिराग बुझ गया। दो साल पहले शादी हुई थी। प्रधान शशांक राजपूत के मुताबिक रवि फैक्ट्री में नौकरी करके घर का खर्चा चला रहा था। रवि के मरने से परिजनों  में कोहराम मचा है।

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