बागपत के मंदिर में जलाभिषेक करते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
वहीं बागपत जिले में भी श्रद्धालुओं ने मंदिर में जाकर भगवान शिव की आराधना की है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।
श्रावण में शिव पूजा का महत्व
हिंदू ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने कंठ में धारण किया। उस समय श्रावण मास था। विष के कारण भगवान शिव के तन का ताप बढ़ गया। सभी देवी-देवताओं और शिव भक्तों ने उनको शीतलता प्रदान की। मेघराज इंद्र ने वर्षा की। ऐसे में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए श्रावण में जलाभिषेक किया जाता है। महाशिवरात्रि के बाद यह दूसरा अवसर होता है जब भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है।
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