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सावन 2020: कोरोना का प्रभाव, एतिहासिक औघड़नाथ सहित शहर के प्रमुख मंदिर रहे बंद, शिव भक्तों ने ऐसे की पूजा-अर्चना, देखें तस्वीरें

Mon, 06 Jul 2020 02:54 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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श्रद्धालुओं ने औघड़नाथ मंदिर के बाहर से ही पूजा अर्चना की - फोटो : अमर उजाला
आज से श्रावण (सावन) मास शुरू गया है। इस बार कोरोना वायरस के चलते मेरठ शहर के प्रमुख मंदिरों को खोलने की अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में श्रद्धालुओं ने घर में रहकर ही भगवान शिव भोले की आराधना की। वहीं कुछ श्रद्धालुओं ने एतिहासिक औघड़नाथ मंदिर के बाहर से ही भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। खास बात यह है कि सावन के पहले सोमवार को शहर के कई इलाकों में बारिश हुई। इससे लोगों को गर्मी व उमस से राहत मिली है। आइए आपको आगे पश्चिमी यूपी के मंदिरों की तस्वीरें दिखाते हैं-

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औघड़नाथ मंदिर के बार पूजा अर्चना करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि औघड़नाथ मंदिर मेरठ शहर के लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां स्वयंभू शिवलिंग है। यहां राधा-कृष्ण और मां शेरावाली का मंदिर है। शिव मंदिर के पीछे शहीद स्मारक है जिस पर शहीदों के नाम लिखे हैं। 1857 की क्रांति की शुरुआत यहीं से हुई थी। यहां श्रावण के दौरान लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से मंदिर को बंद रखा गया है। इस बार एतिहासिक औघड़नाथ मंदिर पर न तो शिव भक्तों की लंबी कतार दिखी और न ही बम-बम बोले की गूंज सुनाई दी। शिव भक्तों ने घर में रहकर ही भगवान शिव भोले से कोरोना के सर्वनाश के लिए प्रार्थना की।
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श्रद्धालुओं ने औघड़नाथ मंदिर के बाहर खड़े होकर ही पूजा अर्चना की - फोटो : अमर उजाला
इस बार श्रावण मास में पांच सोमवार होंगे। श्रावण में त्रिलोकीनाथ भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। महादेव बहुत जल्द प्रसन्न होकर इच्छा पूर्ण करते हैं। हिंदू कलेंडर के 12 मास में श्रावण सर्वाधिक अहम है। चारों तरफ हरियाली छाई रहती है। बारिश के इस मौसम में धर्मगुरु वेदपाठ और धर्मग्रंथों का अध्ययन करते हैं।

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प्राचीन भोले शंकर महादेव जी मंदिर शिव चौक बागपत गेट मैं जल चढ़ाते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
कोरोना महामारी के चलते इस बार श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना के लिए श्रद्धालुओं को मंदिर जाने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे में उन्हें घर पर रहकर ही भगवान शिव का स्मरण करना होगा। हालांकि शहर के बाहरी क्षेत्र के मंदिर दर्शन के लिए खोले गए। यहां लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पूजा अर्चना की। शिव चौक बागपत गेट स्थित प्राचीन भोले शंकर महादेव जी मंदिर में जल चढ़ाते श्रद्धालु।
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शहर में हार्दिक कॉलेज के निकट शिव चौक पर बंद पड़ा मंदिर - फोटो : अमर उजाला
सावन के पहले सोमवार को मेरठ शहर में हार्दिक कॉलेज के निकट शिव चौक पर मंदिर बंद रहा। हालांकि इस दौरान श्रद्धालुओं ने छोटे मंदिर में पूजा अर्चना की।
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सावन के पहले सोमवार को सदर शिव चौक पर पूजा करते लोग - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में सदर शिव चौक पर पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु। इस दौरान श्रद्धालुओं ने सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन किया।
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शामली में सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
उधर, शामली जमपद में सोमवार को कुछ मंदिर खोले गए। इस दौरान सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं ने मंदिर जाकर जलाभिषेक किया।
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बागपत के मंदिर में जलाभिषेक करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
वहीं बागपत जिले में भी श्रद्धालुओं ने मंदिर में जाकर भगवान शिव की आराधना की है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। 

श्रावण में शिव पूजा का महत्व
हिंदू ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने कंठ में धारण किया। उस समय श्रावण मास था। विष के कारण भगवान शिव के तन का ताप बढ़ गया। सभी देवी-देवताओं और शिव भक्तों ने उनको शीतलता प्रदान की। मेघराज इंद्र ने वर्षा की। ऐसे में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए श्रावण में जलाभिषेक किया जाता है। महाशिवरात्रि के बाद यह दूसरा अवसर होता है जब भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है।

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