देवबंद में धरने पर जुटीं रहीं महिलाएं
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उधर, गुरुवार को अपनी 43 दिन की बच्ची को खो देने के बाद शुक्रवार को नौशाबा फिर से ईदगाह मैदान में सीएए के खिलाफ चल रहे आंदोलन में पहुंच गई। इस दौरान नौशाबा की आंखों से आंसू बह रहे थे।
उसने रोते हुए कहा कि उसकी बेटी को तो अल्लाह ने वापस ले लिया, लेकिन जब देशभर में महिलाएं अपने बच्चों के भविष्य के लिए सड़कों पर आकर आंदोलन कर रही हैं। ऐसे हालात में क्या वह घर में बैठकर मातम मना सकती है। नौशाबा के जज्बात सुनकर ईदगाह मैदान में बैठीं हजारों महिलाओं की आंखें भी नम हो गईं। महिलाओं ने उसे गले से लगा लिया।