फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर चेहरे पर था मौत का खौफ, मातम और गम, हर आंख हुई नम, रुला देगी ये सच्चाई 

Sun, 10 Feb 2019 05:49 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
विज्ञापन
1 of 14
जहरीली शराब केस
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में दूसरे दिन भी चीख पुकार मचती रही। जहरीली शराब से प्रभावित सहारनपुर के 34 लोगों को शुक्रवार और शनिवार मेडिकल इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। शनिवार देर रात तक इनमें से 24 लोगों की मौत हो चुकी है। अन्य प्रभावित लोगों का उपचार करने में चिकित्सक जुटे रहे। पीड़ित परिवारों में कोहराम मचा रहा। जिसकी भी चौखट पर मृतक का शव पहुंचता उसकी के घर में चीख पुकार मच जाती। हर किसी के चेहरे पर मौत का खौफ था हर आंख में आंसू थे। आगे देखें इस त्रासदी की सच्चाई को बयां करती ये तस्वीरें: - 


 
विज्ञापन

2 of 14
जहरीली शराब केस
जहरीली शराब के शिकार सहारनपुर के लोगों का शुक्रवार देर शाम से मेडिकल इमरजेंसी में लाना शुरू हुआ था। रात तक ऐसे 26 लोग इमरजेंसी में भर्ती कराए गए थे, जबकि आठ लोगों को हालत गंभीर होने पर शनिवार को सहारनपुर से मेरठ रेफर किया गया। इस दौरान अस्पताल परिसर में अफरातफरी की स्थिति रही। डॉक्टरों द्वारा जिस व्यक्ति की मौत की पुष्टि की जाती तो इमरजेंसी के बाहर मौजूद परिजनों में कोहराम मच जाता। तीमारदारों में पुलिस-प्रशासन के खिलाफ भी आक्रोश था। आरोप कि इलाज की व्यवस्था मेरठ में ठीक से नहीं कराई गई।

 
विज्ञापन

3 of 14
जहरीली शराब केस
वहीं, व्यवस्था की कलई खुली तो पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी भी मेडिकल में पहुंच गए। पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए कई नेता भी पहुंचे। ‘अमर उजाला’ ने इस पहलू को प्रमुखता से प्रकाशित किया था कि शुक्रवार को मेडिकल में सहारनपुर के लोग मरते रहे। लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन से कोई भी अधिकारी वहां नहीं पहुंचा। 

नतीजा यह हुआ कि शनिवार सुबह होते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मेडिकल कॉलेज में पहुंचे। डीएम अनिल ढींगरा ने इसे गंभीरता से लेते हुए इलाज की व्यवस्थाएं देखीं और तीमारदारों को ढांढस भी बंधाया। डॉक्टरों से बातचीत कर प्रभावित लोगों की हालत के बारे में जानकारी ली। पुलिस भी एक्टिव रही। पोस्टमार्टम कराने व शवों को उनके घरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पुलिस ने बखूबी निभाई। वहीं, कई नेताओं ने मेडिकल अस्पताल पहुंचकर हाल जाना। 

4 of 14
जहरीली शराब केस
इससे पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट शैलेंद्र कुमार और सीओ सिविल लाइन अखिलेश भदौरिया ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को शुरू कराया। इस बीच एडीएम सिटी मुकेश चंद्र और एसपी सिटी रणविजय सिंह भी वहां पहुंच गए। डीएम के आने की सूचना पर व्यवस्थाएं बदलने लगीं। इस दौरान सीएमओ डॉ. राजकुमार, मेडिकल के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. एसके गर्ग, डॉ. सुभाष सिंह, डॉ. दिनेश राणा, ईएमओ डॉ. हर्षवर्धन, डॉ. आरती टंडन मौजूद रहे। 

 
विज्ञापन

5 of 14
जहरीली शराब केस
मेडिकल इमरजेंसी में आते और बेड पर तोड़ देते दम  
सहारनपुर शराब कांड के प्रभावित अधिकांश लोग मेडिकल इमरजेंसी में पैदल ही पहुंचे और बेड पर जाते ही दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे मामलों में जहरीला अल्कोहल खून के साथ मिलकर नसों में तेजी से दौड़ता है। इससे सांस लेने में दिक्कत आ जाती है। शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर  देते हैं।

करीब एक दर्जन लोगों की मौत ऐसे ही हुई। वहीं, तीमारदार आरोप लगा रहे हैं कि इलाज ठीक से नहीं हो रहा है। उसके चलते लोगों की मौत हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि जहरीली शराब का असर कहीं 24 घंटे के अंदर तो कहीं बाद में ज्यादा होता है। उसका शुरूआत में मरीज को अहसास भी नहीं होता।    
विज्ञापन

6 of 14
जहरीली शराब केस
चेक कर लो, जवाब आता है मौत हो गई  
शराब पीने से हालत बिगड़ने पर सहारनपुर से 37 लोगों को मेडिकल इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। शुक्रवार देर रात तो यह हालत हो गई थी कि थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल में लोगों की मौत हो रही थी। डॉक्टर मुआयना करते और बोलते कि मरीज की मौत हो गई। यह सुनते ही परिजनों में कोहराम मच जाता। उनको यकीन तक नहीं हुआ कि आखिर ऐसे कैसे हो गया है। उनका मरीज तो अभी ठीकठाक बोल रहा था। 
विज्ञापन

7 of 14
जहरीली शराब केस
प्रार्थना यही कि मनहूस खबर न आए
अपनों की मौत के खौफ में परिजन सहमे नजर आए। कोई मेडिकल इमरजेंसी के अंदर तो कोई बाहर प्रार्थना कर रहा था कि कोई मनहूस खबर न आए। लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। डॉक्टर ने मौत की खबर दी तो परिजनों ने आरोप लगाए। लेकिन डॉक्टर बोले कि जहर शरीर में इस कदर घुल चुका था कि बचाना नामुमकिन था।

8 of 14
जहरीली शराब केस
मैंने कानपुर में देखा था 
मरीजों का हाल जानने पहुंचे डीआईजी अखिलेश कुमार ने बताया कि ऐसा मंजर उन्होेंने कानपुर में भी देखता था। जहरीली शराब ने सात लोगों की जान ले ली थी। लोग ठीकठाक अस्पताल में आते थे और इलाज के दौरान उनकी मौत हो जाती थी। हालत यह थी कि जिन लोगों ने इस शराब का थोड़ा सा भी सेवन किया, उन्हें चेकअप के लिए बुलाया गया। दो लोग तो चेकअप के दौरान ही दम तोड़ गए थे। 

9 of 14
जहरीली शराब केस
हर चेहरे पर खौफ, टकटकी लगाए रहे लोग 
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में शनिवार देर रात तक सहारनपुर से मरीजों के आने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान उनके तीमारदार भी मौजूद रहे। बढ़ती भीड़ को देखकर चिकित्सकों ने इमरजेंसी में तीमारदारों की एंट्री पर रोक लगाई तो वह बाहर ही बैठ गये। अपने मरीज का हाल जानने के लिए उनकी सांसें थमी रहीं और वह टकटकी लगाकर दूर से ही उन्हें देखते रहे। हर कोई बीती रात के परिणामों से भयभीत दिखाई दिया। मरीज का हाल जानने की उत्सुकता उनके भीतर साफ दिख रही थी। 

10 of 14
जहरीली शराब
अन्य मरीजों को भेजा आगे
मेडिकल कॉलेज में सहारनपुर के मरीजों का दबाव बढ़ता देख चिकित्सकों ने अन्य मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया। शामली से आए शहजाद ने बताया कि उनके मरीज को मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, लेकिन बेड कम होने की बात कहकर उन्हें गाजियाबाद रेफर कर दिया गया।
 

11 of 14
जहरीली शराब केस
वरिष्ठ चिकित्सकों की खली कमी
मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठ चिकित्सकों की कमी भी शनिवार को काफी खली। इमरजेंसी की पूरी व्यवस्था जूनियर डाक्टर संभाले हुए थे। ऐसे में मरीज के तीमारदारों के गुस्से का भी इन डाक्टरों ने बेहद शांतिपूर्ण ढंग से सामना किया। हर 10 मिनट के बाद कोई न कोई तीमारदार इन डाक्टरों को अनेक सवालों के साथ घेरे हुए था। बमुश्किल उन्होंने इन तीमारदारों को समझाते हुए उपचार आगे बढ़ाया।

कई बार हंगामे की स्थिति बनी, जिसे इन जूनियर डाक्टरों ने बखूबी शांत कराया। उधर, जिस इमरजेंसी में सहारनपुर शराब कांड के पीड़ित पहुंच रहे थे, उसी के एक हिस्से में स्वाइन फ्लू के भी कुछ मरीज भर्ती थे। लोगों ने मास्क मांगे, लेकिन नहीं मिले। बाद में प्रभारी प्राचार्य डॉ. एसके गर्ग, डॉ. सुभाष सिंह और डॉ. दिनेश राणा ने मास्क मंगाकर तीमारदारों को दिए।

12 of 14
जहरीली शराब केस
पोस्टमार्टम हाउस से लाशें उठतीं रहीं और परिजन बिलखते रहे। एक साथ 19 लोगों की लाश देखकर लोगों की रूह कांप उठीं। पीड़ित परिवारों का आक्रोश न फैल जाए, इसको देखते मेडिकल इमरजेंसी से पोस्टमार्टम हाउस तक पुलिस फोर्स तैनात किया गया। सहारनपुर के लोगों की मेडिकल कॉलेज में भीड़ लगी थी। शराब पीने से एक के बाद एक 19 लोगों की मौत हो गई।

इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर लोगों में गुस्सा था, जो मेरठ में फूट न जाए, इसे लेकर पुलिस भी अलर्ट थी। पुलिस फोर्स की मौजूदगी में शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। शवों के साथ पुलिस वालों को गाड़ी से भेजा गया, ताकि पीड़ित परिवार को लगे कि उनके साथ पुलिस तत्पर है। लोगों की आंखों में गम और गुस्सा था। डीआईजी अखिलेश कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए मेडिकल समेत आठ थानों की पुलिस लगाई थी। दरोगा पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया में लगे थे। पुलिस ने शवों को सहारनपुर भेजने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। 

13 of 14
जहरीली शराब केस
मेडिकल की मोर्चरी से शनिवार सुबह एक शव गायब होने पर खलबली मच गई। रिकाॅर्ड का मिलान किया गया तब पता चला कि जिस शव को तलाशा जा रहा है वह शराब कांड से जुड़ा नहीं था।
दरअसल, शनिवार सुबह पुलिस सहारनपुर शराब कांड में मृत 18 लोगों के शवों का मेमो लेकर पोस्टमार्टम हाऊस पहुंची।

शवों की गिनती की गई तो पता चला कि लिस्ट में शामिल सतीश नाम के युवक का शव वहां नहीं है। इससे वहां सनसनी फैल गई। मेडिकल कॉलेज से रिकाॅर्ड मंगाया गया, लेकिन शव नहीं मिला। सभी शवों के चेहरे खोलकर बारी-बारी से सभी शवों की शनाख्त की गई। बाद में पता चला कि जिस युवक के शव का शव गायब है, वह शराब कांड में मृत युवक का शव नहीं है। उसके परिजन पहले ही शव ले जा चुके थे। इसके बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। 
विज्ञापन

14 of 14
जहरीली शराब केस
देर रात और लोगों की हुई मौत
मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन शराब कांड के मरीजों में से दो और मरीजों की शनिवार देर रात मौत हो गई। मेडिकल प्रशासन ने बताया कि सहारनपुर जनपद के नीटा नंदपुरी निवासी कुशनपाल पुत्र शेरसिंह और डंघेडा निवासी सहनपाल पुत्र निदयराम को शनिवार रात 9 बजे यहां लाया गया था। भर्ती करने के करीब तीन घंटे बाद ही उनकी हालत बिगड़ी और दोनों ने दम तोड़ दिया। रात में ही दोनों के शव को मोर्चरी भिजवा दिया गया। इसके बाद रविवार को सुबह भी दो लोगों की मौत होने की खबर आई।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें