बचपन से ही मुसीबतों से नहीं हारने वाली रिया ने जिम्मेदारियां संभालते हुए लड़ना सीखा। बदमाशों से लड़ते वक्त किसी भी तरह का डर का भाव नहीं दिखा। वे कहती हैं कि उस वक्त एक सेकेंड का समय व्यर्थ करना भी मुझे कठिनाई की ओर ले जाता। वे सीधा बदमाशों से भिड़ गईं और दादी के कुंडल छीन कर ही दम लिया।
लालकुर्ती निवासी रिया अग्रवाल की बहादुरी की आज हर कोई तारीफ कर रहा है। मजबूत जज्बे ने उनको बदमाशों से भिड़ने की हिम्मत दी। बचपन से ही रिया का जीवन संघर्ष भरा रहा है। 21 वर्ष की आयु में रिया घर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। परिवार को संभालते हुए उन्होंने भविष्य तय कर लिया। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर पुलिस अफसर बनने की ठानी है। उनका सपना पुलिस अफसर बन बदमाशों को वर्दी में सबक सिखाने का है।