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मेरे शहीद भाई का चेहरा तो दिखा दो... बहन की हालत देख रो पड़े अफसर, देखें 21 तस्वीरें

Sun, 17 Feb 2019 02:11 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए प्रदीप का शव जैसे ही गांव पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। इस बीच शहीद की बहन और पत्नी बिलखती हुई शव के पास चली आईं। बहन ने बिलखते हुए कहा मेरे भाई का चेहरा तो दिखाओ दो...! आगे देखिए तस्वीरें:-
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
शनिवार सुबह साढ़े छह बजे का वक्त। बनत कस्बे में शहीद प्रदीप का शव जैसे ही उसके घर के पास एक चौपाल पर पहुंचा तो उसकी बहन और पत्नी बिलखती हुई चली आईं। बहन ने वहां मौजूद जवानों की तरफ देखकर कहा मेरे भाई का चेहरा तो दिखा दो, मगर वहां खड़े अफसर एक-दूसरे की तरफ देखने लगे।
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अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
वहीं उसने शव के पास रखा प्रदीप का फोटो उठाकर अपने कलेजे से लगा लिया। इसके बाद वो इस तरह बिलखकर रोई कि वहां खड़े अफसर और सीआरपीएफ के जवान भी अपने आंसू नहीं रोक सके।

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अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
शव के गांव में पहुंचने से पहले ही हजारों की संख्या में लोग शहीद प्रदीप को श्रद्धांजलि देने पहुंच चुके थे। डीएम अखिलेश सिंह, एसपी अजय कुमार भी यहां आ चुके थे। सुबह साढ़े छह बजे शव कस्बे में पहुंचा। साथ में आरएएफ और सीआरपीएफ के कमांडेंट आदि अफसर भी थे।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
शहीद के पार्थिव शरीर को घर के पास बनी चौपाल पर जनता दर्शन को रखा गया। सीआरपीएफ के प्रदीप की एक फोटो साथ लाए थे। उन्होंने ताबूत में बंद शव के पास फोटो रख दिया। फूल मालाएं लगाई जा चुकी थी।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
शव आने का पता चलते ही घर में मौजूद प्रदीप की बहन आरजू और पत्नी शर्मिष्ठा नंगे पैर ही चौपाल पर दौड़ी चली आईं। शव ताबूत में बंद था। आरजू ने कहा कि इसे खोलो। मुझे भाई को देखना है। मेरे भाई का चेहरा तो दिखा दो।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
वहीं आरजू की बात सुनकर वहां खड़े अफसर एक दूसरे की तरफ देखने लगे। ये देख शायद आरजू और प्रदीप की पत्नी शर्मिष्ठा भी समझ गई कि शायद नियम कायदों की वजह से ये संभव नहीं है। इसके बाद वो पास में रखी अपने शहीद भाई की फोटो को कलेजे से लगाकर बिलख पड़ी।

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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
बहन को बिलखता देख बढ़ गया जनाक्रोश 
एक बहन को अपने भाई के लिए बिलखता देख वहां खड़े हजारों लोगों में भी गम और गुस्सा बढ़ गया। उन्होंने आक्रोशित होकर पाकिस्तान मुर्दाबाद और जवानों की शहादत का बदला लो के नारे लगाने शुरू कर दिए। लोगों ने जब तक सूरज चांद रहेगा प्रदीप तेरा नाम रहेगा के खूब नारे लगाए। लोगों का कहना था कि अब बातचीत का नहीं बल्कि आरपार का वक्त है।

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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
बाद में बुलाकर दिखाया चेहरा 
अफसरों ने भी प्रदीप की बहन और पत्नी की भावनाओं की कद्र की। वे भी समझ गए कि ऐसे में एक बहन और पत्नी पर क्या बीतती है। प्रदीप के चचेरे भाई उमेश ने बताया कि बाद में अंत्येष्टि स्थल पर परिजनों के माध्यम से दोनों को बुलवाया गया और वहां प्रदीप का चेहरा उन्हें दिखाया।

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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
पिता को श्रद्धांजलि देकर बिलख पड़ा सिद्धार्थ 
जनता दर्शन के दौरान अपने अपने शहीद पिता को श्रद्धांजलि देने आए बडे़ पुत्र सिद्धार्थ ने जैसे ही पिता के शव पर पुष्पांजलि दी। तो वह बिलख बिलख कर रो पड़ा। लोगों से उसे संभाला। बाद में उसने अपने पिता के शव को मुखाग्नि दी।

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अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थ का कहना था कि पापा की शहादत का बदला लेना चाहिए। सरकार को बातचीत नहीं बल्कि इस बार पाकिस्तान से आरपार कर देना चाहिए।

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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
कई बार भावुक हुआ माहौल  
श्रद्धांजलि के दौरान परिवार के सदस्यों का हाल देख कई बार माहौल भावुक हुआ। शव के पास आते ही परिवार और रिश्तेदार बिलखते तो वहां सन्नाटा पसर जाता।

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अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
वहीं भावुक माहौल देख खुद एसपी अजय कुमार कई बार भावुक हुए। उन्होंने कुछ लोगों को तो गले लगाकर सांत्वना दी। परिजनों को समझाया कि ये सरकार शहादत का बदला जरूर लेगी।

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अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
वहीं शहीद प्रदीप की शवयात्रा में दो किमी लंबा सैलाब उमड़ा। चारों तरफ तिरंगे लहरा रहे थे। कस्बे की गलियों में पाकिस्तान मुर्दाबाद, शहादत का बदला लो, बदला लो के नारे गूंज रहे थे। घर की छतों से महिलाएं और बच्चे पुष्प वर्षा कर रहे थे। सबकी जुबां पर एक ही बात थी पाकिस्तान को सबक सिखाओ।

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अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
श्रद्धांजलि सभा के बाद करीब नौ बजे शहीद प्रदीप की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो हजारों की भीड़ से कस्बे की गलियां भर गई। शव के पीछे दो किमी लंबी लाइन थी। शव के साथ डीएम और एसपी चल रहे थे। सीआरपीएफ और आरएएफ आदि कई कंपनियों के कमांडेंट और सलामी गारद भी साथ थी।

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अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
कस्बे के अलावा आसपास के कई गांवों से सर्वसमाज के लोग पहुंचे। व्यापारी, उद्यमी, मजदूर, किसान सब इसमें शामिल थे। हर किसी में शहीद के अर्थी को कंधा देने की होड़ मची थी। मकान की छतों से महिलाएं और बच्चे पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि दे रहे थे। गांव की गलियों में पाकिस्तान मुर्दाबाद और शहीदों की शहादत का बदला लो के नारे गूंज रहे थे। गलियों से होते हुए शवयात्रा खेतों के बीच से गुजरे रास्तों से होती हुई शमशान घाट पहुंची।

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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
छोटा पड़ गया शमशान घाट  
काफी बड़ी जगह में बना श्मशान घाट भी हजारों के सैलाब के आगे छोटा पड़ गया। लोग उसकी दीवारों पर चढ़ गए. लेकिन इसके बाद भी हजारों लोग बाहर खेतों में रह गए। सैकड़ों युवक तो पेड़ों पर ही चढ़ गए। पुलिस प्रशासन के लोग भी लोगों को सचेत करते रहे।

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अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
मंत्री और अफसरों ने दिया कंधा 
अंतिम यात्रा में मंत्री और अफसरों ने भी शहीद प्रदीप को कंधा दिया। केंद्रीय मंत्री सतपाल सिंह, प्रदेश के गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा के अलावा डीएम अखिलेश, एसपी अजय कुमार के अलावा सीआरपीएफ ,आरपीएफ आदि कई बटालियनों के कमांडेंट और अन्य अधिकारियों ने भी प्रदीप के शव को कंधा दिया।

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अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
मुस्लिम बोले पाकिस्तान को सबक सिखा दो 
शहीद प्रदीप की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी शामिल हुए। सलमान ,हाशिम और अफजल आदि ने बताया कि प्रदीप अपने कस्बे का बेटा था। वो काफी मिलनसार मृदुभाषी था। यही वजह था कि मुस्लिम भी बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए। अकरम ने कहा कि पाकिस्तान से बदला लेने का वक्त आ गया है। उसने देश में आतंकवाद फैला रखा है। अफजल का कहना था कि इस तरह के हमले कायर करते हैं। आतंकियों को उन्हीं की भाषा में सबक सिखाना होगा तभी ये सब रुकेगा।

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shamli jawan
यकीन नहीं हो रहा प्रदीप चला गया 
प्रदीप की अंतिम यात्रा में शामिल उसके दोस्त अमित ने बताया कि अमित उसका सहपाठी रहा है। बेहद मिलनसार था। पिछले दिनों अपने  भाई की शादी में प्रदीप कस्बे में आया था। आठ फरवरी को वो शामली में मिला। उसके साथ उसका छोटा बेटा भी था। बेटे से उसने मेरा परिचय कराया। बताया कि ये उनके सहपाठी हैं। बेटा भी बहुत खुश हुआ। शुक्रवार की रात को जब प्रदीप की शाहदत की खबर आई तो उसे यकीन ही नहीं हुआ था। अब उसकी याद आती है तो आंखे भर आती हैं।
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shamli jawan
स्कूलों में छुट्टी, बाजार बंद 
शहीद प्रदीप की अंतिम यात्रा के चलते गांव के निजी स्कूलों में अवकाश कर दिया गया था। कस्बे की दुकानें भी पूरी तरह बंद रही। हर कोई शहीद के परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहा था।

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