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टोक्यो ओलंपिक से लौटी प्रियंका गोस्वामी: बोलीं- पेरिस में मेरठ को दिलाऊंगी सोने का तमगा 

Tue, 10 Aug 2021 12:52 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

 टोक्यो ओलंपिक से प्रियंका का आत्मविश्वास आसमान पर
 
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अमर उजाला कार्यालय में प्रियंका गोस्वामी - फोटो : Amar Ujala Meerut
टोक्यो ओलंपिक में पैदल चाल खिलाड़ी प्रियंका गोस्वामी ने दमदार खेल दिखाया। पदक भले ही न मिला हो, लेकिन दुनिया ने उनका लोहा माना। ओलंपियन प्रियंका गोस्वामी सोमवार को शहर पहुंची तो उनका जोरदार अभिनंदन किया गया। वह दिल्ली एयरपोर्ट से सीधे अमर उजाला कार्यालय पहुंची।

महाकुंभ से लौटी प्रियंका को भरोसा है कि वर्ल्ड कप, वर्ल्ड चैंपियनशिप और इसके बाद पेरिस ओलंपिक में वह स्वर्ण पदक जीतेंगी। स्वीकार किया कि ओलंपिक जैसी बड़ी स्पर्धा में मानसिक दबाव तो रहता ही है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला ने हमेशा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया, उनकी समस्याओं को उठाया। खिलाड़ियों को सम्मान मिलेगा तो वो देश को पदक दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। प्रियंका से बातचीत के अंश...
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अमर उजाला कार्यालय में प्रियंका गोस्वामी - फोटो : Amar Ujala Meerut
ओलंपिक में पदक नहीं मिला, टोक्यो का अनुभव कैसा रहा ?
पहले 13 किमी की दौड़ में वह पांच खिलाड़ियों में शामिल थीं। रेफरी की वार्निंग के बाद उनके खेल पर कहीं  न कहीं असर पड़ा। ओलंपिक से बहुत कुछ सीखने के लिए मिला, जो भविष्य में काम आएगा।

टोक्यो के मौसम का खेल पर क्या प्रभाव पड़ा ?
बंगलुरु से टोक्यो पहुंचे तो गर्म मौसम देखकर हैरानी हुई। क्योंकि ओलंपिक ड्रेस में ट्रैक सूट था। उन्हें लगा वहां ठंड के साथ अच्छा मौसम होगा, लेकिन वहां 31-32 डिग्री के तापमान के साथ उमस थी।
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अमर उजाला कार्यालय में प्रियंका गोस्वामी - फोटो : Amar Ujala Meerut
क्या ओलंपिक में मेजबान देश को परिस्थितियों का लाभ मिलता है?
स्थानीय खिलाड़ियों को हमेशा लाभ मिलता ही है। खिलाड़ियों को हर समस्या और हर परिस्थिति से निकलने के लिए खुद को तैयार रखना पड़ता है और उससे संतुष्ट भी होना पड़ता है।

ओलंपिक में मेरठ के खिलाड़ियों की संख्या बढ़ी है, इसे किस तरह देखती हैं?
मेरठ के पांच खिलाड़ी टोक्यो पहुंचे। यह बेहद अच्छा रहा। खुश किस्मत हूं कि इन खिलाड़ियाें में शामिल रहीं। यहां के खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं को बढ़ाया जाना चाहिए।

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प्रियंका गोस्वामी का स्वागत करते परिजन - फोटो : Amar Ujala Meerut
भविष्य की क्या तैयारियां हैं। कौन सी बड़ी प्रतियोगिताओं पर फोकस रहेगा। 
वर्ल्ड कप, वर्ल्ड चैंपियन में पदक जीतना है। टोक्यो में भले ही पदक नहीं मिला हो, लेकिन 2024 के पेरिस और यहां तक कि 2028 ओलंपिक पर भी नजर है। पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ना है। 

लंबे समय बाद मेरठ और परिवार के बीच पहुंची, कैसा लग रहा है?
करीब छह महीने बाद मेरठ लौटी हूं। परिवार से मिलने की खुशी में दो दिन से सोई नहीं। अभी 10-15 दिन परिवार, रिश्तेदारों के बीच रहना है। जिसके बाद बंगलुरु फिर से तैयारियों में जुटना है।
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प्रियंका गोस्वामी का स्वागत करते परिजन - फोटो : Amar Ujala Meerut
परिवार और कोच ने पहुंचाया टोक्यो तक 
प्रियंका गोस्वामी ने कहा कि उनके माता-पिता और परिवार ने हमेशा साथ दिया। इसके अलावा कोच गौरव त्यागी ने मार्गदर्शन किया। खिलाड़ियों को अपने कोच और परिवार को हमेशा याद रखना चाहिए, उनका सम्मान करना चाहिए। पिता मदनपाल गोस्वामी ने उनका हमेशा साथ दिया है।

सपने के सच होने जैसा है सफर
प्रियंका ने कहा कि ओलंपिक में जाने के लिए क्वालीफाई करने के बारे में कभी सोचा नहीं था। 2020 में ओलंपिक क्वालीफाई करने से चूक गई। उसके बाद लगा कि एक घंटा 28 मिनट के क्वालीफाई स्टेंडर्ड को ब्रेक करना मुश्किल है, लेकिन आत्मविश्वास का बढ़ाते हुए मानसिक तौर पर खुद को मजबूत किया। जिसके बाद 2021 में 13 फरवरी को 20 किमी पैदल चाल में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना और  ओलंपिक में शामिल होना एक सपने के सच होने जैसा है।
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