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बड़ी उपलब्धि: मेरठ के शीशराम ने जीता पीएम मोदी का दिल, दिलचस्प है सेना के टैंक ठीक करने से पद्मश्री तक का सफर, तस्वीरें

Thu, 24 Mar 2022 08:05 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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मेरठ के शीशराम द्वारा की गई कलाकृति - फोटो : amar ujala
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुश्कृताम धर्म संस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे। राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री से नवाजे जाते समय मेरठ के शीशराम ने यह श्लोक सुनाया तो प्रधानमंत्री मोदी ने भी अभिवादन किया। चालीस वर्ष तक सेना में सेवाएं दे चुके शीशराम यह बताते हुए भावुक हो जाते हैं। वह कहते हैं, हमेशा कर्म को पूजा और सेना के टैंक ठीक करते-करते हाथ में कूची संभाले रखी। दुनिया के कैनवास पर रास्ते खुलते चले गए। 

देशभक्ति और पेंटिंग के जुनून से भरे पद्मश्री शीशराम का मेरठ लौटने पर बुधवार को भी उनके चाहने वालों ने भव्य स्वागत किया। उनके घर मिलने वालों का तांता लगा है। सेना में सेवा के दौरान वह फौजी गाड़ियों के इंजन, टैंकों और अन्य हथियारों के चित्र बनाते थे। यही शौक जुनून बन गया और बड़े चित्रकार बन गए। सात हजार चमकीले पत्थरों से इंडिया गेट और अमर जवान ज्योति के सामने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ तीनों सेनाध्यक्षों को सलामी देते हुए बनाई गई उनकी कलाकृति देश भर में छा गई। यह कलाकृति अंधेरे में भी चमकती है। कारगिल युद्ध पर उनके बनाए चित्र भी बहुत पसंद किए गए।
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कलाकृति - फोटो : amar ujala
पिता मेरठ कॉलेज में थे कर्मचारी
शीशराम के पिता मेरठ कॉलेज में कर्मचारी थे। गढ़ रोड स्थित सीताभारती स्कूल से उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई की। सेवाराम ने आर्ट स्कूल और चमन स्कूल ऑफ आर्ट में कला की ट्रेनिंग भी ली। 
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कलाकृति - फोटो : amar ujala
2016 में गिनीज बुक में दर्ज हुआ नाम  
वर्ष 2016 में पद्मश्री शीशराम का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। वर्ष 2008 में ताज होटल पर आंतकियों से मुकाबला करते शहीद हुए जवानों को भी शीशराम ने चित्रों के माध्यम से सलाम किया। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर उनके ही अंगरक्षक द्वारा हमले को भी उन्होंने चित्रों में उकेरा है। 2001 में संसद पर हमले की भी उन्होंने पेंटिंग बनाई है।

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कलाकृति - फोटो : amar ujala
पीएम मोदी के दुबई दौरे की बनाई आकर्षक तस्वीर
दुबई में भी अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी से लगा चुके शीशराम ने पीएम मोदी के दुबई दौरे की भी आकर्षक तस्वीर बनाई थी। दुनिया भर में उनके चित्रों की 40 से अधिक प्रदर्शनी लग चुकी हैं।
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कलाकृति - फोटो : amar ujala
सेना से परिवार का गहरा नाता 
शीशराम वर्ष 2007 में सेना की कोर ऑफ ईएमई से अंबाला स्थित 65 इंजीनियर रेजीमेंट से सेवानिवृत्त हुए। वह सेना में टैंक ठीक करते थे। उनकी बेटी भी सेना के 510 बेस आर्मी वर्कशॉप में ड्राफ्ट्समैन और दामाद सतवीर सिंह सेना के सेवानिवृत्त हवलदार हैं। एक बेटा भी प्रिंटिंग का कार्य करता है, जबकि दूसरे बेटे की पांच वर्ष पूर्व एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। 
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कलाकृति - फोटो : amar ujala
37 वर्ष बाद दूसरे मेरठ को पद्मश्री 
वर्ष 1985 में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान पर डॉ. ऊषा शर्मा को पद्मश्री से नवाजा गया था। अब 37 वर्ष बाद मेरठ के शीशराम को पद्मश्री से नवाजा गया है।
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