'मैं ठीक-ठाक हूं। कारगिल में लड़ाई छिड़ गई है। मुझे पहाड़ों पर जाना पड़ रहा है। हम लोग वहां के लिए रवाना हो गए हैं। कोई भी दिल छोटा मत करना..., डरने की कोई बात नहीं है। मेरे साथ पूरी यूनिट है। दुश्मनों को मारकर मैं वापस आऊंगा।' शहीद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव की ये वो आखिरी चिट्ठी थी, जो उन्होंने कारगिल जाने से कुछ देर पहले लिखी थी। चिट्ठी घर पहुंचने के कुछ दिनों बाद ही ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव के शहीद होने का संदेश आ गया। 17 दुश्मनों को मारकर ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह टाइगर हिल पर शहीद हो गए। उनके इस अदम्य साहस और शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया। जानिए, उनसे जुड़ी ये खास बातें...