मेरठ में कला का सहारा लेकर अश्लील नाटकों का मंचन, महिलाओं की अर्द्धनग्न तस्वीरों का चित्रण करना एक मानसिक विकृति है। कला के नाम पर समाज में अश्लीलता फैलाने वाले ऐसे कलाकारों और आयोजकों पर बैन लगना चाहिए। उन पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। ऐसे लोग कम समय में खुद को मशहूर करने के लिए कला का गलत प्रयोग करते हैं। सेंट थॉमस स्कूल में कला के प्रचार प्रसार के नाम पर हुए अश्लील नाटक के मंचन पर छात्राओं ने विचार रखे। शुक्रवार को अमर उजाला की ओर से इस्माइल डिग्री कॉलेज में कैम्पस अड्डा हुआ। छात्राओं ने कहा ऐसे नाटकों का मंचन कला का उत्थान नहीं पतन है।
विज्ञापन
संस्कृति का गलत प्रयोग
2 of 9
पूनम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
हमारे देश की संस्कृति विश्व में सकारात्मकता के लिए मशहूर है, लेकिन कुछ लोग हमारी संस्कृति के खात्मे पर उतारू हैं। उन्हें लगता है कि कला का मतलब स्त्रियों का गलत चित्रण, अर्द्धनग्न मंचन है। जबकि हमारी संस्कृति और कला इसकी इजाजत नहीं देती। -पूनम
विज्ञापन
अश्लीलता परोसना अपराध
3 of 9
काजल का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
भारतीय समाज की मानसिकता इतनी विद्रूप नहीं कि कला के नाम पर अश्लीलता को स्वीकार करे। बी और सी ग्रेड फिल्में देखने वालों को आज भी हमारे समाज में गलत माना जाता है। सार्वजनिक मंचों पर अश्लीलता परोसना समाज में अपराध करने जैसा है। -काजल
चर्चा में रहने का शॉर्ट कट
4 of 9
अफीफा का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कला का सहारा लेकर कुछ लोग कम समय में चर्चित होना चाहते हैं। मशहूर होना है तो अपने हुनर से हों। चर्चा में रहने के लिए कला और अपनी संस्कृति से खिलवाड़ करना एकदम गलत है। ऐसे कलाकारों को सजा होनी चाहिए। -अफीफा
विज्ञापन
कलाकार, आयोजक सभी दोषी
5 of 9
पिंकी का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
अश्लीलता फैलाने के लिए कुछ लोग कला की आड़ ले रहे हैं। अश्लील नाटक, गीतों का मंचन करने वाले कलाकार ही नहीं बल्कि वे आयोजक और संयोजक भी दोषी है, जो ऐसी प्रस्तुतियों को बढ़ावा देते हैं। -पिंकी
विज्ञापन
समाज पर गलत असर
6 of 9
शिल्पा का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नाटक, चित्रों के माध्यम से इस तरह अश्लीलता फैलाना कला का नहीं बल्कि अश्लीलता का प्रचार लगता है। युवाओं पर इस तरह के नाटकों का गलत असर पड़ता है। ऐसे नाटक दिखाने का क्या उद्देश्य है। यह आयोजक ही समझें। -शिल्पा
विज्ञापन
हम क्या दिखाना चाहते हैं
7 of 9
भावना का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
समाज में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें प्रचारित करना जरूरी है। लोगों को उनके बारे में जागरुक करना चाहिए। जब संभ्रांत लोग ऐसे नाटकों के मंचन में शामिल होंगे तो आम लोगों में गलत संदेश जाएगा। आखिर हम ऐसे नाटकों में क्या दिखाना चाहते हैं। -भावना
एडल्ट नाटकों का मंचन विकास नहीं
8 of 9
रजिया का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
देश में अच्छी सड़कें होना, बुलेट ट्रेन चलना सामाजिक विकास और आधुनिकता का प्रतीक है। मगर आधुनिकता के नाम पर मंचों से अश्लीलता नहीं परोस सकते। आधुनिकता विचारों की होनी चाहिए। गलत चीजों के प्रसार को आधुनिकता कहना गलत है। -रजिया
कला के विकास और प्रचार के नाम पर गलत दृश्य दिखाना, अश्लील नाटकों का मंचन समाज से खिलवाड़ है। युवाओं पर गलत असर डालना है। साथ ही हर उस कलाकार का अपमान है जो इस क्षेत्र से जुड़े हैं। एक कलाकार क ा गलत कदम कई प्रतिभाओं का रास्ता रोक देता है। -ज्योति
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें