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Tanzil Ahmad Murder: 19 गवाह, 159 तारीखें, आखिरकार दोषियों को हुई फांसी, एनआईए अफसर और पत्नी को उतारा था मौत के घाट

Sat, 21 May 2022 04:59 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
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tanzil murder case - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में हुए बहुचर्चित तंजील अहमद हत्याकांड में दोषी पाए गए दो आरोपियों मुनीर व रैय्यान को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। दो अप्रैल 2016 की रात मुनीर ने अपने साथी रैय्यान के संग मिलकर एनआईए अफसर और उनकी पत्नी को गोली बरसाकर मार डाला था। हत्याकांड के 86 दिन बाद मुनीर की गिरफ्तारी नोएडा में की गई थी। मामला कोर्ट में चला तो दोषी ठहराने जाने तक 159 तारीख लगीं। 19 गवाहों ने कोर्ट में बयान दिए। इस न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने में 73 महीने 18 दिन का वक्त लगा।

शुक्रवार को कोर्ट ने गैंगस्टर मुनीर और रैय्यान को दोहरे हत्याकांड का दोषी करार दिया है। आज दोनों आरोपियों को फांसी की सजा मुकर्रर हुई। बता दें कि सजा सुनाए जाने तक पूरी प्रक्रिया में छह साल एक महीना 18 दिन का वक्त लगा है। जिसमें 52 हाजिरी तारीख और 107 साक्ष्य हाजिरी तारीख लगी हैं। 19 गवाहों ने अपनी गवाही देकर केस को अंजाम तक पहुंचाने में कोर्ट का सहयोग दिया। आगे विस्तार से जानें इस खौफनाक हत्याकांड में अब तक की पूरी कार्रवाई :-
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आरोपी मुनीर, तंजील अहमद हत्याकांड - फोटो : amar ujala
बनाए गए थे 44 गवाह
हत्याकांड के आरोप पत्र में 44 गवाह बनाए गए थे। जिसमें 19 गवाह कोर्ट में पेश हुए। जिनकी गवाही के आधार पर ही दोषी ठहराया जा सका। सरकारी पक्ष की ओर से वादी मृतक तंजील अहमद के भाई रागिब मसूद, मोहम्म्द हसीब, इनामुल हक, सिपाही मुन्ना बाबू, दरोगा मनोज कुमार, मृतक की बेटी, डॉ. राजेंद्र, डॉ. सुनील, डॉ. समीक्षा, डॉ. सुधीर, दरोगा रूप सिंह, मोहम्मद आजम, डॉ. आदर्श, निरीक्षक राजकुमार शर्मा, एसआई सतीश कुमार, एसआई संदीप राज, सिपाही रोहित शर्मा, दरोगा कमलेश यादव ने अपने बयान दर्ज कराए।
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बिजनौर पुलिस - फोटो : amar ujala
छावनी में तब्दील रहा जजी परिसर
एनआईए अफसर हत्याकांड में सजा सुनाए जाने को लेकर शुक्रवार की सुबह से ही जजी परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। एएसपी देहात राम अर्ज, सीओ सिटी कुुलदीप गुप्ता समेत तीन सीओ और छह निरीक्षक तथा पुलिस और पीएसी के जवान तैनात किए गए थे। परिसर में आने वाले लोगों की तलाशी लेकर ही अंदर जाने दिया गया। वहीं गेट पर मेटल डिडेक्टर से होकर गुजरना पड़ा। सर्विलांस और स्वाट की टीम भी जजी परिसर में होने वाली गतिविधियों पर नजर बनाए रही।

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बिजनौर पुलिस - फोटो : amar ujala
मुनीर पर अलीगढ़ में दर्ज हैं 12 केस
मुनीर पर लूट और हत्या के 33 मुकदमें दर्ज हैं। अलीगढ़ में ही 12 से अधिक केस दर्ज हैं। एनआईए अफसर की हत्या हुई तो मुनीर को गिरफ्तार किया गया। तब कहीं जाकर अपराध की दुनिया में उसके शातिराना अंदाज का पर्दाफाश हुआ। जजी परिसर में सुरक्षा ड्यूटी कर रहे सीओ सिटी कुलदीप गुप्ता ने बताया कि जैसे ही मुनीर को पता लगा कि उसे सजा होने वाली और दोषी ठहराया जा चुका है। इसके तुरंत बाद ही मुनीर के चेहरे के भाव बदल गए। सीओ सिटी ने बताया कि वह अचानक शांत हो गया और चेहरे पर डर के भाव नजर आए।
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आरोपी मुनीर, तंजील अहमद हत्याकांड - फोटो : amar ujala
ऐसे दिया था वारदात को अंजाम
बिजनौर में दो अप्रैल 2016 की रात को राष्ट्रीय जांच एजेंसी में डिप्टी एसपी रहे तंजील अहमद को हत्यारों ने गोलियां बरसाकर छलनी कर दिया था। तंजील अहमद के शरीर में गोली के घुसने और निकलने के 33 घाव थे, जबकि उनकी पत्नी के शरीर में गोली लगने के छह घाव मिले थे। अत्याधुनिक हथियारों से गोली चलाकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। डिप्टी एसपी के बेटे शाहबाज और बेटी जिमनिश ने सीट के नीचे घुसकर जान बचाई थी। पूरे हत्याकांड को दो मिनट में ही अंजाम दे दिया गया था।
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आरोपी मुनीर, तंजील अहमद हत्याकांड - फोटो : amar ujala
डिप्टी एसपी तंजील अहमद अपनी पत्नी फरजाना खातून और बच्चों के संग वैगनआर गाड़ी से बिजनौर जनपद के स्योहारा आए थे। 2 अप्रैल 2016 की रात को बंधन बैंक्विट हॉल में भांजी की शादी की रस्मों में उन्होंने भाग लिया। रात में लगभग साढ़े बारह बजे तंजील अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ अपने घर सहसपुर के लिए चल दिए।

गाड़ी को तंजील अहमद चला रहे थे, पत्नी बराबर वाली सीट पर और बच्चे पिछली सीट पर बैठे थे। उनकी गाड़ी के पीछे उनके भाई रागिब मसूद अपने बच्चों के साथ दूसरी गाड़ी से पीछे पीछे आ रहे थे। जब तंजील अहमद सहसपुर में ताल कटोरा तालाब के पास निर्माणाधीन पुलिया पर पहुंचे तभी बाइक पर आए दो बदमाशों ने तंजील अहमद और उनकी पत्नी पर गोलियां चला दीं। 
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आरोपी मुनीर, तंजील अहमद हत्याकांड - फोटो : amar ujala
साल 2016 में जब तंजील अहमद हत्याकांड को अंजाम दिया गया तो उस वक्त इसकी जांच एनआईए ने भी की। प्रदेश के तीन आईजी इसकी जांच में जुटे थे। शुरुआत में इस हत्याकांड को आतंकी कनेक्शन से जोड़कर देखा गया था, हालांकि बाद में सहसपुर के ही रहने वाले मुनीर और उसके साथी रैय्यान समेत पांच लोगों को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया। पांचों आरोपियों में से तीन को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया, जबकि मुख्य आरोपी मुनीर और रैय्यान को आज फांसी की सजा सुना दी गई।

उसने स्वीकार किया कि वह अत्याधुनिक हथियार एके-47 खरीदने जा रहा था, ताकि पश्चिमी यूपी व एनसीआर में अपनी किलिंग मशीन ए-कंपनी का डंका बजा सके। मुनीर ने पूछताछ में खुलासा किया कि एके-47 खरीदने के मकसद से उसने बिजनौर में 90 लाख रुपया लूटा था। इस बात की भनक तंजील को लग गई और वह उसकी राह का रोड़ा बनता दिख रहा था। इसलिए तंजील को ही मार दिया।

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आरोपी मुनीर, तंजील अहमद हत्याकांड - फोटो : amar ujala
अमित पाठक के अनुसार मुनीर ने पूछताछ में स्वीकारा था कि वह बेहद महत्वाकांक्षी हो गया था। उसने जब बिजनौर में अपराध शुरू किया तो उसी के गांव से ताल्लुक रखने वाले एनआईए अफसर तंजील अहमद उसके आड़े आने लगे। उसके विषय में जानकारियां जुटाने लगे और यहां तक कि उसके दो साथियों को भी पकड़ा गया। बाद में वह छूटे। उसे तंजील से खतरा लगा। इसलिए उन्हें मार दिया। 
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एसपी बिजनौर डॉ धर्मवीर सिंह - फोटो : Amar ujala
स्योहारा थाना क्षेत्र में वर्ष 2016 में एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी के हत्याकांड में न्यायालय ने मुनीर अहमद और रैय्यान को दोषी करार दिया है। शनिवार को कोर्ट ने दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। मुनीर अंतरराज्यीय गिरोह का लीडर है। शासन द्वारा चिह्नित राज्य स्तरीय माफिया का नंबर वन अपराधी है। इसके खिलाफ कई राज्यों में 35 मुकदमे हैं। अभी कई और मामलों में सजा कराना बाकी है। सुरक्षा के लिहाज से चौकसी बरती जा रही है। - डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी 
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