फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राष्ट्रीय युवा दिवस: मिलिए इन युवाओं से, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्र में कमाया बड़ा नाम, तस्वीरें

Tue, 12 Jan 2021 01:05 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
1 of 9
राधिका, भानु देव शर्मा और दिग्विजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
खेल का मैदान हो या पढ़ाई, मेरठ के युवा हर जगह नाम रोशन कर रहे हैं। शिक्षा का इस्तेमाल कर कोई गांवों में किसानों को नई विधि से खेती करने का प्रशिक्षण दे रहा है तो कोई अपने पैरों पर खड़े होने के बाद दूसरे युवाओं को प्रेरणा दे रहा है। आज राष्ट्रीय युवा दिवस पर हम ऐसे ही युवाओं से आपको परिचित करा रहे हैं।
विज्ञापन

किसानों-युवाओं को दे रहे मशरूम उगाने का प्रशिक्षण 

2 of 9
जितेंद्र और हिमांशु - फोटो : अमर उजाला
मेरठ कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधार्थी जितेंद्र कुमार और हिमांशु अपनी पढ़ाई और तकनीकी ज्ञान का उपयोग कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मशरूम उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे जहां एक ओर भूमिहीन किसान व महिला उद्यमियों की आय बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर कृषि अवयवों की कंपोस्टिंग कर पर्यावरण को भी प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा। जितेंद्र ने मशरूम किसानों व उद्यमियों को वर्ष भर क्वालिटी स्पान, मशरूम बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पान लैब की भी स्थापना की है। सफेद बटन मशरूम के अतिरिक्त औषधीय गुणों से भरपूर दूसरे मशरूम जैसे किंग ओयस्टर, पोर्टोबेलो, क्रिमिनी मिल्की और शिटाके मशरूम कल्टीवेशन के लिए मेरठ कॉलेज की मशरूम प्रयोगशाला में भी किसानों और युवा उद्यमियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
विज्ञापन

3 of 9
राधिका ओबेराय - फोटो : अमर उजाला
स्टार्टअप शुरू कर दूसरे युवाओं को दे रहीं दिशा
रुड़की रोड राजनकुंज निवासी राधिका ओबेराय ने डीयू से बीएससी होम साइंस की। इसके बाद उनको लगा कि इस क्षेत्र में कुछ अलग किया जाए। फिर उन्होंने डिजाइनिंग के कोर्स किए। इसके बाद कन्फेक्सनरी एंड आर्ट में डिप्लोमा कोर्स किया। उन्होंने ऑनलाइन कस्टमाइज केक कंपनी शुरू की। मोन पैराडिस नाम से वे सोशल मीडिया पर अपना बिजनेस कर रही हैं। वे बेकिंग से लेकर डिजाइन तक खुद ही सारा काम करती हैं। डिजाइनर केक को मेरठ से बाहर भी लोग पसंद कर रहे हैं।

4 of 9
दिग्विजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
नौकरी छोड़कर जरबेरा उगा रहे दिग्विजय 
तहसील सरधना के गांव सलावा निवासी युवा किसान दिग्विजय सिंह इंजीनियर की नौकरी छोड़कर पिछले तीन साल से जरबेरा फूल की खेती कर रहे हैं। पारंपरिक गन्ना बेल्ट में पॉली हाउस के तहत जरबेरा फूल की खेती कई मायनों में अनोखी है। एक एकड़ जमीन पर तीन साल पहले 60 लाख रुपये लागत से परियोजना शुरू की। इसमें करीब 30 लाख रुपये सरकार ने अनुदान दिया हैं। पहले साल में करीब 50 हजार प्रतिमाह का मुनाफा होना शुरू हो गया था।
विज्ञापन

5 of 9
मुस्कान - फोटो : अमर उजाला
अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में पहुंचे मुस्कान के चित्र
सुभारती फाइन आर्ट कॉलेज में पेंटिंग की छात्रा मुस्कान के चित्रों ने 2020 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल में स्थान पाया। शिक्षिका डॉ. पूजा गुप्ता से चित्रकारी सीख रही मुस्कान को राजा रवि वर्मा, पिकासो की पेंटिंग्स पसंद हैं। वह कहती हैं पिछले सालों में विभिन्न चित्र प्रदर्शनी में मेरे चित्र पहुंचे, पुरस्कार मिले लोगों ने सराहा अच्छा लगा। लेकिन साल 2020 में जो सराहना मिली है वो मैं नहीं भूल सकती।
विज्ञापन

6 of 9
भानु देव शर्मा - फोटो : अमर उजाला
एक स्केच ने दिलाए तीन सम्मान
बचपन से चित्रकारी के शौकीन भानु देव शर्मा ने एक स्केच बनाकर तीन पुरस्कार जीते। वह बताते हैं कि लॉकडाउन में मैंने सबसे ज्यादा शब्दों से एक स्केच बनाकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया है। इस स्केच को गोल्डन यूथ अवार्ड, मेरठ कला गौरव सम्मान से नवाजा गया। भानु देव को दुष्यंत आर्ट गैलरी सम्मान, सबसे बड़ी पोस्टकार्ड पेंटिंग का सम्मान भी मिल चुका है। इन दिनों महिला सशक्तीकरण पर सीरीज बना रहा हूं, जिसे गिनीज बुक में रिकॉर्ड के लिए भेजूंगा।
विज्ञापन

7 of 9
डॉक्टर आयुषी मोहन - फोटो : अमर उजाला
कोविड-19 में उत्कृष्ट योगदान को मिला सम्मान 
कोविड-19 के दौरान मेरठ की डॉक्टर आयुषी मोहन ने फॉर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट नई दिल्ली की इमरजेंसी सेवा में निरंतर कार्य करते हुए उत्कृष्ट योगदान दिया। जिसके लिए उनको दिल्ली सरकार द्वारा भी सम्मानित किया गया। आयुषी अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध येल यूनिवर्सिटी से प्लास्टिक सर्जरी, बोस्टन विवि से न्यूरो सर्जरी का कोर्स कर चुकी हैं।

8 of 9
डॉ. प्रशांत भटनागर - फोटो : अमर उजाला
बेहतर चिकित्सा देने की ओर बढ़े कदम 
डॉ. प्रशांत भटनागर एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के एमडी मेडिसिन के टॉपर रहे हैं। जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों के लिए चलाए जा रहे न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर पर छह माह रहे और 100 से ज्यादा बच्चों को कुपोषण से निकालने में मदद की। उन्हें यंग साइंटिस्ट अवार्ड से भी नवाजा गया। बरेली में यूपी उत्तराखंड की कांफ्रेंस में उनके शोध पत्र के लिए प्रथम पुरस्कार मिला था, उन्होंने शोध डेंगू व चिकनगुनिया को लेकर स्कूली बच्चों पर किया था। 
विज्ञापन

9 of 9
अवनी सिंह - फोटो : अमर उजाला
‘कॉलिंग शनि’ लिखकर हिट हुई अवनी
केएल इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा रहीं अवनी सिंह ने साल 2020 में लेखन के क्षेत्र में नया मुकाम हासिल किया। लिखने की शौकीन अवनी ने लॉकडाउन के दौरान उपन्यास ‘कॉलिंग शनि’ लिखा। जो अमेजॉन पर बेस्ट सेलर की सूची में पहुंचा और अवनी को खासी पहचान भी मिली।

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें


https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें