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खौफनाक मंजर देख दहल गया दिल, मजदूरों के खून से सनी थी सड़क, तस्वीरें बयां कर रही मौत का दर्द

Fri, 15 May 2020 01:01 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर हादसे की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में सहारनपुर-मुजफ्फरनगर बॉर्डर पर बुधवार देर रात हुए हादसे के बाद सड़क पर दिल दहला देने वाला मंजर नजर आया। घटनास्थल पर करीब दस मीटर की दूरी तक खून पड़ा था, जिसे बाद में मिट्टी डालकर छिपा दिया गया। साथ ही हादसे का शिकार हुए प्रवासी मजदूरों के कपड़े, कई जोड़ी चप्पलें और पॉलीथिन के पैकटों में पैक खाद्य सामग्री पड़ी हुई थी। कुछ अन्य सामान भी इधर-उधर बिखरा पड़ा था, जो हादसे की भयावहता को बयां कर रहा था। यह मंजर जिसने भी देखा तो, सिहरन पैदा हो गई। आगे देखिए तस्वीरें-

हादसे के बाद चौकी पुलिस की भूमिका पर सवाल

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अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर जानकारी ली - फोटो : अमर उजाला
स्टेट हाईवे-59 पर बुधवार देर रात हुए हादसे को लेकर आला अफसरों के निर्देश पर रोहाना चौकी पुलिस की भूमिका की भी जांच शुरू हो गई है।

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मुजफ्फरनगर हादसा - फोटो : amar ujala
दरअसल, स्टेट हाईवे-59 पर सहारनपुर की घलौली चेकपोस्ट से करीब 50 मीटर की दूरी से जनपद मुजफ्फरनगर की सीमा शुरू हो जाती है। इससे करीब 100 मीटर पहले स्थित टोल प्लाजा पर शहर कोतवाली की रोहाना चौकी का चेकपोस्ट है। कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बने जनपद सहारनपुर से हो रही प्रवासी मजदूरों की आवाजाही को रोका नहीं गया।

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चालक ने इसी बस से कुचला था - फोटो : अमर उजाला
वहीं, जिस तरह रोडवेज बस चालक हादसे को अंजाम देकर बस को मोड़कर फिर से सहारनपुर की तरफ फरार हो गया, उससे भी चौकी पुलिस की मुस्तैदी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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खून से सनी पड़ी चप्पलें - फोटो : अमर उजाला
एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि जांच में कई बिंदु ऐसे आए हैं, जिनसे साफ है कि यदि गंभीरता से काम किया जाता तो हादसे को रोका जा सकता था। एसएसपी ने बताया जांच की जा रही है। लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी।
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तीन दिन पूर्व शुरू किया था सफर

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मुजफ्फरनगर हादसा - फोटो : अमर उजाला
बिहार निवासी प्रवासी मजदूर हरियाणा प्रांत की यमुनानगर स्थित प्लाईवुड फैक्टरी में काम करते थे। सभी मजदूर बिहार प्रांत के गोपालगंज व उसके आसपास क्षेत्र के रहने वाले थे, जो आपस में रिश्तेदार व परिचित भी थे।

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मजदूरों की चप्पल - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन-3 लागू होने तक सभी मजदूर फैक्टरी में ही रुके रहे, लेकिन कुछ दिन बाद उनका धैर्य जवाब दे गया। सोमवार शाम प्लाइवुड फैक्टरी से 15 प्रवासी मजदूर बिहार जाने के लिए पैदल ही निकले। इनमें हरेश साहनी और उसके दो बेटे विकास व आकाश के साथ ही पवारी सहानी व उसका बेटा प्रमोद भी शामिल थे।

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कमिश्नर ने ली घटना की जानकारी - फोटो : अमर उजाला
हादसे में मारे गए हरेश के दूसरे बेटे आकाश ने बताया कि मंगलवार रात वे सहारनपुर में पहुंचे थे, जहां रात में वे एक आश्रम में रुके। बुधवार सुबह सहारनपुर के कुछ लोगों ने उन्हें ट्रक में बैठा दिया, जिसके चालक ने उन्हें सहारनपुर की सीमा में ही एक ढाबे पर छोड़ दिया। वहां से फिर से पैदल सफर शुरू हुआ। इसमें आकाश चार अन्य साथियों के साथ पीछे रह गया, जबकि उसके पिता हरेश बेटे विकास समेत दस मजदूर आगे निकल गए।
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मुजफ्फरनगर हादसा - फोटो : amar ujala
बुधवार देर रात घलौली चेकपोस्ट पार करते हुए मुजफ्फरनगर की सीमा में करीब सौ मीटर अंदर पहुंचते ही दस प्रवासी मजदूरों की आगे चल रही टोली को नशे में धुत रोडवेज बस चालक ने रौंद डाला, जिनमें से छह लोगों की जान चली गई।

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