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पढ़ें उस 'मां' की साहस भरी कहानी, जिसने देश पर न्यौछावर कर दिए तीन बेटे और चार पौत्र

Sat, 02 Mar 2019 06:51 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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abhinandan - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान से लौटे विंग कमांडर अभिनंदन की वीरता पर पूरे देश को गर्व हो रहा है। उन्हें यह जांबाजी सेना में रह चुके दादा, पिता और मां से मिली। देश में ऐसे परिवारों की कोई कमी नहीं है, जिनके दिल में देशभक्ति का जज्बा हिलोरे लेता है। ऐसा ही एक परिवार यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में है। यहां रहती है एक ऐसी मां जिसने अपने तीन बेटों और चार पौत्रों को देशसेवा पर न्यौछावर कर दिया: -
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नेवी सैनिक प्रदीप शर्मा
मुजफ्फरनगर जिले के बघरा ब्लॉक के गांव नंगला पिथौरा की रत्न माला वशिष्ठ ऐसी ही देशप्रेमी मां है, जिसके तीन बेटे और चार पौत्र सेना में मातृभूमि की रक्षा में डटे हैं। उन पर आज हर किसी को गर्व होता है लेकिन जब वह इसके पीछे की कहानी लोगों को बताती है तो हर कोई आश्चर्यचकित रह जाता है।
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नेवी कमांडर कुलदीप शर्मा
जांबाज कमांडर अभिनंदन का परिवार जैसे पीढ़ियों से देश की सेना में रहा है, वैसे ही नंगला पिथौरा का वशिष्ठ परिवार इंडियन आर्मी की सेवा को समर्पित है। बुजुर्ग रत्न माला की उम्र 78 साल हो चुकी है, मगर उनकी देशभक्ति की भावना बेजोड़ है।

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आर्मी हवलदार मुकेश शर्मा
बागपत जिले के गांव लूम निवासी दयाराम महारथी की यह बेटी सिर्फ पांच दर्जा पढ़ी है। राष्ट्रभक्ति का पाठ उन्होंने बचपन में ही पढ़ लिया था। उनके पिता पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरी के साथ आजादी आंदोलन में चुनारगढ़ किले की जेल में बंदी रहे थे।
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सौरभ् वशिष्ठ
रत्नमाला जब बड़ी हुई तो उनका विवाह मुजफ्फरनगर में नंगला पिथौरा के श्रीनिवास शर्मा से हुआ। बेटों के जन्म के बाद ही रत्नमाला ने मन बना लिया था कि बेटों को सेना में ही भेजूंगी। उन्होंने बाल्यावस्था से ही बच्चों को देशसेवा की घुट्टी पिलाई। उनके छह बेटों में से चार इंडियन आर्मी में भर्ती हुए।
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रजत वशिष्ठ
कुलदीप शर्मा आंध्र प्रदेश के विशाखापटनम में नेवी के कमांडर हैं। मुकेश शर्मा एमपी के जबलपुर में सेना की सिग्नल कोर में हवलदार हैं। प्रदीप शर्मा नेवी से रिटायरमेंट के बाद सीबीआई में नियुक्त है। कमांडो घनश्याम शर्मा श्रीलंका भेजी गई शांति सेना में एक सैन्य ऑपरेशन के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।
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विशाल वशिष्ठ
दो अन्य बेटे राकेश वशिष्ठ जिला पंचायत के सदस्य तथा अश्वनी नगर पालिका में ठेकेदार हैं। मां रत्नमाला की दृढ़ इच्छा शक्ति की बदौलत दूसरी पीढ़ी भी सेना की शान बनी है। वह कहती हैं कि आतंकवादियों ने हजारों सैनिकों का खून बहाया है, फिर भी आतंक के सामने वीर सपूतों ने शौर्य, त्याग और बलिदान का इतिहास लिखा है।

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राहुल वशिष्ठ
दूसरी पीढ़ी ने भी चुनी देश सेवा
सेना में कमांडो रहे घनश्याम शर्मा के दो बेटे सौरभ और रजत ने भी आर्मी ज्वाइन की। सौरभ जम्मू-कश्मीर के पूंछ में तैनात है, जबकि रजत एएमई सिक्किम में ट्रेनिंग कर रहा है। हवलदार मुकेश शर्मा का बेटा विशाल जबलपुर में सिग्नल कोर में कार्यरत हैं। राकेश वशिष्ठ का बेटा राहुल एनडीए का एग्जाम उत्तीर्ण कर चुका है। शहर के कृष्णापुरी में भी परिवार का आवास है। अभी भी रत्नमाला का परिवार संयुक्त रुप से एक रसोई से जुड़ा है।
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शहीद कमांडो घनश्याम सिंह
वेश बदल कर पकड़े थे आतंकी
शहीद घनश्याम की पत्नी मंजू शर्मा मेरठ जिले के गांव मैनापुट्ठी की निवासी है। दो बेटों को सेना में भेज चुकी मंजू बताती है कि उनके कमांडो पति कश्मीर के कुपवाड़ा में एक दशक तैनात रहे। वेश बदल कर उन्होंने कई आतंकियों को पकड़वाया था। दहशतगर्द तालाब के नीचे सुरंग बना कर छिपते थे। जिला पंचायत सदस्य राकेश वशिष्ठ बताते हैं कि नंगला पिथौरा के रोहताश सिंह वर्ष 1962 में चीन युद्ध में शहीद हुए थे। उनकी पुत्री प्रवीण को मां रत्न माला ने बेटी की तरह पाला है।

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