मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात में हुए बहुचर्चित अमित कश्यप उर्फ मिक्की हत्याकांड में कोर्ट ने आरोपियों को मृत्युदंड दिया है। आरोपी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई गई है। सात अक्तूबर को आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सजा सुनते ही आरोपी गश खाकर गिर गए। यह हत्याकांड 13 अप्रैल 2025 को हुआ था।
यूपी के मेरठ जिले के बहसूमा थाना इलाके के अकबरपुर सादात गांव में हुए बहुचर्चित अमित कश्यप उर्फ मिक्की (31) हत्याकांड में शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर (एडीजे-12) की अदालत ने दोषी पत्नी रविता (25) और उसके प्रेमी अमरदीप (22) को मृत्युदंड (फांसी की सजा) दिया है।
अदालत ने दोनों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अतिरिक्त, साक्ष्य मिटाने और अपराधी को संरक्षण देने से संबंधित धाराओं के तहत दोनों को 7-7 साल के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये के जुर्माने की अलग से सजा दी गई है।
अदालत ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी का अपराध माना। फैसले के दौरान दोनों जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। सजा सुनाए जाने से ठीक पहले जज ने दोनों दोषियों से पूछा कि वे अपने बचाव में क्या कहना चाहते हैं।
रविता ने अपने छोटे बच्चों की दुहाई दी, जबकि अमरदीप ने अपने बूढ़े-माता पिता का हवाला दिया। अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई। जेल प्रशासन ने बताया कि फैसला सुनते ही दोनों गश खाकर गिर गए और रविता को बुखार आ गया।
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आरोपी पत्नी रविता की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रविता ने कहा: मेरे तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, उनका ख्याल रखा जाए। इसके बाद वह शांत हो गई।
अमरदीप ने कहा: मेरे माता-पिता बहुत बूढ़े हैं। उनकी सेवा करने वाला कोई और नहीं है। कृपया उनकी देखभाल में कोई कमी न रहे।
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अमित हत्याकांड में दोषियों को फांसी की सजा मिलने के बाद अमित की मां के छलके आंसू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोस्टमार्टम न कराने पर अड़ी थी रविता
अमित और अमरदीप दोनों साथ में टाइल्स लगाने (मिस्त्री) का काम करते थे। अमरदीप भी गांव का ही रहने वाला था। उसका अमित के घर आना-जाना शुरू हुआ। इस दौरान रविता से नजदीकियां बढ़ गई। 13 अप्रैल 2025 की सुबह अमित का शव उनके घर में बिस्तर पर मिला था।
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अमित हत्याकांड में दोषियों को सुनाई गई सजा एडीजे 12 जयबीर सिंह नागर की कोर्ट के बाहर लगी भीड़
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प्राकृतिक दिखाने के लिए शव के नीचे एक जिंदा घोड़ा पछाड़ सांप (रेट स्नेक) दबाया गया था। शरीर पर सांप के डसने के 10 निशान मौजूद थे। अमित का भाई मोनू शव को जिला अस्पताल लेकर पहुंचा। यहां डॉक्टरों ने इसे सर्पदंश से मौत नहीं माना और पोस्टमार्टम की सलाह दी।
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अमित हत्याकांड में दोषियों को सुनाई गई सजा एडीजे 12 जयबीर सिंह नागर की कोर्ट के बाहर लगी भीड़
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मोनू ने रविता से यह बात बताई तो वह पोस्टमार्टम न कराने पर अड़ गई, लेकिन मोनू ने बिना बताए पोस्टमार्टम करा दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया कि अमित की मौत गला, नाक और मुंह दबाकर दम घुटने से हुई थी। गर्दन की हायोइड बोन और थायरॉइड कार्टिलेज भी टूट चुकी थी।
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अमित हत्याकांड में दोषियों को फांसी की सजा मिलने के बाद अमित की मां के छलके आंसू
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मृतक के भाई मोनू ने 16 अप्रैल 2025 को रविता और अमरदीप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने जब रविता की कॉल डिटेल निकाली तो कत्ल की रात से गिरफ्तारी तक उसकी अमरदीप से 51 बार फोन पर बात हुई थी। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
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अमित हत्याकांड में दोषियों को फांसी की सजा मिलने के बाद अमित की मां के छलके आंसू
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जज बोले-जिसे जिंदगी की डोर सौंपी थी उसी ने सांसें छीन लीं
न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने फैसला सुनाते हुए बेहद तल्ख और गंभीर टिप्पणियां की हैं। उन्होंने कहा हिन्दू धर्मशास्त्रों में पत्नी को अर्धांगिनी और धर्मपत्नी का दर्जा दिया गया है। हमारे देश में माता सावित्री का आदर्श है, जिन्होंने अपने पति के प्राण यमराज से भी वापस छीन लिए थे। लेकिन इस कलयुगी घटना ने उस पवित्र विश्वास को पूरी तरह तार-तार कर दिया है।
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अमित हत्याकांड में दोषियों को सुनाई गई सजा, किसी काम से कोर्ट आईं महिलाओं ने भी रविता और अमरदीप को ग
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न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि जिस पत्नी पर पति ने अपनी जिंदगी और विश्वास की डोर सौंपी थी, उसी ने प्रेमी के मोह में आकर अपने ही सोते हुए पति की सांसें छीन लीं। अगर घर की रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो समाज में विवाह जैसे पवित्र संस्कार से लोगों का विश्वास उठ जाएगा और अनैतिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा।
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न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर
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समाज में धर्म, नीति और न्याय व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए न्यायाधीश ने अपने फैसले में मनुस्मृति, आत्रेय संहिता और महाभारत के श्लोकों का उदाहरण दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे जघन्य अपराधियों को कानून के तहत कड़े से कड़ा दंड देना समाज की स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
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अमित हत्याकांड में दोषियों को फांसी की सजा मिलने के बाद अमित की मां के छलके आंसू
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मां बोलीं : दोनों को फांसी पर लटकते देखना चाहती हूं
अदालत के इस फैसले के बाद भावुक मुनेश देवी ने कहा, आज मुझे इंसाफ मिला है। जिस बेटे को मैंने बड़े अरमानों और लाड-प्यार से पाल-पोसकर बड़ा किया था, उसकी इतनी बेरहमी से जान लेने वालों को कानून ने उनके अंजाम तक पहुंचा दिया है। इस फैसले से आज मेरे दिवंगत बेटे की आत्मा को भी गहरी संतुष्टि मिली होगी। उन्होंने कहा कि अब वह सिर्फ उन दोनों हत्यारों को अपने सामने फांसी के फंदे पर लटकते हुए देखना चाहती हैं।
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अमित हत्याकांड में दोषियों को फांसी की सजा मिलने के बाद अमित की मां के छलके आंसू
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संबंधों में बाधा बनने पर रची गई थी साजिश
विशेष लोक अभियोजक (एडीजीसी) फरजाना मकसूद के अनुसार, पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि रविता और अमरदीप के बीच अवैध संबंध थे जिसमें अमित बाधा बन रहे थे।। इसी कारण दोनों ने उसकी हत्या की योजना बनाई।
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अमित हत्याकांड में दोषियों को सुनाई गई सजा एडीजे 12 जयबीर सिंह नागर की कोर्ट के बाहर लगी भीड़
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साजिश के तहत अमरदीप ने सपेरे कृष्ण से माता के जागरण का बहाना बनाकर 1,000 रुपये में एक सांप खरीदा था। कृष्ण यह सांप अपने नाना प्रीतमनाथ से लेकर आया था। हत्या को सर्पदंश से मौत दर्शाने के लिए उन्होंने अमित का गला घोंटने के बाद बिस्तर पर सांप छोड़ दिया था।
रविता, उसका प्रेमी अमरदीप। पति अमित की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
रविता का भाई बोला, जैसी करनी... वैसी भरनी
रविता मुजफरनगर के बघरा विकास खंड के गांव सैदपुरा की रहने वाली है। उसके भाई गुलाब ने कहा कि अदालत का फैसला सही है। उनकी बहन ने गलत किया था, इसलिए उसे अदालत ने सजा दी। जैसी करनी, वैसी भरनी। ई-रिक्शा चलाने वाले गुलाब ने बताया कि रविता उनकी इकलौती बहन है। परिवार ने उससे नाता तोड़ लिया है। हम पैरवी करने नहीं गए और ना ही जाएंगे। कोर्ट ने जो सजा दी, वह सही है।