मेरठ के सौरभ हत्याकांड में चश्मदीद न होने की दलील पर परिस्थितिजन्य साक्ष्यों-गवाहों की कड़ी भारी पड़ी। अभियोजन के गवाहों से बचाव पक्ष के वकील ने जिरह में कई सवाल पूछे थे। सौरभ हत्याकांड में 54 दिन में चार्जशीट दाखिल हुई थी। खुलासे के 560 दिन बाद आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है।
मेरठ के सौरभ राजपूत की हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। ऐसे में इस केस को न्यायालय में साबित करना आसान नहीं था। पुलिस की जांच और जुटाए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों अटूट कड़ियों को अभियोजन पक्ष ने पेश किया।
उनकी दलील बचाव पक्ष की चश्मदीद न होने व अन्य दलीलों पर भारी पड़ीं। खुलासे की बात करें तो पुलिस ने 54 दिन बाद आरोप पत्र दाखिल किया। लगभग 125 तारीखें लगीं। 22 गवाहों ने बयान दर्ज कराए। 560 दिन बाद दोनों को दोषी करार दिया।
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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कैब चालक अजब सिंह ने बयान दिया कि वारदात को अंजाम देने के बाद मुस्कान और साहिल ने हिमाचल प्रदेश घूमने जाने के लिए ट्रैवल एजेंसी से चार मार्च 2025 को कैब बुक की थी। सफर के दौरान मुस्कान और साहिल सामान्य तरीके से बातें कर रहे थे।
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डीजी कोर्ट में सजा सुनाने के बाद कोर्ट से बाहर आते अधिवक्ता
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उनके चेहरे पर इतनी जघन्य वारदात को अंजाम देने का कोई डर या पछतावा नहीं था। वह होटल में चले जाते थे और चालक खाना खाकर कैब में सो जाता था।
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साहिल और मुस्कान को डीजी कोर्ट में सजा सुनाने के दौरान तैनात पुलिस
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मनाली, शिमला और कसौल के होटल के मैनेजरों ने सीसीटीवी फुटेज, रजिस्टर एंट्री आदि मुहैया कराते हुए पुष्टि की कि वह वारदात के बाद उनके होटल में ठहरे थे। उस दौरान दोनों के डांस करते हुए वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।
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कोर्ट से बाहर आकर मीडिया को जानकारी देती मृतक सौरभ की मां व साथ में भाई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जांच अधिकारी (विवेचक) ने अदालत में मेडिकल स्टोर संचालक, ड्रम व सीमेंट विक्रेता के बयान लेकर उनकी कोर्ट में भी गवाही कराई। टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनियों के नोडल अधिकारियों ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) और टावर लोकेशन रिपोर्ट पेश करते हुए गवाही दी।
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कोर्ट में सजा सुनाने के बाद कोर्ट से बाहर मीडिया को जानकारी देते सौरभ के अधिवक्ता विजय बहादुर
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कहा कि तीन मार्च की रात (हत्या वाले दिन) मुस्कान और साहिल के मोबाइल की लोकेशन ब्रह्मपुरी स्थित उसी मकान में थीं। इसके अलावा सौरभ के दोस्त ने साहिल को वारदात की रात सौरभ व मुस्कान के घर जाते देखा था।
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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बचाव पक्ष की दलील... पड़ोसियों ने क्यों नहीं सुनी सौरभ की चीख?
सौरभ हत्याकांड के विचारण (ट्रायल) के दौरान बचाव पक्ष की वकील रेखा जैन ने चश्मदीद गवाह न होने की दलील दी और गवाहों से जिरह की। उन्होंने कहा कि वारदात के दौरान आसपास के लोगों को सौरभ की चीखें क्यों नहीं सुनाई दीं।
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कोर्ट में सजा सुनाने के बाद कोर्ट से बाहर आकर मीडिया को जानकारी देती मृतक सौरभ की मां व साथ में भाई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ड्रम बेचने वाले दुकानदार (सैफुद्दीन) से पूछा कि क्या उसने दुकान पर कोई बिल या पक्की रसीद काटी थी। उसकी दुकान का उस दौरान का फुटेज कहां है। वकील ने कहा कि वारदात के कई दिनों बाद किसी ग्राहक के चेहरे को सटीक रूप को कैसे याद रखा जा सकता है।
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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर से पूछा गया कि शव अत्यधिक सड़न में था और सीमेंट के अंदर बंद था। ऐसे में क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दिए गए मौत के समय में 24 से 36 घंटे का अंतर संभव है। टेलीकॉम कंपनियों के नोडल अधिकारियों से पूछा कि टावर लोकेशन केवल मोबाइल हैंडसेट का दायरा दर्शाती है न कि यह कि उस वक्त फोन का इस्तेमाल कौन कर रहा था।
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फाइल फोटो
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कैब ड्राइवर और मनाली के होटल मैनेजरों से पूछा कि क्या दोनों आरोपियों के हाव-भाव में कोई घबराहट, हड़बड़ाहट या कपड़ों पर खून-चोट के निशान थे। नहीं थे तो वह कैसे वारदात करते हैं।
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54 दिन में दाखिल कर दी थी करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट
सौरभ की हत्या के बाद तत्कालीन एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष टीम गठित की थी। पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के साथ इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों तथा अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को जुटाया।
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विवेचना में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने 54 दिनों में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। इसमें आरोपियों के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्यों और विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों को शामिल किया गया था।
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मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड: सौरभ राजपूत की हत्या में पत्नी मुस्कान और उसका प्रेमी दोषी करार
मेरठ जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बुधवार को सौरभ राजपूत की हत्या की आरोपी उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया है। अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। 14 अक्तूबर को सजा सुनाई जाएगी। हत्या आरोपी मुस्कान और साहिल की जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी हुई। अदालत का फैसला सुनने के बाद दोनों रोते हुए अपनी-अपनी बैरक में लौट गए। यह हत्याकांड देशभर में नीले ड्रम कांड से काफी चर्चित रहा है।
इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत ने ब्रह्मपुरी निवासी मुस्कान रस्तोगी से 2016 में प्रेम विवाह किया था। सौरभ लंदन में नौकरी करते थे और पत्नी मुस्कान मेरठ में रहती थी। इसी दौरान मुस्कान का अपने पुराने दोस्त साहिल शुक्ला से करीबी संबंध बन गए।
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24 फरवरी 2025 को सौरभ अपनी छह साल की बेटी और पत्नी मुस्कान का जन्मदिन मनाने के लिए लंदन से घर आए थे। संबंधों में बाधा बनने पर मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने सौरभ की तीन मार्च 2025 की रात हत्या कर दी।
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हत्या करने से पहले मुस्कान ने सौरभ के खाने में नशीली दवा मिला दी। जब सौरभ बेसुध हो गए तो मुस्कान ने फोन करके अपने प्रेमी साहिल को घर बुला लिया। दोनों ने मिलकर उस्तरे और चाकू से सौरभ की हत्या कर दी।
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आरोपी साहिल और मुस्कान
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शव को टुकड़े करके नीले ड्रम में भरने के बाद मुस्कान अपने प्रेमी के साथ घूमने चली गई। पुलिस ने मुस्कान और साहिल को उनके घर से 19 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने अदालत में 12 मई 2025 को करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल थी थी।
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साहिल शुक्ला और मुस्कान
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शव के टुकड़े करके नीले ड्रम में भरा
सौरभ की हत्या करने के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए मुस्कान और साहिल ने जो तरीका अपनाया उसकी चर्चा देश भर में रही। हत्या के बाद दोनों ने सौरभ के सिर को धड़ से अलग कर दिया और दोनों हाथों की कलाइयां काट दीं। इसके बाद बाजार से अनाज रखने वाला बड़ा नीला प्लास्टिक का ड्रम, सीमेंट, बालू और डस्ट खरीदकर लाए।
आरोपी साहिल और मुस्कान
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सौरभ के शव के कटे हुए टुकड़ों को पॉलिथीन में लपेटकर नीले ड्रम में रख दिए। दुर्गंध रोकने के लिए ड्रम के ऊपर सीमेंट और डस्ट का भारी घोल डालकर उसे सील कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों पुलिस और परिजनों को गुमराह करने के लिए शिमला-मनाली घूमने चले गए।