मुठभेड़ स्थल पर मौजूद पुलिस
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शहर में दो और देहात में पांच शूटिंग स्थल
इसे अनायास कहें या नियोजन, मुठभेड़ की जगहें भी निर्धारित हैं और थानेदार भी। ऐसा लगता है कि इन थानाक्षेत्र में ही ज्यादा बदमाशों का डेरा है। मेरठ शहर में लिसाड़ी गेट, परतापुर और देहात में सरूरपुर, हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़, इंचौली व खरखौदा में पुलिस की बदमाशों से सबसे ज्यादा मुठभेड़ होती है। जबकि अन्य 23 थानों में बदमाशों से पुलिस का सामना भी नहीं होता है। नौचंदी, कोतवाली, लालकुर्ती, मेडिकल, देहलीगेट, जानी समेत कई थानों की पुलिस के सामने बदमाश नहीं आए। इन थानों के प्रभारी कभी किसी एनकाउंटर में शामिल भी नहीं रहे। सवाल है कि क्या इन थाना क्षेत्रों में अपराध नहीं होते? या अपराधी एनकाउंटर की नौबत ही नहीं आने देते?