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बेबसी: नहीं मिली एंबुलेंस, कार में ले जाना पड़ा शव, जिंदगी बचाने के लिए करनी पड़ रही जद्दोजहद, सबूत हैं ये तस्वीरें

Wed, 28 Apr 2021 12:30 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
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मेरठ में मरीजों को हो रही परेशानी। - फोटो : amar ujala
मेरठ में कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी होने लगी है। मृतकों को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मिल रही है। संक्रमण के मामले कम नहीं हुए तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
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मेरठ में मरीजों को इलाज में मिलने में हो रही दिक्कत। - फोटो : amar ujala
मंगलवार दोपहर साढ़े 12 बजे मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में मरीज की मौत के बाद कर्मचारियों ने शव परिजनों को सौंप दिया। गमजदा परिजन काफी देर तक एंबुलेंस के लिए फोन करते रहे, लेकिन जवाब नहीं मिला। बेबस परिजन शव को वैगनकार में लेकर चले गए। बेबसी में कोई मरीज के साथ सिलिंडर लेकर पहुंच रहा है तो कोई अपनों को गोद में लेकर। 
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मेरठ में ऑक्सीजन का संकट। - फोटो : amar ujala
गाइडलाइन का पालन जरूरी
कोविड मरीजों की मौत होने पर शव वार्ड से पैकिंग करके ही दिए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद एहतियात बरतने की जरूरत है। बहुत से ऐसे वाहन है, जिनमें कोविड मरीजों के शव जा रहे हैं, कुछ चालक वाहनों के शीशे खोल देते हैं। ऐसे में किसी वजह से पैकिंग हट जाने की दशा में संक्रमण फैल सकता है। ऐसे में प्रशासन को गाइड लाइन का पालन कराने की जरूरत है, ताकि कोई दूसरा संक्रमित न हो सके।

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मेरठ में ऑक्सीजन न मिलने से तड़प रहे मरीज। - फोटो : amar ujala
बेटी की जिंदगी बचाने के लिए समाजसेवी अजय सेठी को करनी पड़ी जद्दोजहद
कोरोना महामारी में शहर के अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट है। ऑक्सीजन मिल जाती है तो जिंदगी बचाने के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मारामारी हो रही है। समाजसेवी, रंगकर्मी और दवा विक्रेता प्रह्लाद नगर निवासी अजय सेठी इसी का शिकार हो गए। 
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अपनों के लिए रोते बिलखते परिजन। - फोटो : amar ujala
गढ़ रोड स्थित न्यूटिमा अस्पताल में भर्ती सेठी की 31 वर्षीय बेटी जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही है। सोमवार रात उन्होंने ऑक्सीजन के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इससे बाद प्रशासन से मदद मिली। डॉक्टर ने रेमेडेसिविर इंजेक्शन लिख दिया। मंगलवार को वे स्वास्थ विभाग अधिकारियों को फोन मिलाते रहे, किसी का फोन नहीं उठा। बेटी की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में वह ड्रग्स इंस्पेक्टर के घर पहुंच गए। यहां इंजेक्शन तो दूर, संतोषजनक जवाब भी नहीं मिला। 
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कार में शव ले जाते परिजन। - फोटो : amar ujala
भाजपा नेता विनीत अग्रवाल शारदा व मुंबई से उनके टीवी कलाकार दोस्त गिरीश थापर ने उनकी मदद की। गिरीश थापर ने मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की, जबकि शारदा ने डीएम व सीएमओ से बात की। सेठी ने बताया शाम तक दो रेमेडेसिविर का इंतजाम हो पाया। इंजेक्शन प्रशासन द्वारा सीधे न्यूटिमा अस्पताल को दिए गए। सेठी का कहना है कि आम जनता को ऑक्सीजन व इंजेक्शन कैसे मिलेगा। रेमेडेसिविर के लिए कहीं काउंटर नहीं हैं। सभी अस्पतालों में रेमेडेसिविर के कुछ इंजेक्शन तो उपलब्ध रहने ही चाहिए। व्यापारी नेता शैंकी वर्मा ने भी ऑक्सीजन व रेमेडेसिविर को लेकर मचे हाहाकार पर चिंता जताई। कहा, प्रशासन को जल्द लोगों को सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए।

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