फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खास तस्वीरें: ...जब उद्घाटन से पहले वर्कआउट करने लगे पीएम मोदी, खूब वायरल हो रहा वीडियो

Sun, 02 Jan 2022 03:11 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
विज्ञापन
1 of 5
वर्कआउट करते पीएम मोदी। - फोटो : amar ujala
मेरठ के सलावा गांव में प्रदेश के सबसे बड़े खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने पहुंचे पीएम मोदी उद्घाटन से पहले वर्कआउट करने पहुंचे। खेल प्रदर्शनी का निरीक्षण करने के दौरान पीएम मोदी ने व्यायाम करने वाली मशीन पर भी हाथ आजमाया। उन्होंने मशीन के बारे में जानकारी ली और व्यायाम भी करके देखा। प्रधानमंत्री खेल उपकरणों का अवलोकन करने के बाद मंच पर पहुंचे। यहां जोरदार तालियों के साथ मेरठ की जनता ने पीएम मोदी का स्वागत किया।

पीएम मोदी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि पहले बेटियां घर से निकलने में डरती थीं। आज मेरठ की बेटियां खेल में अपना परचम लहरा रही हैं, नाम रोशन कर रही हैं। कहा कि 21वीं सदी के भारत में सबसे बड़ा दायित्व युवाओं के पास ही है।
विज्ञापन

2 of 5
पीएम मोदी। - फोटो : amar ujala
खेल विश्वविद्यालय के शिलान्यास से पहले पीएम मोदी स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स पहुंचे और जिम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने खुद भी जिम में वर्कआउट किया। प्रधानमंत्री ने जिम करने के अलावा इन जिम मशीनों का जायजा लिया। पीएम मोदी ने यहां फिट इंडिया की मिसाल पेश की। प्रधानमंत्री का ये वर्कआउट वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
विज्ञापन

3 of 5
पीएम मोदी। - फोटो : amar ujala
प्रधानमंत्री ने कहा यहां मेरठ के सोतीगंज बाजार में गाड़ियों के साथ होने वाले खेल का भी अब खेल खत्म हो रहा है। अब उत्तर प्रदेश में असली खेल को बढ़ावा मिल रहा है। यूपी के युवाओं को खेल की दुनिया में छा जाने का मौका मिल रहा है।



4 of 5
पीएम मोदी। - फोटो : amar ujala
पीएम मोदी ने कहा कि युवा नए भारत का कर्णधार भी है, विस्तार भी है। युवा नए भारत का नियंता भी है, नेतृत्वकर्ता भी है। आज के युवाओं के पास प्राचीनता की विरासत भी है, आधुनिकता का बोध भी है। जिधर युवा चलेगा उधर भारत चलेगा। और जिधर भारत चलेगा उधर ही अब दुनिया चलने वाली है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
पीएम मोदी। - फोटो : amar ujala
पीएम मोदी ने कहा कि जब गांव में कोई खुद को खिलाड़ी बताता था कि लोग कहते थे कि खेलते हो यह तो ठीक है लेकिन काम क्या करते हो। ज्यादातर खेलों के प्रति बेरुखी बढ़ती गई। दुनिया की हॉकी प्राकृतिक मैदान से भाई भतीजावाद, भ्रष्टाचार का खेल, और पारदर्शिता का तो नामो निशान नहीं। ये हर खेल का हाल है। देश के युवाओं का जो अभिन्न टेलेंट था वह बंदिशों में जकड़ा हुआ था। 2014 में खिलाड़ियों के टेलेंट को उन बंदिशों से निकालने का काम किया।


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें