फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खौफनाक सीन: ...जब तेंदुए को घर में देख सहम गए लोग, दहशत में गुजरे 10 घंटे, देखिए मौके की तस्वीरें

Fri, 04 Mar 2022 05:32 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
विज्ञापन
1 of 11
मेरठ में तेंदुआ पहुंचा। - फोटो : amar ujala
मेरठ के मोदीपुरम में शुक्रवार सुबह एक तेंदुए ने कॉलोनी में घुसकर आतंक मचा दिया। इस दौरान तेंदुआ करीब एक घंटे तक घर में बैठा रहा और परिवार सहित कॉलोनी के लोग दहशत में रहे। इसके बाद तेंदुए को पकड़ लिया गया लेकिन, वह जाल से निकलकर भाग गया। यही नहीं तेंदुए के भागने के दौरान एक युवक ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। उधर, स्कूलों में भी अलर्ट कर दिया गया।

वहीं तेंदुए की सूचना पर छोटे बच्चे भी पूरी तरह सहम गए और घरों में कैद हो गए। पुलिस और वन विभाग की टीम तेंदुए को पकड़ने के प्रयास में लगी हुई है लेकिन, अभी तक तेंदुआ पकड़ में नहीं आया है।  
विज्ञापन

2 of 11
leopard in meerut - फोटो : अमर उजाला
...जब सहम गया मोदीपुरम
मोदीपुरम के गांव दुल्हैड़ा की ओर से होते हुए पल्लवपुरम के क्यू पॉकेट के मकान नंबर-72 में तेंदुआ घुस गया। इससे परिवार में हड़कंप मच गया। इस दौरान करीब एक घंटे परिवार के सदस्य कमरे में ही कैद रहे। वहीं सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची।
विज्ञापन

3 of 11
leopard in meerut - फोटो : अमर उजाला
मकान मालिक स्वप्निल ने बताया कि जोरदार आवाज आने पर उन्होंने खिड़की से बाहर झांक कर देखा तो उन्हें तेंदुआ दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें बाहर आने से मना कर दिया। उनके अलावा उनकी पत्नी प्रीति शर्मा, माता आभा शर्मा, भाभी और दो बच्चे घर में बंद हैं।

4 of 11
Leopard in meerut - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद पुलिस ने वन विभाग को मामले की जानकारी दी। एक घंटे बाद भी टीम मौके पर नहीं पहुंची। बताया गया कि तेंदुए को सबसे पहले डॉ. राजकुमार चौधरी ने भागते हुए देखा था। उन्हीं के शोर मचाने पर भीड़ एकत्रित हुई और तेंदुआ स्वप्निल के घर में घुस गया।
विज्ञापन

5 of 11
leopard in meerut - फोटो : अमर उजाला
टीम ने जाल लगाकर तेंदुए को कैद कर लिया लेकिन, कुछ ही देर बाद वह जाल से निकलकर एक खाली प्लॉट में जा पहुंचा। इस दौरान तकरीबन 400 मीटर तक तेंदुआ दौड़ता रहा। खास बात यह है कि आसपास मौजूद भीड़ पर उसने हमला नहीं किया। तेंदुआ केवल अपनी जान बचाने के लिए दौड़ता रहा। अब फिर से तेंदुए को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग ने तेंदुए के पास प्लॉट में एक ही जाल लगाया लेकिन, अब दूसरा जाल मंगवाया गया है। 
विज्ञापन

6 of 11
leopard in meerut - फोटो : अमर उजाला
अब पल्लवपुरम फेज-2 मुख्य डिवाइडर रोड के पास एक प्लॉट खाली है, उसी में तेंदुआ बैठा हुआ है, जिसकी दोबारा से घेराबंदी की जा रही है। पल्लवपुरम फेज-1 यू-पॉकेट स्थित एमआईईटी पब्लिक स्कूल के बाहर मेन गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड अजीत ने लगभग सुबह आठ बजे तेंदुए को स्कूल के मेन गेट के सामने से भागते हुए देखा और तेंदुआ सामने स्कूल की झाड़ियों में छुप गया।
विज्ञापन

7 of 11
तेंदुआ। - फोटो : amar ujala
वहीं स्कूल के मीडिया प्रभारी अजय चौधरी को तुरंत जानकारी दी गई। अजय चौधरी ने तुरंत पल्लवपुरम थानाध्यक्ष से बात कर एवं वन विभाग की टीम को फोन करके जानकारी दी, जिसके लगभग आधे घंटे बाद वहां पर टीम पहुंची।

8 of 11
leopard in meerut - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद स्कूल प्रशासन ने सभी बच्चों के अभिभावकों को मैसेज व फोन करके छुट्टी की सूचना दी। इसी वजह से स्कूल में आज बच्चे नहीं आ पाए। जो बच्चे स्कूल में आ गए थे उन्हें अपनी पर्सनल गाड़ियों से घर छोड़ा गया। स्कूल में जो अध्यापक मौजूद थे उन लोगों ने भी खुद को अंदर ही बंद कर लिया और बाहर से सभी खिड़की दरवाजे बंद कर लिए गए।

9 of 11
leopard in meerut - फोटो : अमर उजाला
संसाधनों के अभाव में हर बार फेल होता है वन विभाग
तमाम दावों के बावजूद जब भी शहर में तेंदुआ आया, वन विभाग उसे पकड़ने में फेल साबित हुआ। संसाधनों के अभाव में तेंदुआ वन विभाग को धता बताकर लोगों की जान के लिए खतरा बनता रहा। 2018 में सदर स्थित लकड़ी की टाल में आया तेंदुआ वन कर्मियों की पकड़ में नहीं आया था और कई लोगों को घायल करते हुए कैंटोनमेंट अस्पताल में छिप गया था।

10 of 11
रोड पर रोड़ता तेंदुआ। - फोटो : amar ujala
बताया गया कि घंटों की मशक्कत के बाद यहां से भी ऑपरेशन थिएटर का शीशा तोड़कर भाग गया था। इसके बाद इसे जीओसी मेस से पकड़ा जा सका था। यहां भी वन विभाग के संसाधन विहीन होने का पता लगा था और पांच साल बाद शुक्रवार को पल्लवपुरम फेस-2 में भी वन विभाग की पोल खुल गई।
विज्ञापन

11 of 11
तेंदुआ। - फोटो : amar ujala
आज भी फेल रहा वन विभाग
मेरठ में शुक्रवार को भी वन विभाग कर्मी केवल एक जाल लेकर पहुंचे। उनके पास न कोई दूसरा जाल था और न ही उसे बेहोश करने के लिए ट्रेंकुलाइजर गन थी। करीब दस मिनट तक जाल में फंसे होने के बाद भी तेंदुआ घर से निकलकर डिवाइडर रोड पर एक खाली प्लाट में छिप गया। चार घंटे बाद हस्तिनापुर से अतिरिक्त जाल मंगाए गए हैं। इसके बाद ही प्लाट को चारों तरफ से कवर किया जा सका।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें