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चौंकाने वाला खुलासा, हर साल खप रहीं एनसीईआरटी की 5.64 करोड़ की नकली किताबें

Wed, 02 Sep 2020 12:42 PM IST
कपिल kapil आशुतोष भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
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नकली किताबों का गोदाम - फोटो : अमर उजाला
मेरठ शहर के सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी की नकली किताबों का सिंडिकेट जड़ें जमा चुका है। चौंकाने वाले आंकड़े यह हैं कि शहर में सालाना करीब 5.64 करोड़ रुपये की नकली किताबें खपाई जा रही हैं। इसे जिले और राज्य स्तर पर जोड़ें तो पता चलेगा कि शैक्षिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार किस हद तक फैल चुका है।
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कई तरह की किताबें बरामद की गईं - फोटो : अमर उजाला
शहर में एनसीईआरटी की सालाना करीब 8.64 करोड़ रुपये की किताबों की मांग है, जबकि एनसीईआरटी अपने अधिकृत एजेंटों को करीब तीन करोड़ रुपये की किताबों की ही सप्लाई कर पा रहा है। इसके बाद बची हुई जरूरत को नकली किताबों को छापने वाले पूरा करते हैं। इस खेल में अन्य प्रकाशकों की मोटे मुनाफे वाली किताबें भी सेटिंग से स्कूलों में लगा दी जाती हैं। कमीशन और लंबा उधार चलने के सामने रजिस्टर्ड एजेंट ठगा सा महसूस करते हैं।
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नकली किताबें - फोटो : अमर उजाला
आपूर्ति सीमित, भ्रष्टाचार की चेन
एनसीईआरटी की किताबों की आपूर्ति सीमित होने के कारण फर्जी किताबों की छपाई का काम खूब फलफूल रहा है। इस फर्जीवाड़े में करोड़ों रुपये की बचत से प्रिंटिंग प्रेस संचालकों के वारे न्यारे हो रहे हैं। पूरी चेन से वितरकों से लेकर स्कूल संचालकों को फायदा पहुंच रहा है। एजेंटों द्वारा हर स्तर पर तय कमीशन आपस में बांट लिया जाता है।

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मौके पर जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
फोन पर खुला ऑफर देते हैं एजेंट
माही बुक पैलेस के संचालक राहुल कुमार ने बताया कि नकली किताबों का प्रकाशन करने वाले फोन पर खुला ऑफर देते हैं। फर्जी किताबें उपलब्ध कराने के लिए उनके पास भी ऑफर आया था। इसमें दूसरे प्रकाशकों की भी किताबें थीं। 
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जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
यूं उठाते हैं फायदा
शंकर आश्रम चौराहा स्थित माही बुक पैलेस एनसीईआरटी के प्रमुख एजेंट राहुल कुमार ने बताया कि शहर में एनसीईआरटी की करीब तीन करोड़ रुपये की किताबों की सालाना सप्लाई होती है। मांग के अनुसार बहुत सी पुस्तकों की कमी बनी रहती है। ऐसे में फर्जी किताबों का कारोबार करने वाले इसका फायदा उठाते हैं।
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गोदाम - फोटो : अमर उजाला
सदर स्थित आइडियल बुक डिपो के संचालक सुधीर सलूजा ने बताया कि शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों की मांग तय होती है, उसी के अनुसार सप्लाई दी जाती है। इसके विपरीत बड़ी संख्या में लोग पक्के बिल के साथ काम नहीं करते हैं। जिसका नकली किताबें बेचने वाले फायदा उठाते हैं।
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नकली किताबें - फोटो : अमर उजाला
यह है फर्जीवाड़े का गणित
एनसीईआरटी का कक्षा नौ से बारहवीं तक का कोर्स 1000-1200 रुपये में मिल जाता है। रेफरेंस बुक्स की कीमत अधिक होती है। सीबीएसई के शहर में करीब 150 स्कूल हैं। कक्षा 6 से 12 तक के बच्चे ही ज्यादातर सीबीएसई की किताबें पढ़ते हैं। औसत एक स्कूल में इन कक्षाओं के करीब 480 बच्चों को एनसीईआरटी की किताबों की सालाना जरूरत होती है। इस हिसाब से शहर में ही 8.64 करोड़ रुपये की किताबें पढ़ी जाती हैं। एनसीईआरटी के रजिस्टर्ड एजेंट के अनुसार शहर में तीन करोड़ रुपये की किताबों की सप्लाई होती है।

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