मेरठ के सरधना के कपसाड़ में सुनीता की हत्या कर उसकी बेटी रूबी के अपहरण के मामले में सियासत उफान पर है। इंसाफ की मांग कर रहे परिजनों के आंसुओं के बीच शुक्रवार के बाद शनिवार को भी प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। इस दौरान एक तरफ भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम और सुनील भराला गांव के भीतर परिजनों से मुलाकात कर मदद का भरोसा दिला रहे थे, तो दूसरी तरफ पुलिस ने विपक्षी सांसदों, विधायकों व अन्य नेताओं के आगे बैरिकेड्स की दीवार खड़ी कर दी।
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Meerut Murder and kidnapping
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
मेरठ के सरधना के कपसाड़ कांड के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद और आसपा (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद को रोकने के लिए दो जिलों की पुलिस ने पूरी ताकत लगा दी। दिल्ली से मेरठ के बीच घंटों हाईवोल्टेज ड्रामा चला। पुलिस और सांसद के बीच जमकर बहसबाजी, धक्का-मुक्की और खींचतान हुई।
आखिरकार पुलिस को चकमा देकर सांसद बाइक से मेरठ पहुंच गए। हालांकि पुलिस ने उन्हें टोल पर रोक लिया। यहां सांसद कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गए। काफी देर गहमागहमी के बाद सांसद वापस लौट गए।
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पुलिस से नोकझोंक करते सांसद चंद्रशेखर आजाद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यूपी गेट पर तैनात हो गया भारी पुलिस बल
मामला शनिवार दोपहर करीब 3:45 बजे शुरू हुआ। चंद्रशेखर आजाद दिल्ली हवाई अड्डे से सीधे मेरठ के लिए निकले थे। जैसे ही इसकी सूचना मिली, एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव, कौशांबी, इंदिरापुरम, खोड़ा और साहिबाबाद थानों के प्रभारियों के साथ भारी पुलिस बल यूपी गेट पर तैनात हो गया। भीम आर्मी प्रमुख का काफिला पहुंचते ही पुलिस ने घेराबंदी कर दी।
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पुलिस से नोकझोंक करते सांसद चंद्रशेखर आजाद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस पर कपड़े पकड़कर खींचने और बदसलूकी का आरोप
करीब 15-20 मिनट तक तीखी बहस चली। दो बार अलग-अलग गाड़ियों से निकलने की कोशिश नाकाम होने पर चंद्रशेखर अचानक कार से उतरे और पैदल ही मेरठ की तरफ दौड़ पड़े। इस दौरान इंदिरापुरम थाना प्रभारी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो जमकर धक्का-मुक्की हुई। सांसद ने पुलिस पर कपड़े पकड़कर खींचने और बदसलूकी का आरोप लगाया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
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काशी टोल प्लाजा पर रोके जाने पर नगीना सांसद चंद्रशेखर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
काशी टोल पर भारी हंगामा, डीएम-एसएसपी से भिड़ंत
शाम को जब चंद्रशेखर मेरठ के काशी टोल पहुंचे तो उन्होंने पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर रुमाल बांध रखा था। वहां डीएम डॉ. वीके सिंह, एसएसपी डॉ. विपिन ताडा, एडीएम सिटी बृजेश कुमार सिंह और एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह भारी फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स के साथ तैनात थे। पुलिस ने उन्हें रोक लिया। कार्यकर्ताओं के साथ वह वहीं धरने पर बैठ गए। सांसद ने मांग की कि उन्हें पीड़ित परिवार से मिलाया जाए या कम से कम वीडियो कॉल पर बात कराई जाए। अधिकारी पहले उन्हें टोल कार्यालय में ले गए लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों का हवाला देकर मना कर दिया। इस पर चंद्रशेखर वहां से बाहर आकर धरने पर बैठ गए।
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बाइक पर सवार होकर आते सांसद चंद्रशेखर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस देखती रह गई...
इतनी भारी फोर्स को चकमा देते हुए चंद्रशेखर ने डिवाइडर के दूसरी तरफ छलांग लगाई और अपने गनर के साथ एक्सप्रेस-वे पर दौड़ लगा दी। वहां उन्होंने एक बाइक सवार को रोका और उस पर बैठकर मेरठ की ओर निकल गए। गाजियाबाद पुलिस एनएच-9 पर खड़ी तमाशा देखती रह गई। सांसद ने बताया कि नाकेबंदी तोड़ने के लिए उन्होंने 8 फीट ऊंची दीवार फांदी, कई बार गाड़ियां बदलीं और फिर एक्सप्रेस-वे से नीचे उतरकर गांव के रास्तों का सहारा लिया।
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डासना कट पर दौड़कर पुलिस से बचते सांसद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हर चौराहे पर यमराज है, तो आरोपी बाहर क्यों ?
पुलिस ने करीब 15-20 कार्यकर्ताओं को घसीटकर जीप में डालने की कोशिश की जिससे स्थिति और बिगड़ गई। करीब 15 मिनट के धरने के बाद पुलिस के काफी समझाने पर वह वापस दिल्ली के लिए रवाना हुए। चंद्रशेखर आजाद ने कहा, मुख्यमंत्री सदन में कहते हैं कि हर चौराहे पर यमराज खड़ा है तो फिर कपसाड़ के आरोपी अब तक फरार क्यों हैं।
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काशी टोल प्लाजा पर रोके जाने पर एसपी ट्रैफिक और सपा विधायक अतुल प्रधान की नोकझोंक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सपा सांसद, विधायक से धक्का-मुक्की
दिल्ली से कपसाड़ जाने के लिए निकले सपा सांसद रामजी लाल सुमन को पुलिस प्रशासन ने मेरठ के काशी टोल प्लाजा पर रोक दिया। इस पर कार्यकर्ता भड़क गए और हंगामा कर दिया। सूचना पर सरधना विधायक अतुल प्रधान भी वहां पहुंच गए और पुलिस अधिकारियों से आगे जाने देने की अनुमति मांगी। इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जमकर धक्कामुक्की हुई।
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एक्सप्रेस वे पर धरने पर बैठे सपा विधायक अतुल प्रधान
- फोटो : अमर उजाला
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक प्रतिनिधिमंडल को कपसाड़ गांव में पीड़ित परिवार की मदद के लिए भेजा था। जैसे ही सांसद रामजी लाल सुमन दिल्ली से वहां पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोक लिया। सूचना मिलते ही सरधना विधायक अतुल प्रधान समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे।
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टोल पर तैनात आरएएफ
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने एसपी यातायात राघवेंद्र कुमार मिश्र और एडीएम सिटी बृजेश कुमार सिंह से काफिले को आगे जाने देने की मांग की, लेकिन अनुमति नहीं मिली। अनुमति न मिलने पर विधायक अतुल प्रधान और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्कामुक्की हुई। सपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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कपसाड़ में तनाव
- फोटो : अमर उजाला
ये नेता रहे मौजूद
करीब दो घंटे चले हंगामे के बाद सांसद वापस दिल्ली लौट गए। इस दौरान सपा जिलाध्यक्ष कर्मवीर गुमी, पूर्व जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी, जिला पंचायत सदस्य सम्राट मलिक, पूर्व विधायक योगेश वर्मा, प्रवेश गुमी, पुष्पेंद्र कसाना, विजयपाल कश्यप, राजदीप विकल, नदीम चौहान, गौरव काजीपुर और अनुज प्रजापति मौजूद रहे।
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धरने पर बैठे ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
सरकार पर भेदभाव का आरोप
सांसद ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष को रोककर सरकार अपने गुनाहों पर पर्दा डाल रही है। उन्होंने एनसीआरबी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यूपी में अनुसूचित जाति के लोगों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हो रहे हैं। अपराधियों को सत्ता का संरक्षण महसूस हो रहा है। उन्होंने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार का बुलडोजर जाति और धर्म देखकर चल रहा है। यह सरकार पूरी तरह दलित विरोधी है।
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धरने पर बैठे अतुल प्रधान
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में जगह-जगह बाबा साहेब अंबेडकर और बुद्ध की प्रतिमाएं तोड़ी जा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो समाजवादी पार्टी बड़ा आंदोलन करेगी। इधर, कपसाड़ गांव में मृतक सुनीता के परिवार से मिलने जा रहे हस्तिनापुर के पूर्व विधायक व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि व कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने गांव के अंदर जाने से रोक दिया। उनकी पुलिस से नोकझोंक हुई लेकिन पुलिस नहीं मानी। ऐसे में पूर्व विधायक को वापस लौटना पड़ा।
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गांव कपसाड़ में मृतक के परिजनों से मिलने पर रोकती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस के साथ तीखी झड़प और हल्का बल प्रयोग, हंगामा
सरधना के कपसाड़ गांव में शनिवार को पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे विभिन्न संगठनों व राजनीतिक दलों और पुलिस बीच खींचतान से खूब हंगामा हुआ। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के प्रस्तावित आगमन की सूचना पर पुलिस ने गांव को छावनी में तब्दील कर दिया था। इसके बावजूद भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी, भाजपा और एआईएमआईएम के कार्यकर्ताओं के पहुंचने से दिनभर तनाव का माहौल बना रहा।
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सिवाया टोल प्लाजा पर रोके जाने के बाद पुलिस से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान की होती नोकझोंक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रशासन ने कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए गांव के चारों ओर बैरिकेडिंग और नाकेबंदी की थी। इसके बावजूद कई कार्यकर्ता पगडंडियों के रास्ते सकौती मार्ग होते हुए रजवाहे के पुल तक जा पहुंचे। यहां पुलिस और आरएएफ के जवानों ने उन्हें रोका जिसके बाद दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक, गाली-गलौज और हाथापाई शुरू हो गई। विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को खदेड़ दिया। हालांकि कुछ कार्यकर्ता फिर भी खेतों के रास्ते पीड़ित परिवार तक पहुंच गए।
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टोल प्लाजा पर रोके जाने पर पुलिस से नोकझोंक करते नेता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सोम और समता मूलक दल में टकराव
जब पूर्व विधायक संगीत सोम और भाजपा नेता पंडित सुनील भराला पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें सीधे प्रवेश की अनुमति दी थी। इसी दौरान वहां मौजूद समता मूलक दल के कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार पर दलित विरोधी होने का आरोप लगा दिया। इस पर संगीत सोम भड़क उठे। उन्होंने मृतका सुनीता के बेटे नरसी से स्पष्ट कहा कि यदि इन कार्यकर्ताओं को यहां बुलाया गया तो वह वापस चले जाएंगे। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।
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गांव कपसाड़ में ग्राम द्वार पर बैरिकेडिंग लगाकर तैनात आरएएफ
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एआईएमआईएम ने किया प्रदर्शन
दोपहर में एआईएमआईएम के कार्यकर्ता भी पुलिस की नाकेबंदी को चकमा देकर पगडंडियों के सहारे गांव में दाखिल हुए। पुलिस ने उन्हें गली के कोने पर रोक लिया जहां कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में पुलिस ने 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को ही पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति दी।
यह था मामला
बृहस्पतिवार सुबह सरधना थाना इलाके के कपसाड़ गांव निवासी सुनीता अपनी बेटी रूबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। रजबहे की पटरी के पास आरोपी पारस सोम, सुनील और उनके कुछ साथी कार लेकर आए और रूबी को अगवा करने का प्रयास किया। मां ने विरोध किया तो उन पर फरसे से हमला कर दिया था। इसके बाद आरोपी रूबी को अगवा कर फरार हो गए थे। अस्पताल में इलाज के दौरान सुनीता की मौत हो गई थी। इस मामले में बृहस्पतिवार और शुक्रवार को दिनभर हंगामा चला था।