राजेंद्र अग्रवाल, भाजपा-बाएं
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मेरठ-हापुड़ सीट भाजपा के लिए सुरक्षित मानी जाती रही है। लेकिन इस बार सपा, बसपा और रालोद गठबंधन ने भाजपा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। जिस तरह मुस्लिम-एससी मतदाताओं का बसपा प्रत्याशी के पक्ष में ध्रुवीकरण हुआ, उससे इस सीट पर एक नये समीकरण बन गए। हाल ये रहा कि भाजपा हापुड़, किठौर, दक्षिण और शहर विधानसभा में बड़े अंतर से हारी। इन चारों विधानसभाओं में भाजपा की हार का अंतर एक लाख के आसपास था। लेकिन कैंट विधानसभा में मिली 1.02 लाख से ज्यादा की लीड और पोस्टल बैलेट से मिली बढ़त के सहारे राजेंद्र अग्रवाल मात्र 4729 वोटों से जीत हासिल कर पाए।
मेरठ सीट पर एक बार फिर मतदाताओं ने कांग्रेस को हाशिये पर रखा, जबकि 1989 से पहले इस सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व रहता था। कांग्रेस को अब तक के सबसे कम वोट मिले। प्रत्याशी हरेंद्र अग्रवाल 34,479 वोट ही हासिल कर पाए। अन्य आठ प्रत्याशी तो आठ हजार वोटों से नीचे ही सिमट गए। नोटा को छह हजार से ज्यादा ने प्रयोग किया।