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टूट गया परिवार: बच्चों से ये वादा करके गए थे शहीद अनिल तोमर, रह गईं सिर्फ यादें, देर रात लाया गया शव, तस्वीरें

Wed, 30 Dec 2020 03:07 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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शहीद अनिल तोमर - फोटो : अमर उजाला
उत्तरप्रदेश के मेरठ में मुंडाली ग्राम सिसौली निवासी सेना के जवान अनिल तोमर की शहादत की जानकारी मिलते ही सोमवार को गांव में मातम पसर गया।शहीद अनिल नवंबर में छुट्टी पर घर आए थे। कोरोना काल से घर में रह रहे बच्चे पापा से बाहर कहीं घूमने की जिद कर रहे थे। वह हर बार टाल देते थे कि जब हालात ठीक हो जाएंगे तो घूमने चलेंगे। 17 दिसंबर को उनकी छुट्टी पूरी हुई थी। जम्मू-कश्मीर के शोपियां में ड्यूटी पर जाने से पहले बच्चों से यह वादा करके गए थे कि अबकी बार जब छुट्टी पर आएंगे तो घूमने चलेंगे। बच्चों की यह तमन्ना अधूरी ही रह गई।
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गांव में पसरा सन्नाटा - फोटो : अमर उजाला
18 दिसंबर को ही छुट्टी मना कर गए थे
अनिल तोमर नवंबर में एक महीने की छुट्टी लेकर घर आए थे। छुट्टी के दौरान वे अधिकतर समय पिता के साथ खेती में हाथ बंटाते थे। अनिल तोमर अच्छे खिलाड़ी थे। हाल ही में सेना की तरफ से आयोजित 25 किलोमीटर की दौड़ में उन्होंने भाग लेकर जीत हासिल की थी।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
सोमवार अनिल की शहादत की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया। परिजनों में कोहराम मच गया। आसपास के गांवों में इस सूचना के बाद शोक की लहर दौड़ गई। आसपास गांवों के लोग भी गमगीन पिता को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों के अनुसार अनिल तोमर का बहुत ही अच्छा व्यवहार था। इसके चलते ग्रामीण उसका काफी सम्मान करते थे। उसके पिता भी दोनों बेटों के सेना में होने पर बहुत गर्व करते थे। अनिल की शहादत की खबर मिलते ही परिजन उसकी पत्नी एवं बच्चों को मित्रलोक कॉलोनी स्थित घर से गांव सिसौली ले आए।
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विलाप करते अनिल के पिता - फोटो : अमर उजाला
फोन बंद हुआ तो भाई सुनील को भेजा कश्मीर
अनिल तोमर रात में परिजनों को कम ही फोन करते थे। 25 दिसंबर की शाम को उनकी पिता से बात हुई। हालचाल पूछने के बाद फोन कट गया। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। 26 दिसंबर को भी उनका फोन बंद ही रहा। परिजन चिंता में थे, वे जानते थे कि अनिल घातक प्लाटून का हिस्सा होने के कारण अक्सर आतंकी ऑपरेशन में जाते रहते थे। 27 दिसंबर को अनिल तोमर के एक साथी का परिजनों के पास फोन आया। उसने बताया कि अनिल को कई गोलियां लगीं थीं, अब ऑपरेशन हो गया है। चिंता न करें।
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परिवार का रो-रोकर बुरा हाल - फोटो : अमर उजाला
परिजनों ने राजस्थान के गंगानगर में सेना में तैनात छोटे बेटे सुनील तोमर से बात की। सुनील दिल्ली से फ्लाइट लेकर कश्मीर पहुंच गए। परिजनों के मुताबिक, अनिल तोमर ने भाई को देखकर आंखें खोली, लेकिन फिर उनकी आंखें बंद हो गईं। पांच गोलियां लगने से अधिक खून बह गया। परिजनों ने बताया कि अनिल इतने बहादुर थे कि जब आतंकियों ने गोलियां चलाईं तो वे टीम में सबसे आगे रहे। इस ऑपरेशन में सेना के एक अफसर को भी गोली लगने की बात बताई जा रही है।
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शहीद अनिल तोमर - फोटो : अमर उजाला
दो साल में तीसरी शहादत
दो साल के भीतर मेरठ का तीसरा लाल शहीद हुआ है। 2018 में पुलवामा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में बसा टीकरी निवासी अजय कुमार शहीद हो गए थे। इसके बाद साल 2019 में कंकरखेड़ा के मेजर केतन आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए।
 
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शहीद का शव... - फोटो : amar ujala
शहीद अनिल कुमार तोमर का शव कल देर रात लाया गया। 
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