विलाप करते अनिल के पिता
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फोन बंद हुआ तो भाई सुनील को भेजा कश्मीर
अनिल तोमर रात में परिजनों को कम ही फोन करते थे। 25 दिसंबर की शाम को उनकी पिता से बात हुई। हालचाल पूछने के बाद फोन कट गया। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। 26 दिसंबर को भी उनका फोन बंद ही रहा। परिजन चिंता में थे, वे जानते थे कि अनिल घातक प्लाटून का हिस्सा होने के कारण अक्सर आतंकी ऑपरेशन में जाते रहते थे। 27 दिसंबर को अनिल तोमर के एक साथी का परिजनों के पास फोन आया। उसने बताया कि अनिल को कई गोलियां लगीं थीं, अब ऑपरेशन हो गया है। चिंता न करें।