Meerut News: कृष्णा नगर डौरली में आग लगने से सागर और उनकी बेटी शिवानी की मौत हो गई, जबकि 10 लोग घायल हो गए। अस्पताल में भर्ती ज्योति पूरी घटना के बारे में आराम से बात कर रही है, जबकि उसे नहीं पता कि पति व बेटी अब इस दुनिया में नहीं हैं।
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अस्पताल में भर्ती कांता और ज्योति।
- फोटो : अमर उजाला
कृष्णा नगर में मकानों और दुकानों में आग लगने के बाद सबसे पहले अंदर सो रहीं कांता की नींद खुली और उन्होंने शोर मचा दिया। उनके इस प्रयास से मकान में रह रहे दो परिवारों के दस लोग तो बच गए, लेकिन उनके अपने बेटा सागर और पोती शिवानी उर्फ लाली की जान नहीं बच पाई। सागर अंतिम सांस तक बच्चों और परिवार की जान बचाने के लिए आग और धुएं से जूझते रहे।
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अस्पताल में भर्ती।
- फोटो : अमर उजाला
नींद से जागने के बाद कांता, सागर और उनकी पत्नी ज्योति अपने दोनों बेटों कान्हा व शिवा (10) और बेटी शिवानी की जान बचाने के लिए जूझते रहे। वह बेहोश होने से पहले कभी उन्हें गोद में लेते तो कभी उन्हें आगोश में लेकर छुपाने का प्रयास करते रहे। ज्योति आईसीयू में भर्ती हैं और उन्हें अभी तक पति और बेटी की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। पति और बेटी की मौत से अनजान ज्योति ने अपनी आपबीती सुनाई।
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डौरली में लगी आग।
- फोटो : अमर उजाला
ज्योति ने बताया कि सागर हर रोज लगभग 11 बजे दुकान से घर लौटते थे। खाना खाने के बाद वह, पति सागर और बेटी शिवानी एक कमरे में सो रहे थे। जबकि उनकी सास कांता बराबर के कमरे में दो बेटों कान्हा और शिवा के साथ सो रहीं थीं।
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आग लगी।
- फोटो : अमर उजाला
सास कांता ने जब आग लगने का शोर मचाया तो सभी जाग गए। एक बेटे को सागर और दूसरे बेटे को उनकी मां कांता गोद में लेकर उनके कमरे में आ गईं। जान बचाने के लिए संजय का परिवार भी उनके कमरे में आ गया।
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जली बाइक।
- फोटो : अमर उजाला
ज्योति ने बताया कि कमरे में आने से पहले दोनों परिवारों ने बाहर निकलने और जीने की ओर जाने का प्रयास किया लेकिन हवा तेज थी और हवा का रुख उनके कमरे की ओर था। इसके चलते आग की लपटें लगभग सभी पांचों कमरों तक पहुंचने लगीं। वह सबसे कोने वाले कमरे में थीं और लपटें यहां कम पहुंच रहीं थीं। इसके चलते सभी लोग इस कमरे में आ गए थे।
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आग से जली स्कूटी।
- फोटो : अमर उजाला
ज्योति ने पूछा- मेरे बच्चे और परिवार कैसा है?
ज्योति ने बताया कि उन्होंने तीनों बच्चों को बचाने का हरसंभव प्रयास किया। सभी लोगों का दम घुट रहा था। वह लगातार खांस रहे थे। इस कमरे में केवल एक छोटा रोशनदान था। वह भी आग लगने वाले बरामदे की ओर था। इसमें से भी धुआं कमरे में आ रहा था।
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मेरठ अग्निकांड।
- फोटो : अमर उजाला
सबसे पहले शिवानी बेहोश हो गई। इसके बाद अन्य लोगों के साथ वह भी बेहोश हो गईं। इसके बाद उसे अस्पताल में होश आया। ज्योति सभी से बस यही पूछ रही है कि उनके बच्चे और परिवार के सभी सदस्य कैसे हैं।
बच्चों और परिवार को बचाने में गई सागर की जान
हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंचे मसूरी गांव निवासी पूजा गोस्वामी और गौरव गोस्वामी ने बताया कि उनके चचेरे भाई सागर गोस्वामी लगभग दो वर्ष पूर्व इस भवन में परिवार के साथ किराये पर रहने आए थे। सागर शारदा रोड पर फास्टफूड बिक्री का काम करते थे। उन्होंने बताया कि सागर की जान बच्चों और परिवार को बचाने में गई है।