फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रदूषण का कहर : खांस रहा हर तीसरा शख्स, अस्पतालों में 40 प्रतिशत बढ़ी सांस के मरीजों की तादाद, पढ़ें खास खबर

Fri, 11 Nov 2022 03:58 PM IST
कपिल kapil अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
1 of 9
जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
सांसों में घुल रहे प्रदूषण का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। बीते 40 दिन के अंदर शहर में दस करोड़ के कफ सिरप और पांच करोड़ रुपये के नेबुलाइजर बिक गए। अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या भी 30 से 40 फीसदी तक बढ़ गई है। मास्क लगाने के बाद भी राहत नहीं मिल रही। सांस के मरीजों को इन दिनों दवा की डोज भी बढ़ानी पड़ी है। 

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि जब भी प्रदूषण का स्तर बढ़ता है तो श्वसन तंत्र संबंधी दवाओं की बिक्री में कई गुना इजाफा हो जाता है। बीते 40 दिन के अंदर खैरनगर दवा बाजार से ही करीब 15 करोड़ की दवाएं बिक चुकी हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन दिनों मौसम की मार से सांस के मरीजों को बड़ी परेशानी है।

यह भी पढ़ें: भाकियू की बैठक: लखनऊ में 26 नवंबर को होगी महापंचायत, किसानों से अधिक संख्या में कूच करने का आहवान

शहर की हवा में बीते करीब एक माह से घुले प्रदूषण की वजह से निजी और सरकारी अस्पतालों में सांस, खांसी, साइनोसाइटिस और आंखों में जलन महसूस करने वाले मरीजों की संख्या 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार को 2521 मरीज पहुंचे, जिनमें 827 को सांस,  खांसी- बुखार, नाक कान व गला और आंखों में जलन की शिकायत थी। वहीं, पीएल शर्मा जिला अस्पताल की ओपीडी में 1533 मरीज पहुंचे, जिनमें  सांस, खांसी- बुखार, नाक कान व गला और आंखों में जलन जैसी शिकायत वाले 519 मरीज थे।
विज्ञापन

2 of 9
सांस लेने में तकलीफ - फोटो : अमर उजाला
प्रदूषण बांट रहा दमा
हवा में फैले प्रदूषण के तत्व से अस्थमा, सीओपीडी, दमा के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। इनकी या तो दवाइयां बढ़ानी पड़ रही हैं या फिर इन्हें भर्ती करना पड़ रहा है। इस तरह के प्रदूषण में अगर स्वस्थ व्यक्ति भी रहे और एहतियात न बरते तो वह भी दो-तीन साल में सांस का मरीज बन जाता है। - डॉ. वीएन त्यागी, चेस्ट फिजीशियन

फेफड़ों की झिल्लियों में पहुंच रहे दूषित कण 
दूषित कण हवा के जरिए फेफड़ों की झिल्लयों में पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। ऐसे मरीजों को अगर जल्दी उपचार न मिले तो यह बहुत खतरनाक है। - डॉ. वीरोत्तम तोमर, सांस एंव छाती रोग विशेषज्ञ

अब्दुल मन्नान (65) बीते एक सप्ताह से ज्यादा परेशान हैं। कहते हैं कि घर से बाहर निकलते ही सांस फूलने लगती है। इलाज के लिए एक निजी क्लीनिक पर पहुंचे तो कार से उतर नहीं पाए, चिकित्सक ने कार में ही इन्हें देखा।
 
विज्ञापन

3 of 9
सांस लेने में तकलीफ - फोटो : अमर उजाला
एक निजी अस्पताल में इलाज कराने आईं माधवपुरम निवासी पूनम (50) बताती हैं कि  लगातार दवाइयां चल रही हैं। लगातार मास्क लगा रही हैं फिर भी राहत नहीं। दिन भर धुंध सी छाई रहती है जिससे फेफड़ों में जकड़न सी महसूस होती है। बार-बार खांसी उठती है।

4 of 9
सांस लेने में तकलीफ - फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर को दिखाने के लिए ओपीडी में इंतजार कर रहे देवेंद्र कुमार (55) बताते हैं कि उनका ऑक्सीजन स्तर 90 के आसपास है। कई दिन से स्मॉग छाया हुआ है, जिससे उनकी दवाइयां पहले के मुकाबले बढ़ गई हैं।
विज्ञापन

5 of 9
जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
आंखों में होती है जलन
वायु प्रदूषण के संपर्क से ड्राई आई की समस्या आती है। इससे आंखों में खुजली होती है और आंखें लाल हो जाती हैं। - डॉ अमित गर्ग, नेत्र रोग विशेषज्ञ 

आंखों को सकता है नुकसान
जब प्रदूषण का स्तर गंभीर होता है, तब हवा की मोटी परत (स्मॉग) आंखों को बहुत नुकसान पहुंचाती है। इससे आंखों में एलर्जी हो रही है। इंफेक्शन ज्यादा बढ़ा तो आंखों को नुकसान हो सकता है। - डॉ. आरसी गुप्ता, नेत्र रोग विशषज्ञ, मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन

6 of 9
जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
अभी राहत के आसार नहीं
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. यूपी शाही का कहना है कि अभी प्रदूषण से राहत के आसार नहीं हैं। तेज हवा चले या फिर बारिश हो, इसके बाद ही प्रदूषण का स्तर कम हो सकता है। अभी मौसम ऐसे ही बना रहेगा।
विज्ञापन

7 of 9
जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
धूल से बढ़ रही परेशानी
आईआईएफएसआर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एन. सुभाष का कहना है कि दीपावली के बाद से हवा की रफ्तार बिल्कुल धीमी हो गई है। इस कारण वातावरण में घुल रहे धूल के कणों से परेशानी बढ़ रही है। इसी कारण से स्मॉग का स्तर भी बढ़ रहा है। अभी कुछ दिन ऐसा ही रहने की आशंका है।

8 of 9
मेरठ में छाया स्मॉग - फोटो : amar ujala
स्मॉग से राहत नहीं, एक्यूआई 249  
शहर में स्मॉग से राहत नहीं मिल रही है। जिले का औसत एक्यूआई गुरुवार को 249 दर्ज किया गया। शहर में सबसे ज्यादा खराब हवा जयभीमनगर में रही, जहां एक्यूआई 300 दर्ज किया गया। मौसम कार्यालय पर दिन का अधिकतम तापमान 28.2 व न्यूनतम तापमान 14.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। 
विज्ञापन

9 of 9
मेरठ में स्मॉग - फोटो : amar ujala
शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक
जयभीमनगर   300
पल्लवपुरम   228 
गंगानगर      218 
बेगमपुल      298 
तेज गढी       277 
बिजली बंबा   262 
हापुड चौराहा  288 
इंदिरा चौक    250 
बच्चा पार्क     277 
कंपनी बाग     286

ये बरतें सावधानी
बाहर निकलते समय मास्क लगाएं 
सुबह जल्दी सैर पर न जाएं 
जरूरी तो आंखों को बचाने के लिए चश्मा लगाएं 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें