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धधकते घरौंदों की राख में ढूंढते रहे जिंदगी भर की कमाई, झकझोर देंगी मेरठ बवाल के बाद की ये तस्वीरें

Fri, 08 Mar 2019 04:04 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ बवाल
मछेरान और भूसामंडी में हुए बवाल ने यहां रहने वाले लोगों को जिंदगी भर का दर्द दिया है। करीब 200 झुग्गी झोपड़ियों में लगी भीषण आग में घर के साथ सपने भी उजड़ गए। हर आंख उस मास्टरमाइंड को तलाश कर रही है, जिसने यह जख्म उन्हें दिया। 
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मेरठ बवाल
मछेरान में रह रहे लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें यह दिन भी देखना पड़ेगा। रोज के कमाने खाने वाले और जद्दोजहद भरी जिंदगी जीने वाले इन लोगों के सामने इस घटना के बाद नए सिरे से जिंदगी शुरू करने की चुनौती आकर खड़ी हो गई है। 
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मेरठ बवाल
पति की मौत के बाद परिवार को पाल रही वकीला पर मानों मुसीबत का पहाड़ टूट गया हो। वकीला की दो बेटी और एक बेटा है। एक बेटी की शादी वह कर चुकी है। अब एक बेटी और एक बेटा शादी के लिए बचे हैं। वह घर-घर काम कर बेटी के लिए दहेज जुटा रही थी। एक-एक सामान वह जुटाकर बक्से में रख देती। 
 

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मेरठ बवाल - फोटो : अमर उजाला
बुधवार को लगी आग ने उसकी भी झुग्गी को तबाह कर दिया। दहेज के लिए जुटाया सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। अनस का घर उसकी कमाई से चल रहा था। बड़ी मेहनत कर उसने घर में नेट मशीन लगाई। एक लाख रुपये कीमत की यह मशीन थी जो आग की भेंट चढ़ गई। 
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मेरठ बवाल
पूरा परिवार सदमे में है। परिवार यह भी नहीं सोच पा रहा कि जिंदगी शुरू करें तो कहां से? आग में तीन लाख रुपए का तैयार माल भी खाक हो गया, इसे असम भेजा जाना था। यही नहीं घर के बाहर खड़ी नई स्कूटी भी आग में जल गई। 
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मेरठ बवाल
मछेरान की मोमीना भी सदमे में है। पति रिक्शा चालक है। वह खुद घर पर जाल बुनने का काम करती है। तब जाकर पांच बच्चों को वह पालते हैं। आग में पूरा घर तबाह हो गया। सिर छिपाने की जगह नहीं बची। ऐसी ही कुछ स्थिति निसार की भी है। वह बताती है कि आग लगने के बाद जैसे-तैसे उसने अपने पोती-पोतों को बचाया। पूरा घर जल गया। चार पोतों और दो पोतियों को लेकर कहां जाए, यह समझ नहीं आ रहा। 

 
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मेरठ बवाल
एक और पीड़िता इमराना रो-रोकर कहने लगी कि अब बेटियों की शादी कैसे होगी। दहेज का सामान जलकर राख हो गया और घर में कुछ नहीं बचा। बेटियों की शादी करना तो दूर की बात, अब उनको खाना खिलाना भी मुश्किल हो रहा है। 

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मेरठ बवाल
भूसा मंडी और मछेरान की इस बस्ती में रहने वाले करीब 200 परिवारों को यह जख्म मिला है। अब हर किसी की जुबां पर केवल यही सवाल है कि आखिर कौन है, जिसने उनके घर उजाड़कर सपने चूर कर दिए।

 

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मेरठ बवाल
राख में ढूंढते रहे जिंदगी भर की कमाई 
भूसा मंडी के भयावह मंजर ने सबकी आंखें नम कर दीं। गुरुवार सुबह उठे तो तबाही का मंजर दिखा। आग से बेघर हुए करीब 200 परिवारों के लोग राख में जिंदगी भर की कमाई ढूंढ रहे थे। 

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मेरठ बवाल
राख में बर्तन, जेवरात व अन्य सामान को लोग उठाते रहे और रोते रहे। मंहिलाएं रोती रहीं व बताती रहीं कि उनकी जिंदगी भर की कमाई पल भर में खत्म हो गई। इन बेबस आंखों में गम और गुस्सा था। बस सब्र था कि तबाही में परिवार तो बच गया।

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मेरठ बवाल
रिश्तेदारों का लगा रहा तांता
भूसा मंडी में तबाही की जानकारी लगने पर गुरुवार सुबह से रिश्तेदारों और करीबियों का तांता लगने लगा। रिश्तेदारों ने समझाया कि टेंशन मत लो। बच्चे बच गए। सब मिलकर काम करेंगे। दूसरा घर बनाएंगे। सही से गुजर बसर भी होगी। लेकिन बार-बार जला हुआ सामान देखकर महिलाओं के आंसू बंद नहीं हो रहे थे।

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मेरठ बवाल
भूख से चिल्लाते रहे बच्चे
बेघर लोग जले हुए सामान पर बैठे थे। बच्चे भूख के मारे चिल्लाने लगे। बेबस लोगों को रास्ता नहीं दिख रहा था कि आखिर कैसे बच्चों का पेट भर पाएंगे। चारों तरफ जला हुआ सामान पड़ा था। बर्तन भी ऐसी हालत में थे कि उनमें भोजन भी परोसा नहीं जा सकता। बस एक उम्मीद थी कि कोई उनको भोजन दे दे। 
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मेरठ बवाल
आग में जले दहेज में देने के लिए सहेज कर रखे गए सोने व चांदी के जेवरात।
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