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जांबाज पिता हो गए शहीद... अब नन्हे आरव को कौन दिलाएगा खिलौने, घर के इकलौते चिराग थे अजय

Tue, 19 Feb 2019 03:47 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
ढाई साल के मासूम को तो यह भी नहीं पता कि उसके पिता कितने बहादुर सिपाही थे। जब भी छुट्टी मनाने आते तो नन्हे मासूम को खिलौने दिलाते थे। लेकिन परिवार पर गम का ऐसा पहाड़ टूटा कि अब नन्हे मासूम को खिलौने दिलाने वाले पिता घर नहीं लौटेंगे। अब कौन दिलाएगा ढाई साल के आरव को खिलौने:-
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martyr ajay kumar son
ढाई साल का आरव अभी इतना बड़ा नहीं कि उसे इस गम का पता हो। सुबह सबको रोते देखा तो वो भी रोने लगा। बार-बार दादी से कहता कि नीतू भइया से बात करा दो अम्मा।
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martyr ajay kumar
वहीं पोते को देखकर दादी और गांव की दूसरी महिलाएं बस यही कहतीं कि इसे कौन बताए कि अब उसके नीतू भइया कभी बात नहीं करेंगे। रोते-रोते मासूम दादी की गोद में सो गया। दादी उसे देखकर यही बोलतीं कि मेरे बेटे ने तो कुछ देखा ही नहीं।

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martyr ajay kumar
सिपाही अजय कुमार के घर का नाम नीतू था। आरव अजय के बड़े भाई के साथ ही खेलता था। छह माह पहले उनकी मौत के बाद से वो अकेला सा रहने लगा। अजय जनवरी में छुट्टी आए तो आरव ने उनसे कहा कि आप मेरे नीतू भइया हैं। इसके बाद वो पापा को नीतू भइया कहने लगा।
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martyr ajay kumar
रविवार रात को भी उसने फोन पर बात करते हुए कहा कि नीतू भइया कब आओगे। सोमवार को आरव जगा तो सभी रो रहे थे। उनको देखकर वो भी रोने लगा। रोते-रोते वह थककर दादी की गोद में ही सो गया। दादी कमलेश दिनभर पोते को लिपटाए बैठी रहीं। वे इस अफसोस में थी कि इसके भविष्य का क्या होगा। कौन ख्याल रखेगा।
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martyr ajay kumar
उन्होंने बताया कि आरव अभी तीन साल का भी नहीं हुआ। छह जुलाई को उसका जन्मदिन है। सबकुछ खत्म हो गया।
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martyr ajay kumar
बेटे के साथ फहराया था तिरंगा 
छुट्टी पर आए अजय कुमार ने 26 जनवरी को बेटे आरव के साथ घर पर तिरंगा फहराया था। सोमवार सुबह शहादत की खबर मिलने के बाद कुछ पूर्व सैनिक घर पहुंचे तो उन्होंने अजय के फहराए तिरंगे को सैल्यूट किया।

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martyr ajay kumar
बेटे पर गर्व, पोते को भी सेना में भेजूंगा 
अजय कुमार की शहादत से गांव ही नहीं आसपास इलाके के लोग गमगीन हैं। दिनभर गांव में दूसरे गांवों से लोगों का आना-जाना लगा रहा। रात को घरों में चूल्हे नहीं जले। सभी की जुबां पर था कि इतने बड़े दुख को कैसे सहेगा यह परिवार। वहीं अजय के पिता को बेटे की शहादत पर फख्र है। वह पोते भी सेना में भेजने का जज्बा रखते हैं।

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martyr ajay kumar
सेना में हवलदार पद से रिटायर्ड अजय के पिता वीरपाल सिंह को उसकी शहादत पर गर्व है। वह कहते हैं, देश पर जान कुर्बान करना हर सैनिक अपनी शान समझता है। सीआरपीएफ जवानों पर हमले के बाद उनकी अजय से मोबाइल पर बात हुई थी। हमले से वह बहुत परेशान था। उसने आतंकवादियों को उनकी ही भाषा में जवाब देने की बात कही थी। और उसने अपना कहा कर दिखाया। उन्होंने कहा कि वह पोते को भी सेना में भेजेंगे।
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martyr ajay kumar
खेतों से लौटे ग्रामीण, नहीं जले चूल्हे 
अजय कुमार ने इंटर पास कर पतला डिग्री कॉलेज में बीए में प्रवेश लिया था। इस दौरान जबलपुर में सेना की भर्ती चल रही थी। 22 मई 1992 को जन्मे अजय सात अप्रैल 2012 में जबलपुर से सेना में भर्ती हुए। गांव बसी टीकरी में सुबह अजय के शहीद होने की सूचना मिल गई थी। ज्यादातर ग्रामीण उस समय खेतों पर काम करने चले गये थे। लेकिन जिसने भी यह खबर सुनी, वह काम छोड़कर शहीद के घर पहुंचा। दोपहर और रात को किसी घर में चूल्हा नहीं जला। हर ग्रामीण का कहना था कि उन्हें अजय कुमार की शहादत पर गर्व है।

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