पांडव टीला अनदेखे हस्तिनापुर को दिखाता है। हस्तिनापुर की समृद्धि से लेकर उसके विध्वंस तक की कथा को यह अपने अंदर समाहित किए है। यह पुरातत्वविद् ही नहीं आमजन के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है। यह पांडव टीला ही है जो हस्तिनापुर को जनश्रुतियों से निकालकर ऐतिहासिक रूप से प्रामाणिक बनाता है। संरक्षण की कमी ने इसे जंगलात बन जाने दिया। जहां उत्खनन हुआ, वहां झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। सरकारी उदासीनता ने हस्तिनापुर को उजाड़ बने रहने के लिए अभिशप्त किया है।