पांडवों का जीवन संघर्षों से भरा था। दुर्योधन ने उन्हें लाक्षागृह में जलाकर मारने की योजना बनाई। इसके लिए लाख का लाक्षागृह तैयार कराया। विदुर ने पांडवों को इस षड़यंत्र के बारे में बताया। उनको बचकर निकालने के लिए सुरंग भी तैयार कराई। एक रात लाक्षागृह में आग लगाकर पांडव अपनी माता कुंती के साथ उसी सुरंग से बाहर निकल गए। यह कहानी सबको पता है। कौतुहल यह जानता है कि वहां से निकलकर पांडव कहां पहुंचे। इसका उत्तर खंडवारी कुटी देती है। बागपत में यमुना की खादर में यह प्राचीन स्थान है। बरनावा में बनाई गई सुरंग का अंत यहीं होता है। जनश्रुति है कि सुरंग से होते हुए कुंती पुत्र यहीं निकले थे। इसे पांडव कुटी भी कहते हैं। महाभारत काल के इतने अहम स्थल से सरकारी तंत्र ने मुंह फेर रखा है। वह खुद यहां तक नहीं पहुंचा है, श्रद्धालुओं को तो क्या पहुंचाएगा।