पौराणिक निधियों का पर्याय है परीक्षितगढ़। यहां टहलते हुए आप सरलता से महाभारत काल की पदचाप सुन सकते हैं। उसके पीछे-पीछे कदम खुद चल पड़ते हैं और सामने होते हैं उस युग के पात्र। यहां के मंदिर, ताल, कूप उन चरित्रों को कल्पना से निकालकर यथार्थ में ले आते हैं। कुछ ही क्षणों में आप युगों की यात्रा कर लेते हैं। ये सिर्फ ईंट-पत्थर से चिने भवन नहीं बल्कि कालखंड के वे चिन्ह हैं जिन्हें अमिट रखने का दायित्व हम सबका है। इस कड़ी में आपको धर्म की इन अतुलनीय धरोहरों से मिलवाते हैं।