टीले को खोदने पर आज भी पुरावशेष निकलते हैं। इसी टीले पर मराठों के पहरे की मीनार गरुड़ध्वज है, जिसे ग्रामीण गड़गज कहते हैं। इतिहासकार विघ्नेश त्यागी की मानें तो सैनी ही वह स्थान है जहां पांडु की मृत्यु हुई थी। माद्री यहीं सती हुई थीं। पुरा व पौराणिक संपदा के आगार सैनी की सूरत इससे बेहतर हो सकती थी। जो देखा, वह निराश करने वाला है।