दोपहर के 12 बजे थे। ये रिपोर्टर ऐसे ही किसी शख्स की तलाश में था, जो भूखा हो। काफी देर तक भी ये तलाश पूरी नहीं हुई। जगह-जगह प्रशासन की तरफ से, आम लोगों की तरफ से जरूरतमंदों को खाने के पैकेट बांटे जा रहे थे। डेढ़ घंटे की इसी तलाश में हमें महेंद्र कुमार मिले।
दिल्ली रोड पर बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने खोखे में रहने वाले महेंद्र कुमार 25 साल पहले मेरठ आए थे और तभी से मजदूरी कर अपना पेट पाल रहे हैं, लेकिन लॉकडाउन में कमाई का जरिया बंद हो गया तो पेट भरना भी मुश्किल हो गया।
रिपोर्टर ने महेंद्र सिंह को आवाज दी तो वह उठकर बैठ गए। रिपोर्टर ने पूछा-खाना खा लिया। महेंद्र सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया। कितना भी भूखा हो कोई श्रमजीवी, अंदर कुछ है, जो मांगने से रोकता है...रिपोर्टर ने उनके अंदर चलती इस कशमकश को पढ़ा और रुक गए।
ये तो तय था कि महेंद्र कुमार को रोटी की जरूरत है। ये भी तय था कि कम से कम इस समय वे भूखे नहीं रहेंगे। लेकिन महेंद्र के जरिए हमें उस इंतजाम को परखना था, जो लखनऊ से लेकर आपकी गली के आखिरी आदमी तक पहुंचने का दावा करता है।
रिपोर्टर ने किया यूपी पुलिस के हेल्प लाइन नंबर पर फोन
रिपोर्टर ने यूपी पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 112 पर आम आदमी की तरह कॉल मिलाया। कॉल रिसीव करने वाली महिला पुलिसकर्मी ने लोकेशन और नाम पूछकर परेशानी जानी तो उनको बताया गया कि मेरठ में दिल्ली रोड पर एक व्यक्ति भूखा है। खाना पहुंचा दीजिए।
महिला पुलिसकर्मी ने कुछ समय बाद मदद पहुंचने का आश्वासन देते हुए फोन रख दिया। इससे पहले की 112 गाड़ी आ पाती कि परतापुर थाने की बोलेरो में घूूम रहे ड्राइवर देवदत्त शर्मा और हेड कांस्टेबल पवन पहुंच गए। खाने के दो पैकेट महेंद्र सिह को देकर रवाना हो गए। खाना मिला तो महेंद्र सिंह का चेेहरा भी चमक गया। बोल पड़े कि पुलिस अच्छा काम कर रही है।
रिएलिटी चेक अभी बाकी था...
महेंद्र सिह को आज का खाना मिल गया, लेकिन रिएलिटी चेक अभी पूरा नहीं हुआ था। 112 गाड़ी का अभी भी इंतजार था। थोड़ा वक्त लगा, लेकिन आधा घंटे बाद रिपोर्टर के मोबाइल पर 0121-2664633 नंबर से कॉल आ गई। कॉल करने वाले ने बताया कि वो कंट्रोल रूम से बोल रहे हैं।
आपने खाद्य सामग्री को लेकर कॉल की थी, कहां का पता है। उनको बताया गया कि जरूरतमंद को मदद मिल चुकी है। इसके तुरंत बाद ही यूपी पुलिस की 112 पीसीआर पर तैनात पुलिसकर्मी ने फोन मिला दिया। खाना पहुंचाने की जगह पूछी तो उनको बताया गया कि खाना परतापुर पुलिस द्वारा दिया जा चुका है।
थानों में भी चल रही भट्टी, लोग खूब कर रहे मदद
शहर में रोजाना लाखों लोगों को खाना मुहैया कराया जा रहा है। लोग बड़ी संख्या में मदद को आगे आ रहे हैं। कुछ रोज गाड़ियों में खुद खाना लेकर निकल पड़ते हैं तो कुछ थाने में पहुंचा देते हैं।
कितनी ही संस्थाएं प्रशासन को खाना मुहैया करा देती हैं। जिसके बाद यह खाने शहर के तमाम हिस्सों में दोपहर और शाम को बांटा जा रहा है। ऐसे में सड़कों पर रहने वाला कोई शख्स भूखा नहीं है। लॉकडाउन के इस बुरे दौर में सबको दो वक्त की रोटी मिल रही है।