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लाॅकडाउन तोड़ने वालों की अब खैर नहीं..., बिना काम घर से निकलें हैं तो पुलिस के डंडों के बारे में भी जान लीजिए

Wed, 01 Apr 2020 01:34 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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police lathi - फोटो : अमर उजाला
लॉक डाउन के दौरान देशभर में पुलिस जहां जरूरतमंद और बेसहारा लोगों की मदद के लिए आगे आ रही है तो लाॅकडाउन का उल्लंघन करने वाले लोगों पर सख्त रुख अखत्यिार कर रही है। अब भले ही पुलिस को इसके लिए लाठी डंडो का सहारा ही क्यों न लेना पड़ रहा हो।

ऐसे में पुलिस यह नहीं देखती कि लाठी कहां पड़ रही है। एक बार लगी तो कई दिन तक दर्द नहीं जाने वाला। लाॅकडाउन के बीच बेवजह सड़कों पर घूमने निकले हैं तो जरा पुलिस के डंडे और लाठी के बारे में भी जान लीजिए :-
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meerut police, up police - फोटो : अमर उजाला
पुलिस दंगा लाठी या डंडा एक छोटे समूह या किसी अन्य हिंसा द्वारा की गई किसी भी हड़ताल को तितर.बितर करने के लिए पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण हैं। 

पुलिस जिन प्लास्टिक के डंडो का इस्तेमाल करती है वे पॉलीकार्बोनेट फाइबर के बने होते हैं। वही लाठियां बांस की बनी होती हैं। डंडों की लंबाई साढ़े तीन फुट और गोलाई तीन सेंटीमीटर होती है। इसकी वजह से इन्हें आसानी से हाथ में पकड़ा जा सकता है। 
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police lathi - फोटो : amar ujala
इन डंडों की मजबूती इनकी खासियत ही होती है। पुलिस अधिकारियों की मानें कई बार पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ता है ऐसे में स्थिति नियंत्रित करने या सच पता लगाने के लिए पुलिस लाठी या डंडो का प्रयोग करती है।

लाठी लगने से जहां आरोपी या अपराधी के शरीर में हड्डी टूटने का खतरा रहता है। जबकि  फाइबर के डंडों के इस्तेमाल से व्यक्ति की हड्डियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। हां, इस की चोट से शरीर में दर्द खूब होता है।

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बागपत पुलिस - फोटो : अमर उजाला
प्लास्टिक के इन डंडों की कीमत की बात करें तो इनमी कीमत दौ सौ रुपये से साढ़े तीन सौ तक जा सकती है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पुलिसकर्मी इन डंडो का उपयोग सुरक्षा व्यवस्था बनाने, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए करती है।

 
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लॉकडाउन मेरठ - फोटो : amar ujala
फाइबर के इन डंडो की के बारे में कहा जाता है कि इनकी मार से शरीर पर चोट के निशान नहीं बनते लेकिन अपराधी को चोट पूरी लगती है। वहीं लाठी की मार के निशान व्यक्ति के शरीर पर साफ नजर आते है।
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लॉकडाउन मेरठ - फोटो : amar ujala
यानी किसी पुलिसकर्मी ने लाॅकडाउन का उल्लंघन करने पर यदि डंडा मार दिया तो शरीर में चोट नजर नहीं आएगी, लेकिन व्यक्ति कई दिन तक दर्द से कराहता रहेगा। तो बेहतर है कि नियम न तोड़े जाएं और पुलिस की मार से बचा जाए।
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