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न जुल्मों की इंतेहा, न सहने की..., जिसने अस्मत लूटी उसी से करा दिया निकाह, फिर जो हुआ, भयावह था

Sat, 14 Dec 2019 03:53 PM IST
Dimple Sirohi रैना पालीवाल, अमर उजाला, मेरठ
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पीड़िता - फोटो : अमर उजाला
जुल्मों से भरी जिंदगी में बंधक बनकर रहती हैं, सिखाया है चुप रहना इसलिए होंठ सिये रहती हैं। समाज और अपनों के सितम बर्दाश्त करना ही उन्हें अच्छा बनाता है। ससुराल में चाहे कितनी भी तकलीफ क्यों न मिले, उससे बाहर कदम रखना गुनाह है।

बेटियां चाहे किसी भी धर्म की हों, उनके हिस्से यही तेजाब आया है। फिर चाहे मायके-ससुराल वाले हों या पंचायत के नुमाइंदे, सब उनको भेड़-बकरी की तरह हांकते रहे हैं... आगे जानें आखिर कैसे मेरठ के एक शख्स ने दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम देकर युवती से बदला लेने के लिए किया झूठा निकाह। और फिर ...
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पीड़िता - फोटो : अमर उजाला
हिजाब के पीछे छिपी शबनम (बदला नाम) के मासूम चेहरे पर उसकी दर्दनाक दास्तां लिखी है। महज 19 साल की उम्र में उसने कितनी दरिंदगी झेली है। अस्मत लूटने वाले से उसका निकाह करा दिया गया। फिर जो हुआ, भयावह था।
 
दूसरी तरफ आयशा को अपनों ने ही तबाह कर दिया। प्यार और वफा के बदले पति ने उसे न सिर्फ तीन तलाक दिया बल्कि उसके बच्चे भी छीन लिए। उनमें से एक 11 दिन का था। आयशा ही नहीं, उसका आंचल भी रोता है। तीन तलाक के खिलाफ कानून बनने के बाद भी इस तरह के मामलों पर अंकुश नहीं लग पाया है।
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पीड़िता - फोटो : अमर उजाला
19 वर्षीय शबनम का केस झकझोरने वाला है। जब वह नाबालिग थी, तब एक रिश्तेदार ने उसके साथ रेप किया। शबनम के घरवालों ने थाने में इंसाफ के लिए प्रार्थना पत्र दिया। इससे डरे आरोपी पक्ष ने पंचायत के साथ मिलकर परिवार पर निकाह का दबाव बनाया। पंचायत ने कहा, अगर निकाह नहीं किया तो हुक्का पानी बंद कर देंगे। छह जून 2019 को उसी आदमी से शबनम का निकाह करा दिया गया।

शबनम बताती है, यह मुझसे बदला लेने के लिए किया गया था। ससुराल के लोग मुझसे मारपीट करते थे। देवर और श्वसुर कहते, अब तुझे बताएंगे, रेप कैसे होता है। 16 सितंबर की रात श्वसुर ने मेरी इज्जत लूटी। 17 की सुबह पति को पता चला तो उन्होंने मुझे तीन तलाक दे दिया। शाहीन मैम ने मेरा मुकद्दमा दर्ज कराया। पति जेल में है। श्वसुर को गिरफ्तार नहीं किया गया। अभी भी पंचायत चल रही है।

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पीड़िता - फोटो : अमर उजाला
अपनों ने ही उसे रास्ते पर ला दिया 
आयशा के साथ अपनों ने ही दगा किया। उनकी वजह से वह रास्ते पर आ गई। यहां भी पंचायत का घिनौना रूप ही देखने को मिला। उसका निकाह 2014 में हुआ था। आयशा की तीन साल की बेटी है। 2019 में वह गर्भवती थी। 26 जनवरी को पति ने उसे तीन तलाक दे दिया। उसने इसे नहीं माना और ससुराल में ही रही। आयशा ने बेटे को जन्म दिया।

11 दिन का बच्चा आईसीयू में था। तभी ससुराल, मायके वाले और पंचायत ने मिलकर उसकी तकदीर का फैसला कर दिया। घरवालों ने बहाने से समझौते के कागज पर आयशा के दस्तखत करा लिए। ससुराल वालों ने सारे जेवर और रकम उसके मायके वालों को दे दी। उसके दोनों बच्चे छीन लिए। आयशा ने पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस की कार्रवाई न होने पर वह थाने में ही धरने पर बैठी। शाहीन परवेज दोनों केस लड़ रही हैं। आयशा के मामले में उन्होंने उसके पिता और पंचायत के खिलाफ भी एफआईआर कराई है।
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शाहीन परवेज - फोटो : अमर उजाला
पंचायतों के खिलाफ भी हो कार्रवाई  
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय संयोजिका शाहीन परवेज कहती हैं, पंचायत का फर्ज लड़कियों के घर बसाना है न कि तोड़ना। लड़कियों के मामले में उसका रुख बेहद नकारात्मक है। वह कभी महिलाओं के अधिकारों की बात नहीं करती।

पंचायतों के खिलाफ कार्रवाई की सख्त जरूरत है। तीन तलाक के मामले में जमानत इस शर्त पर होनी चाहिए कि पति अपनी पत्नी की जिम्मेदारी ले। उसे साथ लेकर जाए। इससे जो औरतें पति के साथ जाना चाहती हैं, उनके घर फिर से बस पाएंगे। 
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पीड़िता रेशमा - फोटो : अमर उजाला
आम था मारपीट करना...
28 वर्षीय रेशमा ने करीब 11 साल के रिश्ते में आए दिन पति की प्रताड़ना झेली। उसके लिए मारपीट करना आम बात थी। रेशमा के माथे पर जख्म के निशान है। बहुत डरी-सहमी है। इसी साल सितंबर में पति ने उसे इतना मारा कि वह अधमरी हो गई। उसका भाई उसे ससुराल से लेकर आया। उसका इलाज कराया। तीन दिन बाद पति ने आकर रेशमा को तीन तलाक दे दिया। 

भाई ने थाने में रिपोर्ट लिखानी चाही पर पुलिस ने मना कर दिया। पुलिस ने कहा, तीन तलाक का गवाह या वीडियो लेकर आओ। पीड़ित परिवार की कहीं सुनवाई नहीं हुई। अमर उजाला की कोशिशों के बाद उसकी एफआईआर दर्ज हो पाई। रेशमा के बच्चे नहीं हैं। उसने बताया, पति अक्सर मारपीट करते थे। मुझसे देह व्यापार कराना चाहते थे। मैं मना करती तो प्रताड़ित करते। 
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