जुल्मों से भरी जिंदगी में बंधक बनकर रहती हैं, सिखाया है चुप रहना इसलिए होंठ सिये रहती हैं। समाज और अपनों के सितम बर्दाश्त करना ही उन्हें अच्छा बनाता है। ससुराल में चाहे कितनी भी तकलीफ क्यों न मिले, उससे बाहर कदम रखना गुनाह है।
बेटियां चाहे किसी भी धर्म की हों, उनके हिस्से यही तेजाब आया है। फिर चाहे मायके-ससुराल वाले हों या पंचायत के नुमाइंदे, सब उनको भेड़-बकरी की तरह हांकते रहे हैं... आगे जानें आखिर कैसे मेरठ के एक शख्स ने दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम देकर युवती से बदला लेने के लिए किया झूठा निकाह। और फिर ...