आज भी समाज के बड़े तबके का बेटियों के प्रति नजरिया ऐसा ही है। उनके लिए लाडो बोझ है। तभी तो वे भगवान से कहती हैं, अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो। मेरठ से सटे परीक्षितगढ़ के नारंगपुर गांव में स्थित कन्या गुरुकुल में 70 लड़कियां पढ़ती हैं। ये गाजियाबाद, हरियाणा, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मुरादाबाद, उड़ीसा आदि स्थानों से यहां आई हैं। इनमें करीब 25 प्रतिशत बच्चियां ऐसी हैं जिनके घरवाले उन्हें यहां छोड़कर चले गए। फीस से बचने के लिए वे उनसे मिलने तक नहीं आते...